Collector’s Conference 2025 (मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में) की विस्तृत रिपोर्ट है। यह बैठक प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रही, क्योंकि इसमें मुख्यमंत्री ने राज्य की जनकल्याण योजनाओं, स्वास्थ्य, कृषि, पोषण और सुशासन पर एक साथ समीक्षा की।
यहाँ नीचे इसका विस्तृत विश्लेषण, बिंदुवार सारांश, संदर्भ, नीतिगत अर्थ और प्रशासनिक प्रभाव दिया गया है — ताकि यह रिपोर्टिंग, नीति-विश्लेषण या संपादकीय उपयोग — तीनों में काम आ सके।

🟦 1. बैठक का परिचय
कार्यक्रम: कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस 2025
स्थान: मंत्रालय, रायपुर
अध्यक्षता: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
उपस्थित:
मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, सभी विभागीय सचिव, संभागायुक्त, कलेक्टर एवं जिला सीईओ।
उद्देश्य
राज्य की प्राथमिक योजनाओं की प्रगति की समीक्षा, कमज़ोर जिलों की पहचान, तथा सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को लागू करने की दिशा तय करना।
🟨 2. अस्पतालों की स्थिति पर मुख्यमंत्री की सख्त नाराजगी
- मुख्यमंत्री ने कहा — “जनता इलाज के लिए अस्पतालों में आती है, परेशानी झेलने के लिए नहीं।”
- सरकारी अस्पतालों की अव्यवस्था पर सीधे कलेक्टरों को जिम्मेदार ठहराया।
- निर्देश:
- प्रत्येक कलेक्टर सप्ताह में कम-से-कम एक बार अस्पताल का निरीक्षण करें।
- अस्पतालों में स्टाफ की उपस्थिति, दवाइयों की उपलब्धता, स्वच्छता और मरीज सुविधा की समीक्षा करें।
- मातृ एवं शिशु मृत्यु दर घटाने के लिए हर प्रसव संस्थानिक (अस्पताल में) कराने की व्यवस्था करें।
- टीकाकरण सत्रों की पारदर्शिता, NRC केंद्रों के सतत संचालन, और Maternal Death Audit हर मामले में अनिवार्य हो।
🔹 यह संदेश स्पष्ट है कि स्वास्थ्य विभाग में जवाबदेही अब जिला स्तर पर तय होगी।
🟩 3. “सुपोषण योजना” में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिले
तीन जिलों — दुर्ग, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर — ने सुपोषण कार्यों में उत्कृष्टता दिखाई।
- दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह,
- राजनांदगांव जिला पंचायत सीईओ सुरुचि सिंह,
- मोहला-मानपुर कलेक्टर तूलिका प्रजापति ने प्रस्तुतीकरण दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा —
“सुपोषण अभियान केवल आंकड़ों की योजना नहीं, बल्कि बच्चों और माताओं के भविष्य की जिम्मेदारी है।”
- राजनांदगांव को सर्वश्रेष्ठ जिला घोषित किया गया।
- मोहला-मानपुर को नीति आयोग द्वारा पुरस्कृत होने पर बधाई।
- बीजापुर जिले को मलेरिया उन्मूलन में बेहतर कार्य के लिए सराहा गया।
🟢 यह दर्शाता है कि सरकार स्वास्थ्य और पोषण योजनाओं को केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि व्यवहारिक परिणामों से जोड़कर देख रही है।
🟪 4. स्व-सहायता समूहों (SHGs) की भूमिका और ‘रेडी टू ईट’ मॉडल
मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां स्व-सहायता समूहों को रेडी टू ईट (RTE) योजना की जिम्मेदारी दी गई है, वहां परिणाम बेहतर आए हैं।
- दंतेवाड़ा और रायगढ़ के कलेक्टरों की सराहना की।
- अन्य जिलों को इस मॉडल को तेजी से अपनाने के निर्देश।
मुख्यमंत्री का कथन —
“यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है और बच्चों के पोषण में अहम भूमिका निभा रही है।”
🟡 इससे सरकार महिला सशक्तिकरण और पोषण मिशन को एकीकृत करने की नीति पर आगे बढ़ रही है।
🟥 5. धान खरीदी पर मुख्यमंत्री की सख्त चेतावनी
- राज्य में 15 नवंबर से धान खरीदी प्रारंभ होगी।
- मुख्यमंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी — “धान खरीदी में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई सीधे कलेक्टर पर होगी।” - जांजगीर जिले में किसानों के पंजीयन में देरी पर नाराजगी व्यक्त की।
→ निर्देश: पंजीयन कार्य तुरंत पूर्ण करें।
🟤 यह वक्तव्य बताता है कि मुख्यमंत्री “एक्शन और रिजल्ट” पर केंद्रित प्रशासन चाहते हैं, केवल रिपोर्ट नहीं।
🟧 6. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और जनजातीय किसानों पर फोकस
- बस्तर और कोंडागांव जिलों का प्रदर्शन कमजोर पाया गया।
- मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा — “अगले एक माह में सभी पात्र किसानों का 100% पंजीयन सुनिश्चित करें।”
- विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTGs) के किसानों के लिए
विशेष शिविर लगाकर पंजीयन प्रक्रिया को आसान बनाने के निर्देश।
🟢 यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जनजातीय किसान नीति में सरकार के “इन्क्लूसिव डेवलपमेंट” दृष्टिकोण को दर्शाता है।
🟩 7. “प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना” में कोरबा का रोल मॉडल
- कोरबा जिला को “सूर्य घर” योजना में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए सराहा गया।
- कलेक्टर ने बताया कि
- बैगा और कोरवा जनजाति बहुल क्षेत्रों में
- डीएमएफ (District Mineral Foundation) फंड से इस योजना को तेज़ी से लागू किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा —
“कोरबा का यह नवाचार अन्य जिलों के लिए रोल मॉडल बन सकता है।”
🟡 यानी अब डीएमएफ फंड का उपयोग सिर्फ खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं से भी जुड़ सकेगा।
🟨 8. मुख्यमंत्री का समापन संदेश
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा —
“शासन की योजनाओं का वास्तविक मूल्यांकन तभी होगा,
जब उसका प्रभाव आम नागरिकों के जीवन में दिखाई दे।”
मुख्य बिंदु:
- पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही प्रशासन की तीन मुख्य शर्तें।
- कलेक्टरों को निर्देश:
- योजनाओं की नियमित समीक्षा करें।
- मैदानी स्तर पर निगरानी बढ़ाएं।
- रिपोर्टिंग से आगे बढ़कर “परिणाममुखी दृष्टिकोण” अपनाएं।
🟢 मुख्यमंत्री का यह बयान प्रशासनिक सुधारों के “नए टोन” की झलक देता है — यानी जवाबदेही नीचे तक जाएगी।
🟩 9. प्रशासनिक और राजनीतिक अर्थ
| क्षेत्र | दिशा/संकेत |
|---|---|
| स्वास्थ्य | अस्पतालों की सीधी जवाबदेही कलेक्टरों पर तय — फील्ड विज़िट अनिवार्य। |
| पोषण/महिला सशक्तिकरण | SHGs मॉडल को पूरे राज्य में विस्तारित करने की नीति। |
| कृषि नीति | धान खरीदी में पारदर्शिता पर “जीरो टॉलरेंस” नीति। |
| जनजातीय विकास | PVTG किसानों और बैगा-कोरवा समुदायों के लिए विशेष अभियान। |
| ऊर्जा नीति | डीएमएफ फंड से सौर-ऊर्जा पहल — “ग्रीन मिशन” की शुरुआत। |
🟫 10. निष्कर्ष
Collector’s Conference 2025 में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया —
- अब केवल योजनाओं का कागज़ी मूल्यांकन नहीं,
बल्कि मैदान पर परिणाम ही वास्तविक प्रगति का पैमाना होगा। - उनकी प्राथमिकता सूची में तीन शब्द प्रमुख हैं:
“पारदर्शिता – जवाबदेही – संवेदनशीलता।”
यह बैठक राज्य प्रशासन के लिए “परफॉर्मेंस ट्रैकिंग का रोडमैप” साबित हुई है —
जहाँ हर कलेक्टर को अब अपने जिले की “ग्राउंड-इफेक्ट रिपोर्ट” से खुद को साबित करना होगा।
