मंगलवार को शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव साफ तौर पर देखने को मिला। इसका सबसे बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा लगातार भारतीय शेयर बाजार से पूंजी निकासी रहा। बीते कई सत्रों से एफआईआई की ओर से हो रही भारी बिकवाली ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया है, जिसका असर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर पड़ा।
FII की लगातार बिकवाली से बिगड़ा बाजार का मूड
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, विदेशी निवेशक वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं को देखते हुए सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव, डॉलर की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के चलते एफआईआई भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। इसका सीधा असर बड़े शेयरों पर पड़ा, जिससे बाजार पर दबाव बना रहा।

सेंसेक्स-निफ्टी में उतार-चढ़ाव
बिकवाली के दबाव के कारण कारोबार की शुरुआत में ही सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में नजर आए। हालांकि बीच-बीच में कुछ सेक्टरों में हल्की खरीदारी से बाजार में रिकवरी की कोशिश दिखी, लेकिन एफआईआई की बिकवाली के सामने यह टिक नहीं पाई। खासतौर पर बैंकिंग, आईटी और मेटल सेक्टर के शेयरों में दबाव देखने को मिला।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी प्रभावित
एफआईआई की निकासी का असर केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मुनाफावसूली देखी गई। कई निवेशकों ने नए साल से पहले अपने पोर्टफोलियो को हल्का करना शुरू कर दिया है, जिससे इन शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई।
घरेलू निवेशकों ने संभाला मोर्चा
हालांकि बाजार में गिरावट के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) और रिटेल निवेशकों की ओर से कुछ हद तक खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को बड़ी गिरावट से सहारा मिला। अगर डीआईआई की यह भूमिका नहीं होती, तो बाजार में गिरावट और गहरी हो सकती थी।
आगे का रुख क्या रहेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक एफआईआई की बिकवाली जारी रहती है, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने, क्वालिटी शेयरों पर फोकस करने और लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
कुल मिलाकर, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने मंगलवार को शेयर बाजार पर दबाव बनाए रखा, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी हुई नजर आई।
