कांग्रेस पार्टी द्वारा मनरेगा योजना में किए जा रहे बदलावों और योजना के नाम से महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने के विरोध में “मनरेगा बचाओ संग्राम” की शुरुआत आज से की जा रही है। यह अभियान चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य में चलाया जाएगा, जिसमें संगठन से जुड़े नेता, निर्वाचित जनप्रतिनिधि और मनरेगा श्रमिक सक्रिय रूप से भाग लेंगे।

🗣️ आज से अभियान की औपचारिक शुरुआत
अभियान की शुरुआत शनिवार को जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से की जाएगी। इसमें कांग्रेस नेता सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने और मजदूरों के अधिकारों में कटौती का आरोप लगाएंगे।
⏳ 11 जनवरी: एक दिवसीय उपवास और प्रतीकात्मक विरोध
- 11 जनवरी को जिला मुख्यालयों या प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर
- महात्मा गांधी या डॉ. बी.आर. आंबेडकर की प्रतिमाओं के पास
- कांग्रेस नेता, निर्वाचित जनप्रतिनिधि और मनरेगा श्रमिक मिलकर
👉 एक दिवसीय उपवास और प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन करेंगे।
इसका उद्देश्य सरकार का ध्यान मनरेगा से जुड़े मुद्दों की ओर आकर्षित करना है।
🏘️ 12 से 29 जनवरी: पंचायत स्तर पर जनसंपर्क अभियान
- इस अवधि में सभी ग्राम पंचायतों में
- पंचायत स्तरीय चौपालें, जनसंवाद और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
- कांग्रेस नेता ग्रामीणों और मजदूरों को मनरेगा से जुड़े बदलावों की जानकारी देंगे और उनके सुझाव लेंगे।
✊ 31 जनवरी से 6 फरवरी: जिला स्तरीय धरना
- 31 जनवरी से 6 फरवरी तक
- सभी जिलों में मनरेगा बचाओ धरना आयोजित किया जाएगा।
- इस दौरान श्रमिकों की मांगों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।
🏛️ राज्य स्तरीय आंदोलन
- पीसीसी (प्रदेश कांग्रेस कमेटी) के नेतृत्व में
- राज्य स्तर पर विधानसभा घेराव किया जाएगा।
- कांग्रेस का आरोप है कि सरकार मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना को कमजोर कर रही है।
📢 अभियान का समापन
अभियान के अंतिम चरण में
- एआईसीसी (अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी) द्वारा
- देशभर में चार प्रमुख क्षेत्रीय रैलियों का आयोजन किया जाएगा।
👉 कांग्रेस का कहना है कि यह आंदोलन मनरेगा और ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए किया जा रहा है और जरूरत पड़ी तो इसे और तेज किया जाएगा।
