6,470 बोरियों की हेराफेरी से सूरजपुर प्रशासन में मचा हड़कंप
सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में धान खरीदी केंद्रों से जुड़ी अनियमितताओं के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा और गंभीर मामला भैयाथान तहसील के सारारावां धान खरीदी केंद्र से सामने आया है, जहां निरीक्षण के दौरान करीब 80 लाख रुपये मूल्य का धान गायब पाया गया। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

🔍 कैसे सामने आई गड़बड़ी?
धान खरीदी सत्र समाप्त होने में अब केवल कुछ ही सप्ताह शेष हैं। इसी को देखते हुए जिला प्रशासन ने लगातार निरीक्षण अभियान शुरू किया है।
- भैयाथान तहसीलदार के नेतृत्व में
- खाद्य विभाग और निगरानी समिति की संयुक्त टीम
- ने सारारावां धान खरीदी केंद्र का औचक निरीक्षण किया
निरीक्षण के दौरान जब धान की बोरियों की भौतिक गिनती की गई, तो भारी अंतर सामने आया।
📊 आंकड़ों में समझिए पूरा खेल
जांच में सामने आई स्थिति—
- 🔸 कुल दर्ज खरीदी: 4,842 क्विंटल धान
- 🔸 अब तक उठाव: 240 क्विंटल
- 🔸 केंद्र में होना चाहिए था: 40,602 क्विंटल
- 🔸 वास्तविक भंडारण मिला: 34,132 क्विंटल
👉 यानी 2,588 क्विंटल धान कम, जो लगभग
- 6,470 बोरी धान के बराबर है
- बाजार कीमत: करीब 80 लाख रुपये
❓ प्रबंधक नहीं दे सका जवाब
जब निगरानी समिति ने—
- धान की कमी को लेकर
- समिति प्रबंधक से स्पष्टीकरण मांगा
तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। इसके बाद—
- औपचारिक शिकायत दर्ज की गई
- धान खरीदी केंद्र के संचालक के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई
⚠️ क्या है हेराफेरी की आशंका?
प्रारंभिक जांच में कई गंभीर आशंकाएं जताई जा रही हैं—
- किसानों के खातों में फर्जी तरीके से धान की बिक्री दर्ज की गई
- वास्तविक रूप से धान की खरीदी हुई ही नहीं
- सरकारी धान की अवैध खरीद-बिक्री या हेराफेरी
- संभव है कि धान को ब्लैक मार्केट में बेचा गया हो
👉 हालांकि असली सच्चाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगी।
🧾 दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
विभाग ने साफ कहा है कि—
- मामले की गहराई से जांच की जा रही है
- दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा
- आपराधिक प्रकरण और वसूली की कार्रवाई भी संभव है
🔁 रामानुजनगर का मामला भी सवालों में
इसी जिले के रामानुजनगर तहसील के छिंदया धान केंद्र में भी—
- पहले निरीक्षण में 3,000 बोरी धान कम पाया गया
- अनुमानित कीमत: 20 लाख रुपये
लेकिन—
- बाद में गठित जांच टीम
- (खाद्य अधिकारी, नोडल अधिकारी, तहसीलदार, पटवारी)
- की दोबारा गिनती में सब कुछ सही बताया गया
👉 इससे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—
- क्या पहली जांच गलत थी?
- या दूसरी गिनती में गड़बड़ी की गई?
इसने पूरी जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
🏛️ पहले भी सामने आ चुके हैं घोटाले
गौरतलब है कि—
- सूरजपुर जिले में पहले भी
- धान खरीदी से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले सामने आ चुके हैं
इसके बावजूद—
- प्रशासनिक सख्ती के दावों के बीच
- ऐसी घटनाएं दोहराई जा रही हैं
🧑🌾 सरकार और प्रशासन की भूमिका
- सरकार धान खरीदी को लेकर संवेदनशील और गंभीर बताई जा रही है
- मंत्री, विधायक और जनप्रतिनिधि लगातार केंद्रों का दौरा कर रहे हैं
- कई निरीक्षण टीमें गठित की गई हैं
लेकिन सूरजपुर जिले में सामने आए मामले बताते हैं कि—
👉 जमीनी स्तर पर निगरानी में अभी भी बड़ी चूक है
🔎 अब आगे क्या?
- जांच रिपोर्ट का इंतजार
- दोषियों पर कार्रवाई से ही
- किसानों का भरोसा लौट सकेगा
धान खरीदी के बचे हुए दिनों में यह देखना अहम होगा कि—
- प्रशासन व्यवस्था को कितना सुधार पाता है
- और क्या वाकई बड़े मगरमच्छ पकड़े जाते हैं या नहीं
