मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले— “राष्ट्र निर्माण की बुनियाद में साहित्य की सदैव रही है निर्णायक भूमिका”
राजधानी रायपुर में साहित्य, संस्कृति और विचारों का महाकुंभ आरंभ हो गया है।
नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में आज रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय इस प्रतिष्ठित साहित्यिक आयोजन का उद्घाटन राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश के मुख्य आतिथ्य एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
उद्घाटन समारोह विनोद कुमार शुक्ल मंडप में आयोजित किया गया, जहां साहित्य, राजनीति, शिक्षा और कला जगत की कई नामचीन हस्तियां एक मंच पर उपस्थित रहीं।

👥 उद्घाटन समारोह में मौजूद प्रमुख अतिथि
इस गरिमामय अवसर पर—
- राज्यसभा उप सभापति हरिवंश
- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
- उपमुख्यमंत्री अरुण साव
- महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा की कुलपति डॉ. कुमुद शर्मा
- प्रसिद्ध रंगकर्मी एवं अभिनेता मनोज जोशी
विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
इसके साथ ही—
- मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा
- वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय
- छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा
- बड़ी संख्या में साहित्यकार, लेखक, बुद्धिजीवी और साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।
📖 महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन
उद्घाटन अवसर पर अतिथियों के करकमलों से कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया गया—
- छत्तीसगढ़ राज्य के 25 वर्ष पूर्ण होने पर आधारित पुस्तिका
- कॉफी टेबल बुक – छत्तीसगढ़ राज्य के साहित्यकार
- नेशनल सेल्फहुड इन साइंस – लेखक: जे. नंदकुमार
- लाल दीवारें, सफेद झूठ – लेखिका: प्रो. अंशु जोशी
- तेरा राज नहीं आएगा रे – लेखक: राजीव रंजन प्रसाद
ये सभी कृतियां समकालीन विमर्श और बौद्धिक चिंतन को समृद्ध करने वाली मानी जा रही हैं।
🗣️ उप सभापति हरिवंश का उद्बोधन
अपने संबोधन की शुरुआत छत्तीसगढ़ के महान साहित्यकार स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल को नमन करते हुए उप सभापति हरिवंश ने कहा—
- छत्तीसगढ़ी साहित्य की समृद्ध और प्राचीन परंपरा रही है
- इस प्रदेश ने अपनी स्थानीय संस्कृति और भाषा को सदैव सहेजकर रखा है
- रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन अत्यंत रचनात्मक और दूरदर्शी दृष्टिकोण को दर्शाता है
उन्होंने संत कबीर का उल्लेख करते हुए कहा कि—
- कबीर का काशी के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कवर्धा से भी गहरा संबंध रहा है
उन्होंने जोर देते हुए कहा—
“एक पुस्तक और एक लेखक भी दुनिया को बदलने की शक्ति रखते हैं।”
राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने साहित्य को—
- समाज को दिशा देने वाला
- आशा जगाने वाला
- निराशा से उबारने वाला
- और जीवन जीने का साहस देने वाला माध्यम बताया।
🇮🇳 साहित्य और राष्ट्र निर्माण का संबंध
हरिवंश ने कहा कि—
- आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है
- 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हमारा राष्ट्रीय संकल्प है
- स्टील उत्पादन, चावल उत्पादन और स्टार्टअप्स के क्षेत्र में भारत अग्रणी बन चुका है
उन्होंने स्पष्ट किया कि—
“भारत की आत्मनिर्भरता और वैश्विक शक्ति बनने के पीछे साहित्य की सशक्त भूमिका रही है।”
🗣️ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का प्रेरक संबोधन
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा—
- छत्तीसगढ़ प्रभु श्रीराम का ननिहाल है, और इस पावन भूमि पर साहित्य उत्सव का आयोजन गर्व का विषय है
- रायपुर साहित्य उत्सव 2026 साहित्य का महाकुंभ है
उन्होंने बताया कि—
- देशभर से 120 से अधिक ख्यातिप्राप्त साहित्यकार इसमें भाग ले रहे हैं
- कुल 42 सत्रों में सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विषयों पर गहन विमर्श होगा
मुख्यमंत्री ने कहा—
“यह समय गणतंत्र के अमृतकाल और छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष का है, और उसी भाव के अनुरूप यह आयोजन हो रहा है।”
🇮🇳 स्वतंत्रता संग्राम और साहित्य
मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम की तुलना समुद्र मंथन से करते हुए कहा—
- हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने विष रूपी कष्ट स्वयं सहा
- और आने वाली पीढ़ियों को आज़ादी का अमृत दिया
उन्होंने बताया कि—
- अनेक स्वतंत्रता सेनानी लेखक, पत्रकार और वकील भी थे
- माखनलाल चतुर्वेदी की “पुष्प की अभिलाषा”
- माधवराव सप्रे की “एक टोकरी भर मिट्टी” (हिंदी की पहली कहानी)
जैसी रचनाओं ने देश को प्रेरणा दी।
✍️ छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों का गौरव
मुख्यमंत्री ने—
- पं. लोचन प्रसाद पांडेय
- पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
- गजानन माधव मुक्तिबोध
जैसे साहित्यकारों का स्मरण करते हुए कहा कि—
“इनकी स्मृतियों को सहेजना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है।”
राजनांदगांव में त्रिवेणी संग्रहालय इसी भावना का प्रतीक है।
🎭 मंडपों को महान साहित्यकारों को समर्पण
रायपुर साहित्य उत्सव के विभिन्न मंडप—
- विनोद कुमार शुक्ल
- श्यामलाल चतुर्वेदी
- लाला जगदलपुरी
- अनिरुद्ध नीरव
जैसे महान साहित्यकारों को समर्पित किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा—
“कविता अन्याय के विरुद्ध प्रतिरोध करना सिखाती है, यही साहित्य की असली ताकत है।”
🌟 अन्य वक्ताओं के विचार
🔹 उपमुख्यमंत्री अरुण साव
- बसंत पंचमी पर आयोजित इस उत्सव को साहित्य का महाकुंभ बताया
- कहा कि छत्तीसगढ़ ने हिंदी साहित्य को अनेक महान पुरोधा दिए हैं
🔹 डॉ. कुमुद शर्मा
- अमृतकाल में आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी को भविष्य की नींव बताया
- साहित्य को आत्मबोध और सांस्कृतिक चेतना का माध्यम कहा
👩🎓👨🎓 युवाओं की बड़ी भागीदारी
- बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे
- विशेष रूप से युवा वर्ग की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली
- विभिन्न सत्रों में साहित्य, संस्कृति, लोकतंत्र और समाज पर सार्थक संवाद हुआ
🔎 निष्कर्ष
रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का यह शुभारंभ—
- साहित्यिक संवाद
- विचारों के आदान-प्रदान
- और सांस्कृतिक चेतना के विस्तार
की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहा है।
