रायपुर | छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में पचरा गीत और धार्मिक कथाओं के लिए चर्चित कथावाचक पं. युवराज पांडेय की सुरक्षा को लेकर दिए गए बयान के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। मंच से कथावाचक द्वारा सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए जाने के बाद अब यह मुद्दा सियासी बयानबाज़ी और आरोप–प्रत्यारोप का रूप ले चुका है।

क्या है पूरा मामला?
हाल ही में कथावाचक पं. युवराज पांडेय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे सार्वजनिक मंच से अपनी सुरक्षा को लेकर नाराजगी जताते नजर आए। उन्होंने कहा कि:
- कथा आयोजन में हजारों की भीड़ मौजूद है
- लेकिन सुरक्षा के लिए एक भी पुलिसकर्मी तैनात नहीं
- कलश यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की मालाएं चोरी हो गईं
- चोरी की घटनाओं से कई भक्त कथा में शामिल ही नहीं हो पाए
उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि:
“इतनी भीड़ प्रशासन को नहीं दिख रही है… बस गलती इतनी है कि हम छत्तीसगढ़िया हैं।”
मंत्री राजेश अग्रवाल का बयान
इस मुद्दे पर जब संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल से सवाल किया गया कि सरकार बाहर से आने वाले कथावाचकों को तो सुरक्षा देती है, लेकिन छत्तीसगढ़ के स्थानीय कथावाचकों को क्यों नहीं—तो उन्होंने कहा:
- यह सनातनियों की सरकार है
- सभी कथावाचकों और संतों को सुरक्षा दी जा रही है
- गृहमंत्री स्वयं कहते हैं कि संतों को पलकों में बैठाकर लाएंगे
मंत्री ने आगे कहा:
“हम तो डाकुओं को भी सुरक्षा दे देते हैं, फिर ये तो साधु-संत हैं।”
इसी बयान को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।
दीपक बैज का करारा पलटवार
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने मंत्री के बयान को आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा:
- कांग्रेस को किसी को सुरक्षा देने से कोई आपत्ति नहीं
- सवाल यह है कि छत्तीसगढ़ के स्थानीय साधु-संतों और कथावाचकों को नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है
उन्होंने कहा कि:
- राज्य में कई धार्मिक आयोजनों में
👉 भगदड़ की घटनाएं हो चुकी हैं
👉 जानें भी जा चुकी हैं - ऐसे में हर बड़े आयोजन में सुरक्षा देना प्रशासन की जिम्मेदारी है
‘डाकू’ वाले बयान पर तीखा हमला
दीपक बैज ने मंत्री के बयान पर तीखा तंज कसते हुए कहा:
“मंत्री के इस बयान से साफ हो गया है कि सरकार के हाथ से कानून व्यवस्था निकल चुकी है। सुरक्षा देने का सवाल ही नहीं, सरकार खुद डाकू बन गई है। यह सरकार लुटेरों की सरकार है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार:
- सुरक्षा व्यवस्था में पूरी तरह विफल है
- स्थानीय कलाकारों और कथावाचकों के साथ भेदभाव कर रही है
सियासी घमासान तेज
इस पूरे मामले ने अब:
- सुरक्षा व्यवस्था
- स्थानीय बनाम बाहरी
- धार्मिक आयोजनों की जिम्मेदारी
- और कानून-व्यवस्था की स्थिति
जैसे मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है, वहीं सत्ता पक्ष अपने बयान पर कायम नजर आ रहा है।
निष्कर्ष
कथावाचक पं. युवराज पांडेय की सुरक्षा से शुरू हुआ मामला अब सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव में बदल चुका है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब प्रदेश में धार्मिक आयोजनों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
