मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी उज्जैन एक बार फिर इतिहास और परंपरा के संगम का साक्षी बनने जा रही है।
सम्राट विक्रमादित्य की गौरवशाली परंपरा को समर्पित विक्रमोत्सव 2026 का आयोजन इस वर्ष 15 फ़रवरी से 19 मार्च तक किया जाएगा।

करीब एक महीने से अधिक समय तक चलने वाले इस महोत्सव में भारतीय संस्कृति, कला, साहित्य, ज्योतिष, नाट्य, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत का भव्य प्रदर्शन होगा। उज्जैन की धरती पर देश-विदेश से आए विद्वान, कलाकार, लेखक और सांस्कृतिक प्रतिनिधि अपनी सहभागिता दर्ज कराएंगे।
विक्रमोत्सव के दौरान
- विक्रम संवत् पर केंद्रित संगोष्ठियाँ,
- लोक एवं शास्त्रीय नृत्य-संगीत की प्रस्तुतियाँ,
- कवि सम्मेलन और साहित्यिक आयोजन,
- नाट्य मंचन,
- हस्तशिल्प और पारंपरिक कला की प्रदर्शनियाँ,
- तथा धार्मिक-सांस्कृतिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे।
शिप्रा तट, ऐतिहासिक स्थलों और प्रमुख सांस्कृतिक मंचों पर होने वाले कार्यक्रमों से उज्जैन पूरी तरह विक्रम युग के रंग में रंगा नजर आएगा।
यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करेगा, बल्कि धार्मिक पर्यटन, स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देगा।
सरकार का कहना है कि विक्रमोत्सव सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि यह भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, कालगणना और सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव है।
विक्रमोत्सव 2026 के माध्यम से उज्जैन एक बार फिर वैश्विक सांस्कृतिक मानचित्र पर अपनी ऐतिहासिक पहचान को मजबूती से स्थापित करेगा।
