कांकेर। कभी नक्सल हिंसा और दहशत के लिए पहचाना जाने वाला कोयलीबेड़ा इलाका अब एक नई तस्वीर पेश कर रहा है। जहां पहले विकास की राह में नक्सलवाद सबसे बड़ी रुकावट था, वहीं अब जब क्षेत्र में शांति लौट रही है, तो ग्रामीण अपने हक की बुनियादी सुविधाओं के लिए एकजुट होकर सड़कों पर उतर आए हैं।

🟥 18 ग्राम पंचायतों के 68 गांवों का चक्काजाम
कोयलीबेड़ा क्षेत्र की 18 ग्राम पंचायतों के 68 गांवों के ग्रामीणों ने:
- 5 सूत्रीय मांगों को लेकर
- चक्काजाम और धरना प्रदर्शन किया
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों तक नक्सल हिंसा झेलने के बाद अब जब हालात सुधरे हैं, तो सरकार को भी विकास की रफ्तार तेज करनी चाहिए।
🏢 ब्लॉक मुख्यालय, लेकिन अधिकारी नदारद
ग्रामीणों का सबसे बड़ा आरोप है कि:
- कोयलीबेड़ा ब्लॉक मुख्यालय होने के बावजूद
- अधिकारी यहां बैठते ही नहीं
लगभग सभी विभागों के कार्यालय और अधिकारी:
- 50 किलोमीटर दूर पखांजूर से संचालन कर रहे हैं
इस वजह से:
- ग्रामीणों को हर छोटे-बड़े काम के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है
- समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार मांग रखने के बावजूद आज तक स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
🎓 शिक्षा व्यवस्था बदहाल, कॉलेज की वर्षों पुरानी मांग
ग्रामीणों ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई—
- स्कूलों की हालत जर्जर है
- शिक्षकों की कमी है
- महाविद्यालय (कॉलेज) की मांग वर्षों से लंबित है
बारहवीं के बाद:
- छात्रों को 50 किलोमीटर दूर भानुप्रतापपुर जाना पड़ता है
- आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे
👉 पढ़ाई बीच में ही छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं
🏥 स्वास्थ्य सुविधाएं सिर्फ कागजों में
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है—
- केवल एक एम्बुलेंस, वह भी अक्सर अनुपलब्ध
- महिला डॉक्टर और विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी
- जरूरी मेडिकल उपकरणों का अभाव
ग्रामीणों का कहना है कि:
- योजनाएं तो बनी हैं
- लेकिन सुविधाएं कागजों से बाहर नहीं निकल पाईं
🌾 किसानों की पीड़ा: धान का पैसा लेने 50 किमी सफर
कोयलीबेड़ा क्षेत्र के अधिकांश लोग किसानी पर निर्भर हैं।
- किसान सरकार की योजनाओं के तहत धान बेचते हैं
- लेकिन भुगतान के लिए
👉 50 किलोमीटर दूर भानुप्रतापपुर जाना पड़ता है
स्थिति यह है कि:
- पैसा सिर्फ बुधवार को दिया जाता है
- कई बार किसानों को
👉 खाली हाथ लौटना पड़ता है
ग्रामीण लंबे समय से:
- सहकारी बैंक खोलने की मांग कर रहे हैं
- लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई
⚠️ चेतावनी: मांगें नहीं मानीं तो उग्र आंदोलन
ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा—
- उनकी मांगें जायज और बुनियादी हैं
- अगर सरकार और प्रशासन ने
👉 जल्द समाधान नहीं किया - तो आने वाले समय में
👉 उग्र आंदोलन किया जाएगा
🧾 निष्कर्ष
कोयलीबेड़ा का यह प्रदर्शन साफ संकेत देता है कि:
- नक्सलवाद के कमजोर पड़ते ही
👉 लोगों की विकास की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं - अब चुनौती सरकार और प्रशासन के सामने है
👉 शांति को स्थायी विकास में बदलने की
