जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में आयोजित भव्य सांस्कृतिक महोत्सव ‘बस्तर पण्डुम’ का शुभारंभ आज भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जगदलपुर के ऐतिहासिक लाल बाग मैदान में किया। राष्ट्रपति के आगमन से पूरा बस्तर क्षेत्र उत्साह और गौरव के माहौल में नजर आया। यह आयोजन बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपरा, कला और लोक जीवन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
राष्ट्रपति ने स्टॉल्स का किया अवलोकन
मुख्य कार्यक्रम के शुभारंभ से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुबह 10.55 बजे से 11.10 बजे तक बस्तर पण्डुम में लगाए गए विभिन्न स्टॉल्स का अवलोकन किया। इन स्टॉल्स में बस्तर की पारंपरिक हस्तशिल्प कला, ढोकरा आर्ट, बांस और लकड़ी से बने उत्पाद, हथकरघा वस्त्र, आदिवासी आभूषण, स्थानीय खाद्य सामग्री और स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को प्रदर्शित किया गया।
राष्ट्रपति ने इन स्टॉल्स में प्रदर्शित उत्पादों और कला की सराहना की तथा स्थानीय कारीगरों और महिला समूहों के प्रयासों की प्रशंसा की। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी भी ली।
लाल बाग मैदान में किया औपचारिक शुभारंभ
स्टॉल्स के अवलोकन के बाद राष्ट्रपति मुर्मू लाल बाग मैदान में आयोजित मुख्य समारोह में पहुंचीं, जहां उन्होंने ‘बस्तर पण्डुम’ के संभाग स्तरीय कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर पारंपरिक वेशभूषा में सजे आदिवासी कलाकारों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिसमें बस्तर के पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत और सांस्कृतिक झलक देखने को मिली।
कई गणमान्य अतिथि रहे उपस्थित
इस महत्वपूर्ण अवसर पर राज्य के कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से:
- राज्यपाल रमेन डेका
- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
- उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा
- राज्य सरकार के मंत्रीगण
- जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक
उपस्थित रहे।
बस्तर की संस्कृति को मिलेगा राष्ट्रीय मंच
‘बस्तर पण्डुम’ का आयोजन बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इस आयोजन के माध्यम से आदिवासी कलाकारों, कारीगरों और स्व-सहायता समूहों को अपनी प्रतिभा और उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से भी लाभ होगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति से इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली है और इससे बस्तर क्षेत्र की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

