रायपुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एंटी-नक्सल ऑपरेशन को लेकर बेहद महत्वपूर्ण हाईलेवल बैठक शुरू हो गई है। इस बैठक में मार्च 2026 तक देश को सशस्त्र नक्सलवाद से मुक्त करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विस्तृत रणनीति और एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। इसे नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक चरण की अंतिम बड़ी समीक्षा बैठकों में से एक माना जा रहा है।

हाईलेवल बैठक में शामिल हुए शीर्ष नेता और अधिकारी
इस अहम बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) मौजूद हैं। इसके अलावा नक्सल प्रभावित राज्यों—छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र और तेलंगाना—के डीजीपी, गृह सचिव और अन्य वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए हैं।
इन अधिकारियों की मौजूदगी से स्पष्ट है कि केंद्र और राज्य मिलकर समन्वित तरीके से नक्सलवाद के खिलाफ अंतिम रणनीति तैयार कर रहे हैं।
मार्च 2026 डेडलाइन से पहले अंतिम बड़ी समीक्षा
यह बैठक 31 मार्च 2026 की तय समय सीमा से पहले की अंतिम महत्वपूर्ण समीक्षा मानी जा रही है। बैठक में अब तक हुए एंटी-नक्सल ऑपरेशन की प्रगति, सुरक्षा बलों की तैनाती, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति और खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट्स की विस्तृत समीक्षा की जा रही है।
साथ ही, जिन इलाकों में अभी भी नक्सलियों की मौजूदगी है, वहां ऑपरेशन को तेज करने और पूरी तरह नक्सल नेटवर्क खत्म करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जा रही है।
नक्सल नेटवर्क खत्म करने के लिए तैयार होगा एक्शन प्लान
बैठक का मुख्य उद्देश्य नक्सलियों के नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ना, उनके मूवमेंट को रोकना और बचे हुए क्षेत्रों से उनका सफाया करना है। इसके लिए सुरक्षा बलों के संयुक्त ऑपरेशन, इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करने और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर चर्चा हो रही है।
इसके अलावा नक्सलियों के आत्मसमर्पण (सरेंडर) को बढ़ावा देने और उन्हें मुख्यधारा में जोड़ने के उपायों पर भी विचार किया जा रहा है।
बस्तर के विकास पर भी विशेष फोकस
बैठक में सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि बस्तर और अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि विकास कार्यों को तेज करके नक्सलवाद की जड़ को कमजोर किया जा सकता है।
इसके तहत सड़क, बिजली, मोबाइल नेटवर्क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर चर्चा की जा रही है, ताकि स्थानीय लोगों को बेहतर जीवन स्तर मिल सके और वे नक्सलियों से दूर रहें।
दिनभर चलेगा बैठकों का दौर
इस हाईलेवल समीक्षा बैठक का पहला चरण दोपहर 12:45 बजे तक चलेगा। इसके बाद दोपहर 2 बजे तक दूसरी बैठक होगी। लंच ब्रेक के बाद दोपहर 3 बजे से 4:15 बजे तक फिर से बैठक आयोजित की जाएगी।
इसके बाद शाम 5 बजे से 6:10 बजे तक ‘छत्तीसगढ़ @ 25: शिफ्टिंग द लेंस’ थीम पर राष्ट्रीय कॉन्क्लेव आयोजित किया जाएगा, जिसमें राज्य के विकास और भविष्य की रणनीति पर चर्चा होगी।
दो मुख्य एजेंडा पर केंद्रित है बैठक
उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि इस बैठक के दो प्रमुख एजेंडा हैं—
- 31 मार्च 2026 तक देश को सशस्त्र नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करना।
- बस्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रुके हुए विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाना।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
निर्णायक चरण में पहुंचा एंटी-नक्सल अभियान
यह बैठक नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे आने वाले समय में सुरक्षा ऑपरेशन और विकास कार्यों की दिशा तय होगी। सरकार का लक्ष्य है कि मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म कर प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति, सुरक्षा और विकास सुनिश्चित किया जाए।
