राजनांदगांव जिले में जमीन की कलेक्टर गाइडलाइन दरों में भारी बढ़ोतरी के कारण जमीन खरीदने-बेचने वाले पक्षकारों और रियल एस्टेट कारोबारियों को महंगी दरों पर रजिस्ट्री कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। राज्य सरकार द्वारा नवंबर 2025 में करीब सात साल बाद जमीनों के सरकारी दाम में लगभग 150 फीसदी तक वृद्धि की गई थी, जिसका असर अब साफ दिखाई दे रहा है।

सात साल बाद कलेक्टर गाइडलाइन में भारी बढ़ोतरी
राज्य शासन ने नवंबर 2025 में कलेक्टर गाइडलाइन दरों का पुनरीक्षण करते हुए जमीन की सरकारी कीमतों में डेढ़ गुना तक वृद्धि कर दी थी। कलेक्टर गाइडलाइन वह न्यूनतम दर होती है, जिस पर जमीन की रजिस्ट्री कराना अनिवार्य होता है। इस दर में अचानक हुई भारी वृद्धि से जमीन खरीदने और बेचने वाले लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
महंगी दरों पर रजिस्ट्री कराने को मजबूर लोग
20 नवंबर 2025 से लागू नई दरों के बाद से अब तक लोगों को बढ़ी हुई कीमतों पर ही जमीन की रजिस्ट्री करानी पड़ रही है। हालांकि लोगों को उम्मीद थी कि रायपुर और कोरबा जिलों की तरह राजनांदगांव में भी दरों में कुछ कमी की जाएगी, लेकिन अभी तक ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है। इससे आम नागरिकों और जमीन कारोबारियों में नाराजगी बनी हुई है।
100 से अधिक दावा-आपत्ति, लेकिन सुनवाई लंबित
दर बढ़ने के बाद राज्य शासन ने प्रदेशभर से दावा-आपत्ति मंगाई थी। राजनांदगांव जिले में भी 100 से अधिक लोगों ने बढ़ी हुई दरों के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराई है। जिला मूल्यांकन समिति ने इन आपत्तियों और जमीनी रिपोर्ट के आधार पर प्रस्ताव तैयार कर राज्य मूल्यांकन समिति को भेज दिया है। हालांकि अब तक इन आपत्तियों पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे लोगों में असंतोष बना हुआ है।
रियल एस्टेट कारोबार पर पड़ा सीधा असर
जमीन की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर रियल एस्टेट कारोबार पर पड़ा है। पहले जहां प्रतिदिन 50 से अधिक जमीनों की रजिस्ट्री होती थी, वहीं अब यह संख्या घटकर करीब 20 रह गई है। बढ़ी हुई दरों के कारण कई लोग जमीन खरीदने से पीछे हट रहे हैं, जिससे बिल्डर और जमीन कारोबारियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
बिल्डर और जमीन कारोबारी परेशान
रियल एस्टेट से जुड़े लोगों का कहना है कि अचानक इतनी ज्यादा दर बढ़ने से बाजार में मंदी आ गई है। इससे नए प्रोजेक्ट और जमीन की खरीद-फरोख्त प्रभावित हो रही है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोगों ने दरों में कमी की मांग करते हुए आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
प्रशासन ने रिपोर्ट शासन को भेजी, फैसले का इंतजार
जिला प्रशासन ने जमीन की नई दरों और प्राप्त आपत्तियों से संबंधित रिपोर्ट राज्य की केंद्रीय मूल्यांकन समिति को भेज दी है। अब अंतिम निर्णय राज्य शासन को लेना है कि दरों में संशोधन किया जाएगा या वर्तमान दरें ही लागू रहेंगी।
लोगों को राहत मिलने की उम्मीद
जमीन खरीदारों और कारोबारियों को उम्मीद है कि राज्य सरकार उनकी आपत्तियों पर विचार कर दरों में संशोधन करेगी, जिससे रजिस्ट्री का बोझ कम होगा और रियल एस्टेट बाजार में फिर से तेजी आ सकेगी। फिलहाल, जब तक कोई नया आदेश जारी नहीं होता, तब तक लोगों को बढ़ी हुई कलेक्टर गाइडलाइन दरों पर ही रजिस्ट्री करानी पड़ेगी।
