Delhi High Court का बड़ा फैसला
Delhi High Court ने मशहूर गायक Jubin Nautiyal की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके पर्सनैलिटी राइट्स (Personality/Publicity Rights) की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने कहा कि बिना अनुमति किसी भी एआई प्लेटफॉर्म, वेबसाइट या ई-कॉमर्स साइट को उनके:
- नाम
- आवाज
- गायन शैली
- फोटो या इमेज
- डिजिटल अवतार
- सिग्नेचर या अन्य पहचान योग्य विशेषताओं
का व्यावसायिक इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
जुबिन नौटियाल ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि:
- कुछ AI प्लेटफॉर्म उनकी आवाज की क्लोनिंग कर रहे हैं।
- उनकी गायन शैली की नकल कर नकली ऑडियो कंटेंट तैयार किया जा रहा है।
- कुछ वेबसाइट और ऑनलाइन विक्रेता उनके नाम और तस्वीर का उपयोग कर पोस्टर, स्टिकर और मर्चेंडाइज बेच रहे हैं।

इन सबके जरिए कथित रूप से व्यावसायिक लाभ कमाया जा रहा था।
अदालत ने क्या कहा?
अदालत ने माना कि:
- गायक के पास अपने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा को लेकर प्रथम दृष्टया (prima facie) मजबूत मामला है।
- यदि तुरंत रोक नहीं लगाई गई तो उन्हें अपूरणीय क्षति (Irreparable Harm) हो सकती है।
- किसी कलाकार की पहचान और छवि का अनधिकृत उपयोग उसकी प्रतिष्ठा, पहचान और आय को नुकसान पहुंचा सकता है।
इसलिए अदालत ने अंतरिम आदेश जारी कर संबंधित प्लेटफॉर्मों को तुरंत:
- आपत्तिजनक कंटेंट हटाने
- उल्लंघन से जुड़े लिंक ब्लॉक करने
- कंटेंट अपलोड करने वालों की जानकारी उपलब्ध कराने
का निर्देश दिया।
AI और डीपफेक पर सख्त रुख
यह आदेश विशेष रूप से इन पर लागू होगा:
- AI से तैयार नकली आवाज
- डीपफेक वीडियो
- फेस मॉर्फिंग कंटेंट
- सिंथेटिक ऑडियो
अदालत ने माना कि इस तरह की तकनीकें कलाकार की ब्रांड वैल्यू और विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती हैं।
पर्सनैलिटी राइट्स क्या होते हैं?
पर्सनैलिटी राइट्स किसी व्यक्ति के नाम, आवाज, फोटो, सिग्नेचर, छवि और पहचान से जुड़े अधिकार होते हैं।
ये अधिकार:
- निजता (Right to Privacy)
- बौद्धिक संपदा (Intellectual Property)
- प्रचार अधिकार (Publicity Rights)
से जुड़े होते हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी कलाकार की पहचान का व्यावसायिक दोहन उसकी अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता।
इस फैसले का व्यापक असर
यह आदेश केवल जुबिन नौटियाल तक सीमित नहीं है, बल्कि:
- फिल्म सितारों
- गायक-गायिकाओं
- सार्वजनिक हस्तियों
- इन्फ्लुएंसर्स
सभी के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल बन सकता है, खासकर ऐसे समय में जब AI टूल्स के जरिए वॉइस क्लोनिंग और डीपफेक तेजी से बढ़ रहे हैं।
निष्कर्ष
Delhi High Court का यह आदेश AI युग में कलाकारों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अदालत ने साफ कर दिया है कि तकनीक की आड़ में किसी की पहचान का दुरुपयोग स्वीकार नहीं किया जाएगा।
