बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी देने के मामले में पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। यह धमकी डिजिटल माध्यम (ई-मेल/ऑनलाइन मैसेज) के जरिए भेजी गई बताई जा रही है। देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह की धमकियों के इनपुट के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां अलर्ट पर हैं।

किन धाराओं में मामला दर्ज?
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के साथ आईटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है, जिनमें प्रमुख रूप से—
- सरकारी कार्य में बाधा डालने से संबंधित प्रावधान
- देश की संप्रभुता/सुरक्षा को खतरे से जुड़े प्रावधान
- लोक सेवक को धमकी
- आपराधिक धमकी
- सार्वजनिक शांति भंग करने वाली अफवाह फैलाना
- आईटी एक्ट की धारा 66(सी) (पहचान से जुड़ी धोखाधड़ी/मिसयूज़)
(सटीक धारा संख्या केस डायरी में स्पष्ट होती है; पुलिस ने इन्हीं प्रकृति के अपराधों का उल्लेख किया है।)
जांच कैसे आगे बढ़ रही है?
- साइबर सेल ने तकनीकी जांच शुरू कर दी है।
- धमकी भेजने वाले के IP एड्रेस और डिजिटल फुटप्रिंट को ट्रैक किया जा रहा है।
- मेल/मैसेज के सर्वर लॉग, हेडर डिटेल, VPN/प्रॉक्सी उपयोग की जांच।
- आवश्यकता पड़ने पर संबंधित प्लेटफॉर्म/सेवा प्रदाताओं से डेटा मांगा जाएगा।
- खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय कर संभावित लिंक की पड़ताल।
सुरक्षा व्यवस्था
- हाईकोर्ट परिसर और आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई है।
- एंट्री-एग्जिट पॉइंट पर चेकिंग, संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी।
- बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड को अलर्ट मोड पर रखा गया है (एहतियातन)।
कानूनी पहलू और संभावित सजा
- अदालत/सरकारी संस्थान को बम से उड़ाने की धमकी गंभीर आपराधिक कृत्य है।
- दोष सिद्ध होने पर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है; आईटी माध्यम से अपराध होने पर आईटी एक्ट के तहत अतिरिक्त दंड भी संभव है।
पुलिस की अपील
- अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध सूचना/मैसेज की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।
- धमकी से जुड़ा कंटेंट शेयर न करें, इससे जांच प्रभावित हो सकती है।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, पुलिस आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी को लेकर आधिकारिक जानकारी साझा करेगी। यदि आप चाहें तो मैं BNS और IT Act की संबंधित धाराओं का संक्षिप्त कानूनी विश्लेषण भी समझा सकता/सकती हूँ।
