यह खबर छत्तीसगढ़ पुलिस के वाहनों पर हुए बड़े खर्च से जुड़ी है, जिसका खुलासा विधानसभा में हुआ। इसे आसान और विस्तार से समझिए।
1. मामला क्या है?
रायपुर में चल रहे छत्तीसगढ़ विधानसभा सत्र के दौरान पुलिस विभाग के खर्च का बड़ा आंकड़ा सामने आया।
विजय शर्मा ने भाजपा विधायक राजेश मूणत के सवाल के लिखित जवाब में बताया कि:
- पुलिस ने सिर्फ किराए के वाहनों पर ही 130 करोड़ रुपये खर्च कर दिए।
- अगर डीजल-पेट्रोल, मरम्मत और अन्य खर्च जोड़ दिए जाएं तो कुल खर्च करीब 350 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

2. कुल खर्च का पूरा हिसाब
पुलिस विभाग का साल भर का खर्च लगभग इस तरह है:
- किराए के वाहन – ₹130 करोड़
- डीजल-पेट्रोल – ₹148 करोड़
- वाहनों की मरम्मत – ₹41 करोड़
- अन्य खर्च – ₹30 करोड़
👉 कुल खर्च – लगभग ₹350 करोड़
3. पुलिस के पास कितने वाहन हैं?
सरकार ने विधानसभा में बताया कि पुलिस के पास पहले से भी बड़ी संख्या में वाहन मौजूद हैं:
- हल्के वाहन – 2618
- मध्यम वाहन – 720
- भारी वाहन – 364
- मोटरसाइकिल – 6279
लेकिन इनमें से कई वाहन पुराने और कंडम (बेकार) हो चुके हैं। इसलिए जरूरत पड़ने पर जिलों में निजी वाहन किराए पर लेने पड़ते हैं।
4. किन जिलों में सबसे ज्यादा किराए के वाहन
जिला-वार आंकड़ों में कई जगह बहुत ज्यादा वाहन किराए पर लिए गए हैं।
सबसे ज्यादा:
- बीजापुर – 6997 वाहन, लगभग ₹26.30 करोड़ खर्च
- नारायणपुर – 6809 वाहन, ₹8.50 करोड़
- रायपुर – 6600 वाहन, ₹15.51 करोड़
- बस्तर – 3881 वाहन, ₹7.46 करोड़
- कांकेर – 3659 वाहन, ₹7.58 करोड़
ये सभी जिले नक्सल प्रभावित क्षेत्र माने जाते हैं, इसलिए यहां पुलिस की आवाजाही ज्यादा रहती है।
5. डीजल-पेट्रोल खर्च कहां सबसे ज्यादा
कुछ जिलों में डीजल-पेट्रोल का खर्च भी बहुत अधिक है।
उदाहरण:
- बीजापुर – निजी वाहनों पर ही ₹11.52 करोड़
- नारायणपुर – निजी वाहनों पर ₹7.93 करोड़
- कांकेर – ₹4.77 करोड़
- दुर्ग – ₹3.39 करोड़
- सरगुजा – ₹1.43 करोड़
इससे पता चलता है कि पुलिस के ऑपरेशन और गश्त के कारण ईंधन का खर्च बहुत ज्यादा हो रहा है।
6. नक्सल इलाकों में ज्यादा खर्च क्यों
सरकार के अनुसार बस्तर संभाग और नक्सल प्रभावित जिलों में:
- लगातार सर्च ऑपरेशन
- जंगलों में गश्त
- सुरक्षा अभियान
चलते रहते हैं।
इस कारण वाहनों की जरूरत और ईंधन खर्च ज्यादा होता है।
7. इस खुलासे के बाद क्या सवाल उठ रहे
यह आंकड़ा सामने आने के बाद कई सवाल भी उठ रहे हैं:
- जब पुलिस के पास पहले से हजारों वाहन हैं तो इतने ज्यादा किराए के वाहन क्यों लिए गए?
- क्या पुराने वाहनों की जगह नए सरकारी वाहन खरीदना ज्यादा सस्ता होता?
- क्या खर्च की सही मॉनिटरिंग हो रही है?
ये मुद्दे अब विधानसभा और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन सकते हैं।
✅ सरल शब्दों में:
छत्तीसगढ़ पुलिस ने एक साल में वाहनों पर करीब 350 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसमें 130 करोड़ सिर्फ किराए के वाहनों पर खर्च हुए। यह जानकारी विधानसभा में गृह मंत्री विजय शर्मा ने दी।




