रायपुर में तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद कई मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने चुनाव, गौ संरक्षण, गौधाम योजना और धर्मांतरण कानून को लेकर बयान दिया।

5 राज्यों के चुनाव पर क्या कहा
भारत के Election Commission of India ने हाल ही में असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि चुनाव तो समय-समय पर होते रहते हैं, लेकिन असली चिंता यह है कि कहीं “गौ-घाती” सरकार सत्ता में न आ जाए। इसके लिए समाज को जागरूक होकर आवाज उठानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में ऐसी पार्टियां हैं जो खुद को गौ-भक्त बताती हैं, जबकि कुछ जगहों पर गौ संरक्षण के मुद्दे पर राजनीति होती है। इसी वजह से वे किसी भी राजनीतिक दल का खुलकर समर्थन नहीं कर पा रहे हैं।
गौधाम योजना पर भी उठाए सवाल
शंकराचार्य ने छत्तीसगढ़ में बेसहारा गायों के लिए चलाई जा रही गौधाम योजना पर भी टिप्पणी की। उनका कहना है कि किसी भी योजना को शुरू करने से पहले गाय को केवल पशु नहीं बल्कि “मां” के रूप में सम्मान देने की भावना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पहले की सरकार ने गौशालाओं और संबंधित सुविधाओं के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया था, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में कई जगह वह ढांचा उपयोग में नहीं आ रहा है। उनका मानना है कि अगर नई योजनाएं शुरू की जा रही हैं, तो पहले पुराने संसाधनों का सही उपयोग होना चाहिए।
शंकराचार्य ने छत्तीसगढ़ी में कहा:
“जेन सरकार गौ माई ल माई कह के नई बुला सकें, ओ सरकार ल हिंदू कहे बर मुश्किल हे।”
अर्थात जो सरकार गाय को मां के रूप में स्वीकार नहीं कर सकती, उसे हिंदू सरकार कहना कठिन है।
धर्मांतरण कानून पर दिया बड़ा बयान
विधानसभा के बजट सत्र में प्रस्तावित धर्मांतरण विरोधी कानून को लेकर भी उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी।
शंकराचार्य ने कहा कि अगर सरकार ऐसा कानून लाती है तो वे उसका “बाजा बजाकर स्वागत” करेंगे, लेकिन पहले सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाना चाहिए।
कुल मिलाकर
रायपुर दौरे के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने चुनावी राजनीति, गौ संरक्षण और धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर स्पष्ट राय रखी। उनके बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
