रायपुर/बस्तर। बस्तर से सामने आ रही यह खबर नक्सल मोर्चे पर बेहद बड़ी मानी जा रही है। मोस्ट वॉन्टेड सीनियर नक्सली कमांडर पापा राव के आज सरेंडर करने की संभावना जताई जा रही है। अगर यह आत्मसमर्पण होता है, तो इसे बस्तर में सक्रिय माओवादी नेतृत्व पर निर्णायक चोट माना जाएगा। वजह साफ है — पापा राव को उन आखिरी बड़े सक्रिय कमांडरों में गिना जाता रहा है, जो अब तक सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बाहर थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पापा राव अगले कुछ घंटों में बीजापुर पहुंच सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा है कि वह अपने साथियों और आधुनिक हथियारों के साथ आत्मसमर्पण करेगा, जिसके बाद उसे जगदलपुर ले जाकर बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी के सामने औपचारिक सरेंडर कराया जा सकता है। हालांकि इस पूरे मूवमेंट, लोकेशन और साथियों की सटीक संख्या को लेकर अभी आधिकारिक बयान का इंतजार है।
पापा राव इतना बड़ा नाम क्यों है?
पापा राव को सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से बस्तर के सबसे प्रभावशाली माओवादी चेहरों में गिनती रही हैं। इंडियन एक्सप्रेस की पहले की रिपोर्ट के अनुसार, वह दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) का सदस्य है, साउथ बस्तर जोनल ब्यूरो कमेटी का सचिव रहा है और वेस्ट बस्तर डिवीजन की कमान भी उसके पास मानी जाती रही है। यानी वह सिर्फ जमीनी कमांडर नहीं, बल्कि संगठन के रणनीतिक ढांचे का भी अहम हिस्सा रहा है।
उसका नाम कई बड़े हमलों और एंबुश की रणनीति से जोड़ा जाता रहा है। इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी जनवरी 2026 की रिपोर्ट में उसे बस्तर में बचे आखिरी बड़े नेताओं में से एक बताया था। वहीं NDTV और दूसरी रिपोर्ट्स में उसकी पत्नी उर्मिला के नवंबर 2025 में मुठभेड़ में मारे जाने का जिक्र है, जो खुद भी संगठन में सक्रिय थी। इससे यह भी साफ होता है कि पापा राव का पूरा नेटवर्क लंबे समय से माओवादी ढांचे का हिस्सा रहा है।
सरेंडर की खबर इतनी बड़ी क्यों मानी जा रही है?
क्योंकि पिछले दो साल में बस्तर में नक्सल ढांचे पर लगातार दबाव बढ़ा है। इंडियन एक्सप्रेस की मार्च 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, बस्तर रेंज में जनवरी 2024 से मार्च 2026 के बीच हजारों माओवादी कैडर संगठन छोड़ चुके हैं। 9 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, केवल बस्तर डिवीजन में ही 2,625 कैडर मुख्यधारा में लौटे बताए गए। इससे साफ है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई, सरेंडर नीति और पुनर्वास मॉडल का असर जमीन पर दिख रहा है।
यही वजह है कि अगर पापा राव जैसा वरिष्ठ कमांडर सचमुच हथियार डालता है, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति का आत्मसमर्पण नहीं होगा, बल्कि माओवादी नेतृत्व की कमान, मनोबल और नेटवर्क—तीनों पर बड़ा असर माना जाएगा। टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी आज की रिपोर्ट में इसे बस्तर में माओवादी दौर के “अंतिम अध्याय” जैसा संकेत देने वाली घटना बताया है।
31 मार्च 2026 की डेडलाइन से भी जुड़ी है अहमियत
यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आ रहा है, जब केंद्र सरकार की ओर से 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के समापन का लक्ष्य लगातार दोहराया गया है। इसी संदर्भ में राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियां हर बड़े सरेंडर या ऑपरेशन को निर्णायक मोड़ के रूप में देख रही हैं। हाल की कई रिपोर्ट्स में बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने कहा है कि नक्सलवाद का प्रभाव तेजी से सिमट रहा है।
फिलहाल तस्वीर क्या कहती है?
अभी सबसे अहम बात यह है कि पापा राव के सरेंडर को लेकर माहौल बहुत गर्म है, लेकिन अंतिम तस्वीर आधिकारिक पुष्टि के बाद ही साफ होगी। अभी जो बातें सामने हैं, उनमें यह लगभग तय माना जा रहा है कि सुरक्षा एजेंसियां इस घटनाक्रम को बेहद गंभीर और महत्वपूर्ण मान रही हैं। अगर सरेंडर औपचारिक रूप से हो जाता है, तो इसे बस्तर में नक्सल नेतृत्व के खिलाफ हाल के वर्षों की सबसे बड़ी सफलता कहा जाएगा।
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मोस्ट वॉन्टेड नक्सली कमांडर पापा राव के संभावित सरेंडर की खबर ने बस्तर में हलचल बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक, वह साथियों और हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह बस्तर में कमजोर पड़ते माओवादी नेतृत्व पर अब तक की सबसे बड़ी चोट मानी जाएगी।
