बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक बड़ा धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जहां सोलर लाइट पोल लगाने के नाम पर एक वकील से 1 करोड़ 33 लाख 64 हजार रुपये की ठगी किए जाने का आरोप लगा है। शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह पूरा मामला सिरगिट्टी थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है।
रायपुर के चौबे कॉलोनी निवासी अधिवक्ता विनीत तिवारी ने इस संबंध में पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनके कनिष्ठ अधिवक्ता ने उन्हें अपने पहचान के कुछ लोगों से मिलवाया। इनमें भावेश जैन, उसका साथी ऋतुप्रण वैष्णव और कर्ण नामक व्यक्ति शामिल थे। पीड़ित के मुताबिक, इन लोगों ने खुद को लायजनिंग और प्रोजेक्ट से जुड़े काम करने वाला बताया और सोलर लाइट पोल लगाने से जुड़ा काम दिलाने या उसमें निवेश/व्यवसाय का भरोसा दिलाया।

शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने अधिवक्ता को यह विश्वास दिलाया कि सोलर लाइट पोल लगाने का काम लाभदायक है और इसमें रकम लगाने पर अच्छा रिटर्न या काम का फायदा मिलेगा। इसी भरोसे में आकर अधिवक्ता विनीत तिवारी ने उन्हें कुल 1 करोड़ 33 लाख 64 हजार रुपये दे दिए। बाद में जब तय काम नहीं हुआ और पीड़ित को शक हुआ, तब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी।
पीड़ित का आरोप है कि पैसा लौटाने के नाम पर आरोपियों ने उन्हें 1 करोड़ 33 लाख 64 हजार रुपये का चेक दिया। लेकिन जब वह चेक बैंक में लगाया गया, तो वह बाउंस हो गया। चेक बाउंस होने के बाद पीड़ित को साफ हो गया कि उनके साथ बड़ी ठगी हुई है। इसके बाद उन्होंने पुलिस का दरवाजा खटखटाया और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।
रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने संतोष कर्ण, गोपाल वैष्णव और अन्य आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज कर लिया है। शुरुआती जानकारी में जिन नामों का जिक्र सामने आया, उनमें भावेश जैन, ऋतुप्रण वैष्णव, संतोष कर्ण और अन्य लोग शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपियों ने किस तरह भरोसा जीतकर इतनी बड़ी रकम हासिल की, पैसों का इस्तेमाल कहां किया गया और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।
इस मामले का एक अहम पहलू यह भी है कि इसमें सोलर लाइट पोल जैसे विकास कार्य का नाम इस्तेमाल किया गया। आमतौर पर ऐसे मामलों में आरोपी सरकारी, अर्ध-सरकारी या निजी प्रोजेक्ट का हवाला देकर भरोसा पैदा करते हैं और फिर निवेश या एडवांस रकम के नाम पर बड़ी राशि ले लेते हैं। यहां भी आरोप है कि इसी तरीके से अधिवक्ता को भरोसे में लेकर रकम ऐंठी गई।
चेक बाउंस होना इस केस को और गंभीर बनाता है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि रकम लौटाने का जो आश्वासन दिया गया था, वह भी भरोसेमंद नहीं था। अब पुलिस के लिए यह जांच का अहम बिंदु होगा कि चेक जारी करते समय खाते में पर्याप्त रकम थी या नहीं, और क्या यह पहले से सोची-समझी साजिश का हिस्सा था।
कुल मिलाकर, बिलासपुर का यह मामला बताता है कि बड़े निवेश, प्रोजेक्ट या ठेके के नाम पर किस तरह लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। फिलहाल पुलिस केस दर्ज कर आरोपियों की भूमिका, लेन-देन के दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और आपसी बातचीत के आधार पर पूरे मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है।

