रायपुर। छत्तीसगढ़ और देश में नक्सलवाद के कमजोर पड़ते प्रभाव के बीच सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने इसे ऐतिहासिक मोड़ करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का जो संकल्प लिया गया था, वह अब साकार होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद विकास की कई योजनाएं बनीं, लेकिन नक्सलवाद लंबे समय तक सबसे बड़ा अवरोध बना रहा। अब जब नक्सली प्रभाव कम हो रहा है और सुरक्षा बलों की पकड़ मजबूत हुई है, तो प्रदेश के सुदूर वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों तक विकास की असली रोशनी पहुंच सकेगी।

“नक्सलवाद खत्म होगा तो विकास की रफ्तार बढ़ेगी”
सांसद बृजमोहन अग्रवाल का मानना है कि नक्सलवाद केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं था, बल्कि यह विकास, निवेश, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और शासन की पहुंच के रास्ते में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक रहा है।
उनके अनुसार, वर्षों तक ऐसे कई इलाके रहे जहां:
- सड़कें नहीं बन पाईं
- स्कूल और अस्पताल पूरी क्षमता से नहीं चल सके
- प्रशासनिक पहुंच सीमित रही
- निवेश और रोजगार के अवसर नहीं बन पाए
अब यदि नक्सलवाद की पकड़ कमजोर होती है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा उन इलाकों को मिलेगा, जो दशकों से मुख्यधारा के विकास से कटे हुए रहे हैं।
आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचेगी मूलभूत सुविधाएं
बृजमोहन अग्रवाल ने खासतौर पर यह कहा कि नक्सलवाद खत्म होने के बाद आदिवासी और सुदूर क्षेत्रों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने का काम तेज होगा।
किन सुविधाओं की बात हो रही है?
- सड़क और पुल
- बिजली और पेयजल
- स्कूल और कॉलेज
- अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाएं
- राशन, आंगनबाड़ी और जनकल्याण योजनाएं
- मोबाइल नेटवर्क और डिजिटल सेवाएं
उन्होंने संकेत दिया कि अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि स्थायी विकास और सामाजिक बदलाव को जमीन पर उतारना है।
“नक्सलमुक्त भारत” के संकल्प पर मोदी-शाह को बधाई
बृजमोहन अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की भूमिका को भी अहम बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में देश ने नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी है।
उनके मुताबिक:
- केंद्र की स्पष्ट नीति
- सुरक्षा बलों की आक्रामक रणनीति
- राज्यों के साथ बेहतर समन्वय
- और पुनर्वास व विकास आधारित दृष्टिकोण
इन सबने मिलकर नक्सलवाद के खिलाफ माहौल बदला है।
राजनीतिक रूप से भी यह बयान भाजपा की उस लाइन को मजबूत करता है, जिसमें पार्टी केंद्र की सुरक्षा नीति को बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है।
मिडिल ईस्ट संकट पर भी बोले बृजमोहन
सिर्फ नक्सलवाद ही नहीं, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मिडिल ईस्ट युद्ध और उसके असर को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संकटों का असर भारत जैसे बड़े देश पर भी पड़ सकता है, इसलिए हर परिस्थिति का सामना करने के लिए देश को तैयार रहना होगा।
उन्होंने लोगों से घबराने के बजाय एकजुट रहने की अपील की और कहा कि जैसे देश ने कोरोना महामारी के दौरान एकजुट होकर कठिन परिस्थितियों का मुकाबला किया था, वैसे ही आगे भी किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है।
“आपदा में अवसर तलाशने वालों पर सख्त कार्रवाई हो”
मिडिल ईस्ट संकट के संदर्भ में बृजमोहन अग्रवाल ने खासतौर पर उन तत्वों पर निशाना साधा, जो संकट की घड़ी में मुनाफाखोरी, जमाखोरी या ब्लैक मार्केटिंग जैसी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि:
- संकट के समय आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी
- कृत्रिम कमी पैदा करना
- जनता में डर फैलाकर फायदा उठाना
जैसे कृत्यों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
यह बयान मौजूदा हालात में खास महत्व रखता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर ईंधन, गैस, आपूर्ति और कीमतों पर पड़ने की आशंका बनी रहती है।
विपक्ष को राजनीति छोड़ जनता का मनोबल बढ़ाने की नसीहत
बृजमोहन अग्रवाल ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रीय और आपात स्थितियों में राजनीति करने के बजाय जनता का हौसला बढ़ाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश एकजुटता से संकटों का सामना करता है, और ऐसे समय में राजनीतिक बयानबाजी से बचना चाहिए। उनका इशारा इस ओर था कि मिडिल ईस्ट जैसे संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर घरेलू राजनीति नहीं होनी चाहिए।
बस्तर में फोर्स तैनाती और फंडिंग पर कांग्रेस को जवाब
बस्तर और नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती और इस पर केंद्र से राशि मांगे जाने के मुद्दे पर कांग्रेस द्वारा सवाल उठाए जाने पर भी सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि:
“कांग्रेस के समय तो स्थिति ठनठन गोपाल थी”
इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि कांग्रेस शासन में न तो संसाधनों की उपलब्धता थी और न ही समन्वित ढंग से विकास और सुरक्षा का काम हो पा रहा था।
“अब डबल नहीं, ट्रिपल इंजन सरकार”
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि अब केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर भाजपा की सरकारें होने से समन्वय ज्यादा मजबूत हुआ है। उन्होंने इसे “ट्रिपल इंजन सरकार” बताया।
इसका राजनीतिक संदेश क्या है?
इस बयान का मतलब यह है कि:
- केंद्र सरकार सहयोग दे रही है
- राज्य सरकार सक्रिय है
- स्थानीय निकाय/संगठन भी तालमेल में हैं
और यदि कहीं फंडिंग या संसाधनों की कमी होगी, तो सरकारें मिलकर उसे दूर करेंगी।
“कांग्रेस को चिंता करने की जरूरत नहीं, पैसा देश का है”
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस को यह चिंता करने की जरूरत नहीं है कि बस्तर में फोर्स की तैनाती या नक्सल विरोधी अभियान के लिए पैसा कहां से आएगा।
उन्होंने कहा:
- “पैसा देश का है”
- जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार कम्पनसेट करेगी
- और राज्य के विकास या सुरक्षा कार्यों में संसाधनों की कमी नहीं आने दी जाएगी
यह बयान राजनीतिक तौर पर यह बताने की कोशिश है कि वर्तमान सरकार फंडिंग और सपोर्ट के मामले में पहले से ज्यादा सक्षम है।
“पहले कुछ नहीं मिलता था, अब 50 हजार करोड़ तक की राशि”
बृजमोहन अग्रवाल ने यह भी दावा किया कि पहले छत्तीसगढ़ को उतनी आर्थिक मदद नहीं मिलती थी, लेकिन अब केंद्र से बड़ी राशि राज्य को उपलब्ध हो रही है।
उन्होंने कहा कि अब प्रदेश को 50 हजार करोड़ रुपये तक की राशि मिल रही है, जिससे विकास कार्यों को गति मिली है। हालांकि इस तरह के दावों पर आमतौर पर राजनीतिक बहस भी होती है, लेकिन उनके बयान का उद्देश्य यह बताना था कि केंद्र-राज्य समन्वय से छत्तीसगढ़ को वित्तीय लाभ मिल रहा है।
विधानसभा में गलत जानकारी देने वाले अधिकारियों पर भी सख्त रुख
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने विधानसभा और प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यदि कोई अधिकारी विधानसभा में गलत जानकारी देता है या जनप्रतिनिधियों को गुमराह करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
“अधिकारियों को ठिकाने लगाया जा सकता है”
उनका यह बयान प्रशासनिक जवाबदेही के संदर्भ में काफी सख्त माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई इस बात पर भी निर्भर करती है कि:
- विधायक कितने सजग हैं
- मंत्री कितने सक्रिय हैं
- और वे मामलों को कितनी गंभीरता से उठाते हैं
यानी उन्होंने यह संकेत दिया कि यदि जनप्रतिनिधि सतर्क रहें, तो गलत जानकारी देने वाले अधिकारियों पर प्रभावी कार्रवाई संभव है।
“मंत्री-विधायक जागरूक रहें, तभी जवाबदेही तय होगी”
बृजमोहन अग्रवाल ने यह भी कहा कि मंत्री और विधायक अगर जागरूक और सतर्क रहेंगे, तो प्रशासनिक मशीनरी को भी जवाबदेह बनाया जा सकेगा।
उनका कहना था कि:
- गुमराह करने वाले अधिकारी
- अधूरी या गलत जानकारी देने वाले अधिकारी
- और काम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारी
इन सबके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, बशर्ते राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो।
उन्होंने यह भी कहा कि अन्य राज्यों में भी ऐसे उदाहरण रहे हैं, जहां अधिकारियों को कठघरे में खड़ा किया गया है।
राजनीतिक संदेश क्या है?
बृजमोहन अग्रवाल के पूरे बयान को देखें तो इसमें तीन बड़े राजनीतिक संदेश साफ दिखाई देते हैं:
1) भाजपा सरकार खुद को “नक्सलमुक्त विकास मॉडल” के रूप में पेश कर रही है
यानी सुरक्षा और विकास को साथ लेकर चलने की कोशिश।
2) कांग्रेस को “कमजोर शासन और संसाधनहीनता” से जोड़ने की कोशिश
यानी पिछली सरकार की तुलना में वर्तमान सरकार को अधिक सक्षम बताना।
3) केंद्र-राज्य तालमेल को उपलब्धि के रूप में पेश करना
ताकि यह संदेश जाए कि छत्तीसगढ़ को अब अधिक सुरक्षा, अधिक फंडिंग और अधिक विकास मिल रहा है।
निष्कर्ष
नक्सलवाद की समाप्ति को लेकर सांसद बृजमोहन अग्रवाल का बयान सिर्फ बधाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विकास, सुरक्षा, केंद्र-राज्य समन्वय और विपक्ष की राजनीति—इन सभी मुद्दों को एक साथ छूता है।
उनका दावा है कि अगर नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त होता है, तो छत्तीसगढ़ खासकर बस्तर और आदिवासी अंचल विकास की नई राह पर तेजी से आगे बढ़ेंगे।
अब देखना यह होगा कि यह राजनीतिक दावा जमीन पर सड़क, स्कूल, अस्पताल, रोजगार और प्रशासनिक पहुंच के रूप में कितनी तेजी से नजर आता है।
