धरसीवां। छत्तीसगढ़ की शिक्षिका और साहित्यकार हर्षलता मिश्रा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराते हुए प्रदेश का नाम रोशन किया है। रायपुर जिले के विकासखंड धरसीवां अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला कन्हेरा में पदस्थ शिक्षिका हर्षलता मिश्रा को दुबई (यूएई) स्थित अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मंच साहित्य अर्पण द्वारा ‘हिंदी गौरव सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें हिंदी भाषा, साहित्य और सृजन के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किया गया।

यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत साहित्यिक सफर की बड़ी पहचान है, बल्कि छत्तीसगढ़, धरसीवां क्षेत्र और पूरे हिंदी साहित्य जगत के लिए भी गर्व का विषय मानी जा रही है। उनकी इस उपलब्धि से शिक्षा और साहित्य से जुड़े लोगों में हर्ष का माहौल है।
हिंदी के वैश्विक प्रचार-प्रसार के लिए दिया जाता है सम्मान
जानकारी के अनुसार, दुबई (यूएई) में संचालित अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मंच साहित्य अर्पण द्वारा प्रतिवर्ष ऐसे साहित्यकारों, शिक्षकों और रचनाकारों को सम्मानित किया जाता है, जो हिंदी भाषा के वैश्विक प्रचार-प्रसार, संवर्धन और साहित्यिक सृजन में उल्लेखनीय भूमिका निभा रहे हों। वर्ष 2026 के लिए भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न देशों और राज्यों से साहित्य सेवियों के आवेदन आमंत्रित किए गए थे।
इसी चयन प्रक्रिया के अंतर्गत हर्षलता मिश्रा को उनके साहित्यिक योगदान, रचनात्मक लेखन और हिंदी सेवा के लिए चुना गया। उन्हें यह सम्मान साहित्य अर्पण मंच, दुबई की मुख्य कार्यक्रम अधिकारी (CEO) नेहा शर्मा द्वारा प्रदान किया गया।
शिक्षण और साहित्य—दोनों क्षेत्र में सक्रिय
हर्षलता मिश्रा केवल एक शिक्षिका ही नहीं, बल्कि संवेदनशील साहित्यकार और नवाचारी शिक्षण पद्धति अपनाने वाली शिक्षाविद् के रूप में भी पहचानी जाती हैं। वे विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने के लिए पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ रचनात्मक और रोचक शिक्षण विधियों का उपयोग करती हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई में रुचि बढ़ती है।
विशेष रूप से वे कठपुतली (पपेट) के माध्यम से अध्ययन-अध्यापन कराकर बच्चों को सरल, मनोरंजक और प्रभावी तरीके से शिक्षा प्रदान करती हैं। उनकी यह अनूठी शिक्षण शैली न केवल बच्चों को आकर्षित करती है, बल्कि उन्हें सीखने के लिए प्रेरित भी करती है। यही कारण है कि वे शिक्षा और साहित्य—दोनों क्षेत्रों में अलग पहचान बना चुकी हैं।
सम्मान से बढ़ा छत्तीसगढ़ का गौरव
हर्षलता मिश्रा को मिला यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान छत्तीसगढ़ के लिए भी विशेष गौरव का विषय बन गया है। ग्रामीण और शासकीय स्कूल से जुड़ी एक शिक्षिका का अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मानित होना यह साबित करता है कि प्रतिभा किसी सीमित दायरे की मोहताज नहीं होती। समर्पण, मेहनत और सृजनशीलता के बल पर कोई भी व्यक्ति वैश्विक पहचान बना सकता है।
उनकी यह उपलब्धि प्रदेश की अन्य शिक्षिकाओं, साहित्यकारों और युवा रचनाकारों के लिए भी प्रेरणा बनकर उभरी है। यह सम्मान इस बात का भी प्रमाण है कि छोटे कस्बों और गांवों से भी बड़ी प्रतिभाएं निकलकर दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रही हैं।
क्षेत्र में खुशी की लहर, लोगों ने दी बधाई
हर्षलता मिश्रा को ‘हिंदी गौरव सम्मान 2026’ मिलने की खबर के बाद क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। शिक्षा, साहित्य और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने उन्हें बधाई देते हुए इस उपलब्धि को पूरे क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण बताया।
उनके सम्मान पर अभिमन्यु मिश्रा, लोकेश कुमार वर्मा, भारती वर्मा, अचला मिश्रा, अर्चना साहू, अमी विश्वकर्मा, खोमन सिन्हा और मीनाक्षी राव सहित अनेक लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं।
प्रेरणा बनीं हर्षलता मिश्रा
हर्षलता मिश्रा की यह सफलता यह संदेश देती है कि यदि किसी व्यक्ति में साहित्य के प्रति समर्पण, शिक्षा के प्रति संवेदनशीलता और समाज के लिए कुछ बेहतर करने की सोच हो, तो वह निश्चित रूप से अपनी अलग पहचान बना सकता है। उन्होंने एक शिक्षिका, साहित्यकार और समाज में सकारात्मक परिवर्तन की वाहक के रूप में जो भूमिका निभाई है, वह निश्चय ही प्रेरणादायक है।
