रायपुर। पेट्रोल-डीजल पर केंद्र सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में कटौती किए जाने के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस फैसले को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि एक्साइज ड्यूटी कम होने के बावजूद पेट्रोल और डीजल के दाम ज्यों के त्यों बने हुए हैं, ऐसे में सरकार और उसके मंत्री जनता को भ्रमित कर रहे हैं।
दीपक बैज ने तंज कसते हुए कहा कि “सभी मंत्री बरसाती मेंढक की तरह बाहर निकलकर एक्साइज ड्यूटी कम करने की बधाई दे रहे हैं”, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या पेट्रोल और डीजल की कीमतें वास्तव में कम हुई हैं?
उनका कहना है कि इस कटौती का फायदा आम जनता को नहीं, बल्कि तेल कंपनियों को मिल रहा है।

‘दाम नहीं घटे, तो राहत कैसी?’
बैज ने कहा कि आज भी आम उपभोक्ता को पेट्रोल और डीजल पुराने रेट पर ही मिल रहा है, इसलिए सरकार का यह दावा कि जनता को राहत दी गई है, जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाता।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार इस फैसले को जनहित का कदम बताकर राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश कर रही है, जबकि लोगों की जेब पर अभी भी उतना ही बोझ है।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब केंद्र सरकार ने वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया संकट के बीच पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती की है। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर आई रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि इसका सीधा फायदा तुरंत पंप पर उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा, क्योंकि सरकार इस राहत का एक हिस्सा तेल कंपनियों पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए इस्तेमाल कर रही है।
‘तेल कंपनियों को फायदा, जनता को नहीं’
दीपक बैज का कहना है कि सरकार ने जो फैसला लिया है, उसका प्रचार जनता को राहत के रूप में किया जा रहा है, लेकिन व्यवहार में कीमतें स्थिर हैं।
उन्होंने कहा कि जब तक पेट्रोल पंप पर रेट कम नहीं होता, तब तक इसे आम आदमी के लिए राहत कहना भ्रामक है।
दरअसल, केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर विशेष एक्साइज ड्यूटी को ₹13 से घटाकर ₹3 प्रति लीटर और डीजल पर पूरी तरह खत्म किया है, लेकिन साथ ही सरकार और तेल मंत्रालय का तर्क है कि इस कदम का मकसद खुदरा कीमतों को बढ़ने से रोकना और सरकारी तेल कंपनियों के घाटे को कम करना है।
आबकारी विभाग में ‘मैन पावर सप्लाई’ को लेकर भी लगाए गंभीर आरोप
पेट्रोल-डीजल के मुद्दे के साथ-साथ दीपक बैज ने राज्य सरकार पर आबकारी विभाग में मैन पावर सप्लाई को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि सरकार अपने नेताओं और उनसे जुड़े लोगों को फायदा पहुंचाने का काम कर रही है।
बैज का आरोप है कि आबकारी विभाग में राष्ट्रीय सचिव से जुड़े एक व्यक्ति की दो कंपनियों को काम दिया गया है, जो हितों के टकराव और पक्षपात की ओर इशारा करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी?
उन्होंने यह भी कहा कि अगर सत्ता से जुड़े लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया जा रहा है, तो आबकारी मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
‘छत्तीसगढ़ को नशे का गढ़ बनाया जा रहा’
दीपक बैज ने प्रदेश में अफीम, गांजा और शराब के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के संरक्षण में छत्तीसगढ़ में नशे का नेटवर्क बढ़ रहा है।
उन्होंने दावा किया कि कोंडागांव के केशकाल क्षेत्र में मक्के के खेत में गांजे की खेती सामने आई है, जो यह दिखाती है कि नशीले पदार्थों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई कमजोर है।
बैज ने कहा कि अफीम और गांजे की खेती के साथ-साथ शराब की उपलब्धता बढ़ाकर प्रदेश को “नशे का गढ़” बनाया जा रहा है।
यह आरोप राजनीतिक रूप से गंभीर माने जा रहे हैं, क्योंकि प्रदेश में पहले भी नशे, अवैध खेती और आबकारी नेटवर्क को लेकर कई बार बहस हो चुकी है।
पेट्रोल और गैस सप्लाई पर भी सरकार को घेरा
बैज ने पेट्रोल और गैस की उपलब्धता को लेकर भी सरकार की मंशा और दावों पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार कहती है कि गैस की कोई दिक्कत नहीं है, वहीं दूसरी तरफ गैस सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई पेट्रोल पंपों पर लोग लाइन लगाकर पेट्रोल भरवा रहे हैं, जिससे जनता के बीच अनिश्चितता और डर का माहौल बन रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार को स्थिति की सच्चाई जनता के सामने रखनी चाहिए और यदि कहीं सप्लाई को लेकर दिक्कत है, तो उसे स्वीकार करना चाहिए।
बैज ने मांग की कि सरकार आम जनता से माफी मांगे और साफ-साफ बताए कि प्रदेश में पेट्रोल और गैस की उपलब्धता की वास्तविक स्थिति क्या है।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पश्चिम एशिया संकट के बीच राज्य में पेट्रोलियम पदार्थों और गैस सिलेंडरों की उपलब्धता को लेकर अधिकारियों की बैठक ली है और कालाबाजारी व जमाखोरी पर सख्ती के निर्देश दिए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी केंद्र सरकार ने कहा है कि रिटेल ईंधन सप्लाई और कीमतें फिलहाल स्थिर रखी जाएंगी।
नक्सलवाद पर भी बोले बैज
दीपक बैज ने नक्सलवाद के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार ने 31 मार्च तक नक्सलवाद पर कार्रवाई और नियंत्रण को लेकर जो समयसीमा तय की है, उसके बाद सरकार कोई नया बहाना न बनाए।
उन्होंने कहा कि इस नाम पर निर्दोष आदिवासियों को जेल न भेजा जाए और जल, जंगल, जमीन को उद्योगपतियों के हवाले न किया जाए।
बैज का यह बयान संकेत देता है कि कांग्रेस अब ईंधन, आबकारी, नशे और नक्सलवाद जैसे कई मुद्दों को एक साथ उठाकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है।
राजनीतिक तौर पर क्यों अहम है यह बयान?
दीपक बैज का यह हमला सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं है। इसमें उन्होंने:
- केंद्र की ईंधन नीति
- राज्य सरकार की प्रशासनिक पारदर्शिता
- आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली
- नशे के नेटवर्क
- और नक्सल नीति
जैसे कई संवेदनशील मुद्दों को एक साथ जोड़ दिया है।
यानी यह बयान सिर्फ एक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि भाजपा सरकार के खिलाफ बहुस्तरीय राजनीतिक हमला है।
कुल मिलाकर…
पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कटौती को लेकर छिड़ी यह सियासत अब सिर्फ ईंधन की कीमतों तक सीमित नहीं रही। कांग्रेस इसे जनता को राहत न मिलने, सरकारी पक्षपात, नशे के बढ़ते प्रभाव और प्रशासनिक विफलता से जोड़कर बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार इन आरोपों पर कितनी मजबूती से जवाब देती है और क्या वाकई आम जनता को आने वाले दिनों में ईंधन कीमतों में राहत दिखाई देती है या नहीं।
