मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में मार्च महीने के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की जबरदस्त बिकवाली ने बाजार की धड़कनें तेज कर दी हैं।
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्च 2026 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से करीब 1 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा की निकासी कर दी है। Reuters के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी से रिकॉर्ड 12.14 अरब डॉलर निकाले हैं, जो हाल के वर्षों की सबसे बड़ी बिकवाली में गिना जा रहा है।
यह बिकवाली ऐसे समय आई है, जब बहुत से निवेशक उम्मीद कर रहे थे कि भारतीय बाजार का वैल्यूएशन अब आकर्षक होता जा रहा है और FPI फिर लौट सकते हैं। लेकिन हुआ इसका उल्टा—विदेशी निवेशकों ने पैसा डालने के बजाय और तेजी से निकालना शुरू कर दिया।

आखिर FPI बेच क्यों रहे हैं?
विदेशी निवेशकों की इस भारी बिकवाली के पीछे एक नहीं, बल्कि कई बड़े वैश्विक और घरेलू कारण हैं।
सरल भाषा में समझें तो विदेशी निवेशक अभी “Risk Off” मोड में हैं—यानी वे जोखिम वाले बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट कर रहे हैं।
1) सबसे बड़ा कारण: पश्चिम एशिया संकट और तेल का झटका
इस समय बाजार की सबसे बड़ी चिंता है पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तनाव।
इसका सीधा असर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों पर पड़ा है। Reuters के मुताबिक, युद्ध के बाद ब्रेंट क्रूड में तेज उछाल आया और यह $100 प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है, जबकि कुछ परिदृश्यों में इससे भी ऊपर जाने की आशंका जताई गई है।
भारत जैसे देश के लिए यह बेहद गंभीर है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 85–90% कच्चा तेल आयात करता है।
तेल महंगा होने का मतलब:
- पेट्रोल-डीजल महंगा
- महंगाई बढ़ने का खतरा
- सरकार पर दबाव
- कंपनियों के मुनाफे पर असर
- और अर्थव्यवस्था पर बोझ
यही वजह है कि विदेशी निवेशकों को अब भारत का निकट भविष्य थोड़ा ज्यादा जोखिम भरा लग रहा है।
2) अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से पैसा भारत से निकलकर अमेरिका जा रहा है
दूसरा बड़ा कारण है US Treasury Yields यानी अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न।
जब अमेरिका में जोखिम-मुक्त निवेश पर ज्यादा रिटर्न मिलने लगता है, तो विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिकी बॉन्ड में पार्क करना शुरू कर देते हैं।
क्योंकि वहां उन्हें:
- ज्यादा सुरक्षा,
- डॉलर में कमाई,
- और कम जोखिम मिलता है।
यानी जब US bond yields बढ़ती हैं, तो भारत जैसे बाजारों से FPI का निकलना आम बात हो जाती है। इस बार भी यही हो रहा है।
3) रुपये की कमजोरी ने विदेशी निवेशकों को डरा दिया
विदेशी निवेशकों के लिए सिर्फ शेयर का रिटर्न ही मायने नहीं रखता, बल्कि करेंसी रिटर्न भी बहुत अहम होता है।
और इस समय भारतीय रुपया तेजी से कमजोर हुआ है।
Reuters के मुताबिक, रुपया 27 मार्च को 94.78–94.84 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर तक फिसल गया। इतना ही नहीं, पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से रुपया करीब 4% से ज्यादा कमजोर हुआ है।
रुपया कमजोर होने से FPI को नुकसान कैसे होता है?
मान लीजिए किसी विदेशी निवेशक ने भारत में 10% रिटर्न कमाया,
लेकिन उसी दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले 6–7% टूट गया,
तो उसका असली डॉलर रिटर्न काफी कम हो जाता है।
यानी विदेशी निवेशक को डबल मार पड़ती है:
- शेयर बाजार गिरा
- रुपया भी गिरा
इसीलिए वे समय रहते पैसा निकालना बेहतर समझते हैं।
4) भारतीय कंपनियों की कमाई (Earnings) पर भी दबाव
विदेशी निवेशक सिर्फ मैक्रो नहीं देखते, वे यह भी देखते हैं कि कंपनियों की कमाई आगे कैसी रहेगी।
इस समय कई ब्रोकरेज और विश्लेषकों ने संकेत दिया है कि FY26 में भारतीय कंपनियों की कमाई पर दबाव बढ़ सकता है।
कारण साफ हैं:
- कच्चा तेल महंगा
- इनपुट कॉस्ट बढ़ी
- महंगाई का दबाव
- रुपये की कमजोरी
- उपभोक्ता खर्च में नरमी की आशंका
जब कमाई की ग्रोथ धीमी दिखती है, तो विदेशी निवेशक कहते हैं —
“फिलहाल पैसा कहीं और लगाना बेहतर है।”
5) भारत अब भी सस्ता नहीं, सिर्फ पहले से थोड़ा कम महंगा हुआ है
बहुत से निवेशकों को लग रहा था कि भारतीय बाजार में गिरावट के बाद अब Valuation आकर्षक हो गया होगा।
लेकिन विदेशी निवेशकों का नजरिया थोड़ा अलग है।
उनके लिए भारत अभी भी कई दूसरे एशियाई बाजारों—जैसे चीन, ताइवान, दक्षिण कोरिया—के मुकाबले महंगा दिख सकता है।
यानी भले ही Nifty-50 का प्रीमियम कुछ कम हुआ हो, लेकिन विदेशी निवेशकों को अभी भी यहां “जोखिम के हिसाब से रिटर्न” उतना आकर्षक नहीं लग रहा।
मार्च 2026 की बिकवाली कितनी बड़ी है?
यह सामान्य बिकवाली नहीं है।
मार्च 2026 की यह बिकवाली रिकॉर्ड स्तर की मानी जा रही है।
- Reuters के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने हालिया अवधि में $12.14 billion इक्विटी निकाली है।
- Business Standard के मुताबिक, 15 मार्च तक ही FPIs ₹52,704 करोड़ निकाल चुके थे।
- इससे पहले 8 मार्च तक ही ₹21,000 करोड़ से ज्यादा की निकासी दर्ज हो चुकी थी।
यानी महीने के आगे बढ़ने के साथ बिकवाली और तेज होती चली गई।
क्या सिर्फ शेयर ही नहीं, बॉन्ड मार्केट से भी पैसा निकला?
हाँ, और यही चिंता को और बड़ा बनाता है।
Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने सिर्फ इक्विटी ही नहीं, बल्कि भारतीय बॉन्ड मार्केट से भी बड़ी निकासी की है।
यानी यह सिर्फ “शेयर बाजार में profit booking” नहीं, बल्कि India Risk Trade से बाहर निकलने जैसा संकेत है।
यह दिखाता है कि विदेशी निवेशक फिलहाल भारत को लेकर सावधानी बरत रहे हैं।
इसका शेयर बाजार पर क्या असर पड़ा?
FPI बिकवाली का असर सीधा बाजार पर दिखता है, क्योंकि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार के सबसे बड़े संस्थागत खिलाड़ियों में शामिल हैं।
असर कुछ इस तरह दिखता है:
- Sensex-Nifty पर दबाव
- बड़े लार्जकैप शेयरों में कमजोरी
- बैंकिंग, IT, FMCG जैसे सेक्टर्स में बिकवाली
- रुपये पर और दबाव
- वोलैटिलिटी बढ़ना
जब FPI बिकते हैं, तो वे आमतौर पर सबसे पहले लिक्विड और बड़े शेयर बेचते हैं।
यानी HDFC Bank, Reliance, Infosys, ICICI Bank, TCS जैसे शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है।
लेकिन क्या यह पूरी तरह बुरी खबर है?
पूरी तरह नहीं।
क्योंकि बाजार में जब विदेशी बिकते हैं, तब कई बार घरेलू निवेशक (DIIs) और म्यूचुअल फंड्स उस गिरावट को खरीदने लगते हैं।
यही वजह है कि कई बार भारी FPI बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार पूरी तरह टूटता नहीं, बल्कि संभल जाता है।
भारत की सबसे बड़ी ताकत यही है कि अब बाजार केवल विदेशी पैसे पर निर्भर नहीं है।
SIP, म्यूचुअल फंड और रिटेल निवेशकों की भागीदारी ने बाजार को पहले से कहीं ज्यादा स्थिर बनाया है।
क्या विदेशी निवेशक फिर लौट सकते हैं?
हाँ, लेकिन इसके लिए कुछ चीजों का सुधरना जरूरी है:
FPI वापसी के लिए क्या चाहिए?
- पश्चिम एशिया तनाव कम हो
- तेल की कीमतें नीचे आएं
- रुपया स्थिर हो
- US bond yields नरम पड़ें
- भारत की कमाई और ग्रोथ आउटलुक मजबूत दिखे
अगर ये संकेत सुधरते हैं, तो विदेशी निवेशक फिर से भारत की ओर लौट सकते हैं।
क्योंकि लंबी अवधि में भारत अब भी दुनिया के सबसे मजबूत Growth Markets में गिना जाता है।
आम निवेशक को क्या करना चाहिए?
यह सबसे जरूरी सवाल है।
अगर आप एक छोटे या मध्यम निवेशक हैं, तो ऐसी खबरों से घबराकर जल्दबाजी में फैसले लेना सही नहीं होता।
अभी क्या करें?
- पैनिक सेलिंग से बचें
- SIP जारी रखें
- क्वालिटी शेयरों पर नजर रखें
- कर्ज, तेल और आयात पर ज्यादा निर्भर सेक्टर्स में सावधानी रखें
- लंबी अवधि का नजरिया बनाए रखें
विदेशी बिकवाली अक्सर डर का माहौल बनाती है, लेकिन कई बार यही समय अच्छे शेयर सस्ते में मिलने का भी होता है।
कुल मिलाकर…
मार्च 2026 में FPI की 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली सिर्फ एक सामान्य बाजार घटना नहीं है।
यह संकेत है कि दुनिया भर के निवेशक इस समय:
- युद्ध और तेल संकट
- रुपये की कमजोरी
- अमेरिकी बॉन्ड यील्ड
- और भारत की कमाई पर दबाव
को लेकर चिंतित हैं।
लेकिन दूसरी तरफ यह भी सच है कि भारत की घरेलू निवेशक ताकत पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है।
यानी विदेशी पैसा निकला है, लेकिन भारतीय बाजार की कहानी खत्म नहीं हुई — बस फिलहाल वह तूफानी दौर से गुजर रहा है।
