छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी सचिन पायलट 8 जनवरी को राज्य के दौरे पर रायपुर पहुंचेंगे। उनके इस दौरे को कांग्रेस के प्रस्तावित “मनरेगा बचाओ संग्राम” आंदोलन की दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।

📌 दौरे का मुख्य उद्देश्य
- मनरेगा का नाम बदले जाने के फैसले के खिलाफ
- प्रदेशव्यापी आंदोलन की रणनीति और रूपरेखा तय करना
- कांग्रेस संगठन, फ्रंटल संगठनों और वरिष्ठ नेताओं के साथ
👉 आवश्यक बैठकें करना
सचिन पायलट एआईसीसी (AICC) के निर्देशों के अनुरूप छत्तीसगढ़ में आंदोलन की दिशा तय करेंगे।
🧱 मनरेगा बचाओ संग्राम : चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा
🔹 पहला चरण – ग्राम पंचायत स्तर
🗓️ 10 जनवरी से 29 जनवरी
- पूरे प्रदेश की ग्राम पंचायतों में
- जनसंपर्क, बैठकें, प्रदर्शन और जागरूकता अभियान
- ग्रामीण मजदूरों और हितग्राहियों को आंदोलन से जोड़ना
🔹 दूसरा चरण – जिला स्तरीय धरना
🗓️ 31 जनवरी से 6 फरवरी
- सभी जिलों में
- मनरेगा बचाओ धरना
- जिला मुख्यालयों पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन
🔹 तीसरा चरण – राज्य स्तरीय आंदोलन
🗓️ 7 फरवरी से 15 फरवरी
- विधानसभा घेराव कार्यक्रम
- राजधानी रायपुर में
- राज्य सरकार के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन
🔹 आगे की रणनीति
- आंदोलन के अगले चरण में
👉 AICC स्तर पर रैलियों और बड़े कार्यक्रमों का आयोजन - राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दे को उठाने की तैयारी
⚠️ कांग्रेस का आरोप क्या है?
कांग्रेस का कहना है कि—
- मनरेगा का नाम बदलना
👉 महात्मा गांधी की विचारधारा और ग्रामीण गरीबों का अपमान है - यह फैसला
👉 रोजगार, मजदूरी और ग्रामीण विकास से जुड़े करोड़ों लोगों के हितों के खिलाफ है
🎯 सचिन पायलट की भूमिका क्यों अहम?
- प्रदेश प्रभारी होने के नाते
👉 संगठन और आंदोलन में एकरूपता लाना - केंद्र और राज्य नेतृत्व के निर्देशों को
👉 जमीनी स्तर तक प्रभावी तरीके से लागू करना - आंदोलन को
👉 राजनीतिक और जनआंदोलन का रूप देना
👀 राजनीतिक हलचल तेज
सचिन पायलट के दौरे के साथ ही—
- छत्तीसगढ़ की राजनीति में
👉 मनरेगा मुद्दे पर टकराव और तेज होने के संकेत - आने वाले दिनों में
👉 कांग्रेस और सरकार के बीच सियासी घमासान बढ़ने की संभावना
