छत्तीसगढ़ की जनजातीय लोकसंस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने वाले बस्तर पंडुम 2026 का आगाज आज शनिवार, 10 जनवरी से होने जा रहा है। यह महोत्सव बस्तर संभाग के सभी जिलों में चरणबद्ध रूप से आयोजित किया जाएगा और इसमें लोककला, संस्कृति व परंपरागत विधाओं की समृद्ध झलक देखने को मिलेगी।

🎭 12 विधाओं में होंगी प्रतियोगिताएं
बस्तर पंडुम 2026 के अंतर्गत 12 विभिन्न जनजातीय लोक कला विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इन प्रतियोगिताओं में बस्तर संभाग के मूल निवासी और जनजातीय लोक कला से जुड़े कलाकार भाग ले सकेंगे। इसका उद्देश्य पारंपरिक कला, नृत्य, गीत और शिल्प को संरक्षित और प्रोत्साहित करना है।
📅 चरणबद्ध आयोजन का पूरा शेड्यूल
पहला चरण (जनपद स्तरीय प्रतियोगिताएं):
- 10 से 20 जनवरी
- सभी जनपदों में आयोजन
दूसरा चरण (जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं):
- 24 से 29 जनवरी
- संबंधित जिला मुख्यालयों में आयोजन
अंतिम एवं भव्य चरण (संभाग स्तरीय प्रतियोगिताएं):
- 2 से 6 फरवरी
- जगदलपुर में आयोजन
🏆 विजेताओं को मिलेगा पुरस्कार और प्रोत्साहन राशि
हर चरण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को
- पुरस्कार,
- प्रोत्साहन राशि,
- और सम्मान पत्र प्रदान किए जाएंगे,
ताकि कलाकारों का मनोबल बढ़े और वे अपनी परंपरागत कला को आगे बढ़ा सकें।
🎶 पहले ही हो चुका है थीम, लोगो और गीत का विमोचन
गौरतलब है कि 2 जनवरी को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दंतेवाड़ा में बस्तर पंडुम 2026 के लोगो, थीम और आधिकारिक गीत का विमोचन किया था। इससे पहले ही आयोजन को लेकर पूरे संभाग में उत्साह का माहौल बन गया था।
🇮🇳 राष्ट्रपति को दिया गया आमंत्रण
इसके अलावा मुख्यमंत्री साय ने अपने दिल्ली प्रवास के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी ‘बस्तर पंडुम 2026’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का आमंत्रण दिया है, जिससे इस आयोजन की गरिमा और भी बढ़ने की उम्मीद है।
👉 बस्तर पंडुम 2026 न सिर्फ एक सांस्कृतिक उत्सव है, बल्कि यह बस्तर की जनजातीय पहचान, विरासत और आत्मगौरव को मंच देने का एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
