देश के कई हिस्सों में इन दिनों राम नाम संकीर्तन और हनुमान भक्ति का विशेष माहौल देखने को मिल रहा है। गांव-गांव और शहरों की कॉलोनियों में श्रद्धालु मिलकर सुंदरकांड पाठ, हनुमान चालीसा पाठ और रामधुन का आयोजन कर रहे हैं। खास बात यह है कि ये आयोजन बिना किसी भव्यता के, पूरी श्रद्धा और सामूहिक सहभागिता के साथ हो रहे हैं।
कई जगहों पर युवाओं ने पहल करते हुए सुबह की प्रभात फेरियां शुरू की हैं, जिनमें राम नाम का जाप करते हुए लोग मोहल्लों में भ्रमण कर रहे हैं। इससे न सिर्फ आध्यात्मिक माहौल बन रहा है, बल्कि लोगों के बीच आपसी भाईचारा और सकारात्मक सोच भी मजबूत हो रही है।

आस्था के साथ-साथ गौसेवा और अन्नदान को भी बढ़ावा मिल रहा है। मंदिर परिसरों और धार्मिक स्थलों पर
- गौशालाओं में चारा वितरण
- जरूरतमंदों को भोजन
- साधु-संतों की सेवा
जैसे कार्य नियमित रूप से किए जा रहे हैं। मान्यता है कि इस प्रकार की सेवा से पुण्य की प्राप्ति होती है और समाज में करुणा का भाव बढ़ता है।
धार्मिक आयोजनों में महिलाओं और बच्चों की सक्रिय भागीदारी भी देखने को मिल रही है। महिलाएं भजन-कीर्तन की अगुवाई कर रही हैं, वहीं बच्चे श्लोक, भजन और धार्मिक कथाओं के माध्यम से संस्कार सीख रहे हैं।
👉 कुल मिलाकर, यह खबर इस बात की है कि आस्था आज भी लोगों के जीवन में शांति, संयम और सेवा की भावना को जीवित रखे हुए है, और समाज को सकारात्मक दिशा दे रही है 🙏
