1. छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का महत्व
छत्तीसगढ़ को “धान का कटोरा” कहा जाता है। यहां धान सिर्फ फसल नहीं, बल्कि लाखों किसानों की आजीविका का मुख्य स्रोत है। राज्य की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा धान उत्पादन और खरीदी पर निर्भर करता है। इसलिए सरकार की धान खरीदी नीति का सीधा असर किसानों और पूरे प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।

2. 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य – किसानों को बड़ा फायदा
साय सरकार ने किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की। साथ ही प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदने की सीमा तय की गई।
इससे किसानों को ये फायदे हुए:
- किसानों को उनकी फसल का उचित और सुरक्षित मूल्य मिला
- बिचौलियों पर निर्भरता खत्म हुई
- किसानों को औने-पौने दाम पर धान बेचने की मजबूरी खत्म हुई
- आर्थिक सुरक्षा और सम्मान बढ़ा
पहले किसानों को भुगतान में देरी होती थी, लेकिन नई व्यवस्था में यह समस्या दूर हुई।
3. डिजिटल धान खरीदी से पारदर्शिता और सुविधा
सरकार ने पूरी खरीदी प्रक्रिया को डिजिटल बना दिया। इसमें शामिल हैं:
- ऑनलाइन पंजीयन (Registration)
- “टोकन तुंहर हाथ” डिजिटल टोकन सिस्टम
- बायोमेट्रिक सत्यापन
- डिजिटल कांटे से तौल
- रियल-टाइम डेटा एंट्री
इससे फायदा हुआ:
- तौल में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार कम हुआ
- पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी
- किसानों को सही रिकॉर्ड और भुगतान मिला
4. रिकॉर्ड स्तर पर धान खरीदी
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में:
- 27 लाख से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया
- 25 लाख से ज्यादा किसानों को सीधा लाभ मिला
- 160 लाख मीट्रिक टन लक्ष्य के मुकाबले 139 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान खरीदी हुई
- राज्य में 2,739 खरीदी केंद्र बनाए गए
- 92% से अधिक खरीदी डिजिटल प्रणाली से हुई
यह छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का ऐतिहासिक रिकॉर्ड है।
5. 48 घंटे में भुगतान – किसानों के लिए सबसे बड़ी राहत
नई व्यवस्था की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि:
- किसानों को धान बेचने के बाद 2 दिनों के अंदर पैसा उनके बैंक खाते में मिल गया
- किसानों को कर्ज लेने की जरूरत कम हुई
- किसान समय पर अगली फसल की तैयारी कर सके
इससे किसानों का सरकार पर भरोसा बढ़ा।
6. उपार्जन केंद्रों पर बेहतर सुविधाएं
सरकार ने खरीदी केंद्रों पर किसानों के लिए सुविधाएं भी बढ़ाईं:
- बैठने की व्यवस्था
- पीने का पानी
- छाया और शौचालय
- सुव्यवस्थित व्यवस्था
इससे किसानों को सम्मानजनक अनुभव मिला।
7. बिचौलियों की भूमिका लगभग खत्म
डिजिटल सिस्टम और सीधे बैंक भुगतान से:
- बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई
- भ्रष्टाचार कम हुआ
- किसान को पूरा पैसा सीधे मिला
8. ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला बड़ा फायदा
किसानों की आय बढ़ने से:
- गांवों में खर्च बढ़ा
- स्थानीय व्यापार बढ़ा
- रोजगार और आर्थिक गतिविधियां तेज हुईं
इससे पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई।
9. सरकार के अनुसार यह बना सुशासन का मॉडल
सरकार का दावा है कि यह व्यवस्था:
- पारदर्शी
- किसान हितैषी
- डिजिटल
- तेज और सुरक्षित
है, और यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में 3100 रुपये समर्थन मूल्य और डिजिटल धान खरीदी व्यवस्था ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा, सम्मान और पारदर्शी व्यवस्था दी है। किसानों को समय पर भुगतान मिला, बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई और पूरी प्रक्रिया आसान बनी। इससे न केवल किसान सशक्त हुए, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था भी मजबूत हुई।
