रायपुर। आम आदमी पार्टी (आप) ने छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन करने का ऐलान किया है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो 10 फरवरी को मुख्यमंत्री निवास का घेराव किया जाएगा। इस संबंध में आप के प्रदेश महासचिव वदूद आलम और विजय झा ने संयुक्त बयान जारी कर सरकार पर किसानों के साथ वादाखिलाफी का आरोप लगाया है।

धान खरीदी को लेकर सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
आप नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार ने चुनाव के दौरान किसानों से एक-एक दाना धान खरीदने का वादा किया था, लेकिन वास्तविकता में किसानों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने किसानों से पहले रकबा समर्पण करवाया, फिर धान बेचने के लिए टोकन के लिए लंबा इंतजार कराया, और अंत में तय समय सीमा के भीतर सभी किसानों का धान नहीं खरीदा गया।
आप का कहना है कि सरकार ने धान खरीदी की तिथि बढ़ाने की मांग पर केवल दो दिन की सीमित वृद्धि की, जो पर्याप्त नहीं है। पार्टी के अनुसार, आज भी लाखों किसान अपना धान बेचने से वंचित हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
10 फरवरी को होगा मुख्यमंत्री निवास का घेराव
इन परिस्थितियों से नाराज आम आदमी पार्टी ने 10 फरवरी को मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने का निर्णय लिया है। पार्टी का कहना है कि यह आंदोलन किसानों के अधिकार और हितों की रक्षा के लिए किया जा रहा है। आप नेताओं ने सरकार से धान खरीदी की तिथि को पर्याप्त समय तक बढ़ाने और सभी किसानों का धान खरीदने की मांग की है।
फायर ब्रिगेड चौक में पहले होगा धरना-प्रदर्शन
मुख्यमंत्री निवास घेराव से पहले राजधानी रायपुर के फायर ब्रिगेड चौक में धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में आप कार्यकर्ता और किसान शामिल होंगे।
इस आंदोलन का नेतृत्व पार्टी के वरिष्ठ नेता करेंगे, जिनमें प्रमुख रूप से:
- कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उत्तम जायसवाल
- देवलाल नरेटी
- अभिषेक मिश्रा
शामिल रहेंगे।
किसानों के मुद्दे को लेकर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पार्टी का कहना है कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रहेगा।
यह आंदोलन प्रदेश में धान खरीदी को लेकर बढ़ते राजनीतिक दबाव और किसानों की नाराजगी को दर्शाता है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
