“राजा धर्म सर्वस्व करि जाना।
करइ प्रजा पर प्रेम प्रधाना।। ”
रामचरितमानस की यह चौपाई आदर्श राजधर्म का सार प्रस्तुत करती है। इसका भावार्थ है—एक आदर्श शासक वही है जो धर्म को अपना सर्वस्व माने और प्रजा के प्रति निस्वार्थ प्रेम को अपना प्रधान कर्तव्य समझे। राजधर्म का सर्वोच्च स्वरूप वही है जिसमें सत्ता नहीं, सेवा सर्वोपरि होती है; अधिकार नहीं, उत्तरदायित्व प्रमुख होता है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के व्यक्तित्व और कार्यशैली को यदि एक वाक्य में परिभाषित किया जाए तो यह चौपाई उनके जीवन-दर्शन का सजीव प्रतीक प्रतीत होती है। वे शासन को शक्ति प्रदर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि न्याय, नीति और जनकल्याण का दायित्व मानते हैं।

धरतीपुत्र से जननायक तक की यात्रा
21 फरवरी 1964 को जशपुर जिले के बगिया ग्राम में एक साधारण कृषक परिवार में जन्मे विष्णुदेव साय का जीवन संघर्ष, संकल्प और सतत परिश्रम की कहानी है। उच्चतर माध्यमिक तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने परिवार के साथ खेती-किसानी में हाथ बँटाया। मिट्टी से जुड़ाव ने उन्हें जमीन की सच्चाइयों से परिचित कराया—यही अनुभव आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी बना।

सन 1989 में ग्राम पंचायत बगिया से पंच चुने जाने के साथ उन्होंने सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया। 1990 में वे निर्विरोध सरपंच बने—यह उनकी लोकप्रियता और विश्वसनीयता का पहला सार्वजनिक प्रमाण था।
अविभाजित मध्यप्रदेश की तपकरा विधानसभा से दो बार विधायक बनने के बाद उन्होंने जनसेवा की मजबूत नींव रखी। वर्ष 1999 से रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से लगातार चार बार सांसद चुने जाना उनके प्रति जनता के अटूट विश्वास का परिचायक है। 13वीं से 16वीं लोकसभा तक उन्होंने आदिवासी हितों, क्षेत्रीय विकास और सामाजिक न्याय के मुद्दों को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावी ढंग से उठाया।

प्रशासनिक अनुभव और राष्ट्रीय नेतृत्व से मार्गदर्शन
वर्ष 2014 से 2019 तक नरेंद्र मोदी के प्रथम कार्यकाल में केंद्रीय इस्पात, खान, श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री के रूप में उन्होंने प्रशासनिक दक्षता का परिचय दिया। संगठन और सत्ता—दोनों में संतुलन साधते हुए उन्होंने विकासोन्मुख दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया।
उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का मार्गदर्शन और सान्निध्य भी मिला, जिसने उनके राजनीतिक संस्कारों को और अधिक परिपक्व बनाया।
इतिहास रचता नेतृत्व
13 दिसंबर 2023 को छत्तीसगढ़ के पहले आदिवासी मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर विष्णुदेव साय ने नया इतिहास रचा। यह केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं थी, बल्कि प्रदेश की आदिवासी अस्मिता, सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक विश्वास की विजय थी।
कुनकुरी विधानसभा सीट से विजय ने यह स्पष्ट कर दिया कि आज भी जनता जमीनी नेतृत्व पर भरोसा करती है—ऐसे नेतृत्व पर जो गांव की धड़कन को समझता हो और विकास की व्यापक दृष्टि रखता हो।
सुशासन की दिशा में प्रतिबद्धता
बतौर मुख्यमंत्री उनका ध्यान सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही पर केंद्रित है।
- किसानों के हित में निर्णायक पहल
- आदिवासी अंचलों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार
- युवाओं के लिए रोजगार सृजन
- महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु योजनाएँ
- प्रशासनिक कसावट और लोक सेवाओं की निगरानी व्यवस्था
- ग्रामीण बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण
उनकी कार्यशैली सौम्य किंतु दृढ़ है। वे कम बोलते हैं, परंतु निर्णय स्पष्ट और समयबद्ध लेते हैं। गांव की सादगी और राष्ट्रीय राजनीति का अनुभव—दोनों का संतुलित समन्वय उनके नेतृत्व की विशेषता है।
विरासत और आत्मनिर्माण
उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि में जनसेवा का संस्कार रहा है—दादा बुधनाथ साय और बड़े पिताजी नरहरि प्रसाद साय जैसे जनप्रतिनिधियों की विरासत ने उन्हें सामाजिक चेतना दी। किंतु विष्णुदेव साय ने अपनी अलग पहचान स्वयं गढ़ी। उन्होंने वंश परंपरा पर नहीं, बल्कि अपने कार्य, व्यवहार और निष्ठा पर भरोसा किया।
प्रेरणा का स्रोत
उनका जीवन इस तथ्य का प्रमाण है कि लोकतंत्र में साधारण पृष्ठभूमि से उठकर भी सर्वोच्च पद तक पहुँचा जा सकता है—यदि संकल्प अडिग हो और सेवा भाव सच्चा हो। सरपंच से मुख्यमंत्री तक की उनकी यात्रा लोकतांत्रिक शक्ति और जनविश्वास की महागाथा है।
आज, उनके जन्मदिन पर यह केवल शुभकामनाओं का अवसर नहीं, बल्कि उनके संकल्पों को दोहराने और प्रदेश की आकांक्षाओं को साकार करने की प्रेरणा लेने का भी दिन है।
छत्तीसगढ़ की जनता अपने न्यायप्रिय मुखिया से विकास, शांति और समृद्धि की अपेक्षा रखती है। प्रदेश की युवा पीढ़ी उनके संघर्ष से यह सीख सकती है कि सीमित संसाधन भी बड़े सपनों की राह में बाधा नहीं बनते।
कामना है कि धरतीपुत्र विष्णुदेव साय का प्रत्येक संकल्प और सशक्त हो, और उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ विकास, सामाजिक समरसता और सुशासन की नई ऊँचाइयों को प्राप्त करे।
राज्य के यशस्वी, ओजस्वी और दूरदर्शी मुख्यमंत्री को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ।
