रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्रदेश में काम कर रहे गिग वर्करों की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और कानूनी स्थिति को लेकर जोरदार चर्चा हुई। भाजपा विधायक Ajay Chandrakar ने प्रश्नकाल में सरकार से सीधे सवाल पूछते हुए गिग इकोनॉमी से जुड़े युवाओं की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
🔹 किन मुद्दों पर उठे सवाल?
अजय चंद्राकर ने पूछा कि:
- स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट और रैपिडो जैसी प्लेटफॉर्म कंपनियों में काम कर रहे गिग वर्करों को
संगठित मजदूर माना जाएगा या असंगठित? - क्या राज्य सरकार इनके लिए अलग नियम या अधिनियम लाने पर विचार कर रही है?
उन्होंने आरोप लगाया कि पहले आउटसोर्सिंग कंपनियों के मुद्दे पर भी सरकार ने स्पष्ट कानून न होने की बात कही थी और आज भी वही स्थिति बनी हुई है।

🔹 “गिग वर्कर मर रहे हैं, कंपनियां ऐश कर रही हैं”
चंद्राकर ने कहा कि:
- “10 मिनट डिलीवरी” जैसे मॉडल के कारण डिलीवरी एजेंटों पर भारी दबाव रहता है।
- तेज डिलीवरी के चक्कर में सड़क हादसे बढ़ रहे हैं।
- कई गिग वर्करों की जान जा चुकी है।
उन्होंने यह भी कहा कि मानवाधिकार संगठनों ने भी इस पर चिंता जताई है।
🔹 सामाजिक सुरक्षा संहिता पर सवाल
चंद्राकर ने बताया कि Code on Social Security, 2020 वर्ष 2020 में लागू हो चुकी है, जिसमें गिग और प्लेटफॉर्म वर्करों को शामिल किया गया है।
इसके बावजूद:
- अब तक स्पष्ट नियम अधिसूचित नहीं हुए
- ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था लागू नहीं है
- 2025 में केंद्र सरकार को नोटिफिकेशन जारी करना पड़ा
उन्होंने कहा कि कई राज्यों ने अपने स्तर पर नियम बना लिए हैं, तो क्या छत्तीसगढ़ भी समवर्ती सूची के अधिकार का उपयोग कर अलग कानून बनाएगा?
🔹 सरकार का जवाब क्या रहा?
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Lakhan Lal Devangan ने सदन में जवाब देते हुए कहा:
- फिलहाल गिग वर्करों को न तो संगठित क्षेत्र में रखा गया है और न ही असंगठित क्षेत्र में।
- सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत गिग एवं प्लेटफॉर्म वर्करों को शामिल किया गया है।
- जैसे ही भारत सरकार नियम अधिसूचित करेगी, राज्य सरकार उसका पालन करेगी।
मंत्री ने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने इस विषय पर एक समिति गठित की थी, लेकिन बाद में केंद्र द्वारा चार श्रम संहिताएं लागू किए जाने के बाद राज्य की प्रक्रिया केंद्र के अधिनियम के अनुरूप आगे बढ़ाई जा रही है।
🔹 बहस का व्यापक महत्व
यह मुद्दा इसलिए अहम है क्योंकि:
✔ छत्तीसगढ़ में हजारों युवा फूड डिलीवरी, कैब सर्विस और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं
✔ उन्हें नियमित कर्मचारी की तरह सामाजिक सुरक्षा, बीमा या पेंशन का लाभ नहीं मिलता
✔ दुर्घटना, बीमारी या आय रुकने की स्थिति में कोई ठोस सुरक्षा तंत्र नहीं है
विधानसभा में हुई इस बहस ने गिग इकोनॉमी में काम कर रहे युवाओं के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र सरकार नियम कब अधिसूचित करती है और राज्य सरकार उसके बाद कितनी जल्दी गिग वर्करों के लिए ठोस सामाजिक सुरक्षा ढांचा लागू करती है।
