रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड को लेकर सदन में जोरदार बहस देखने को मिली। कांग्रेस विधायकों ने जांजगीर जिले में CSR फंड के वितरण में पक्षपात और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया, जिस पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी तकरार हुई।
🔹 कांग्रेस का आरोप: “कलेक्टर मनमर्जी से बांट रहे राशि”
कांग्रेस विधायक Byas Kashyap ने प्रश्नकाल के दौरान मुद्दा उठाते हुए कहा कि:
- जांजगीर जिले में CSR फंड के उपयोग में पारदर्शिता नहीं है
- जनप्रतिनिधियों की अनुशंसा पर अमल नहीं किया जा रहा
- कलेक्टर अपनी मर्जी से राशि का वितरण कर रहे हैं
- जनप्रतिनिधियों की समिति का कोई महत्व नहीं रह गया है
उन्होंने मांग की कि इस मामले में स्पष्ट दिशा-निर्देश और जवाबदेही तय की जाए।
🔹 मंत्री का जवाब: “CSR के लिए कोई समिति नहीं”
उद्योग मंत्री Lakhan Lal Devangan ने जवाब देते हुए कहा कि:
- CSR फंड को लेकर कोई वैधानिक समिति नहीं है
- CSR राशि का उपयोग गांवों के विकास कार्यों में किया जा सकता है
- विधायक की ओर से दो प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें CSR फंड के संबंध में सीधे घोषणा करने या कलेक्टर को निर्देश देने का अधिकार नहीं है।

🔹 भूपेश बघेल का तंज
मंत्री के जवाब पर पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा:
“जब आप कलेक्टर को निर्देशित नहीं कर सकते, तो फिर मंत्री होने का क्या औचित्य है?”
इस टिप्पणी के बाद सदन में कुछ समय के लिए माहौल गरमा गया और सत्ता–विपक्ष के बीच नोकझोंक देखने को मिली।
🔹 CSR फंड क्या है और विवाद क्यों?
CSR (Corporate Social Responsibility) के तहत बड़ी कंपनियों को अपने मुनाफे का एक हिस्सा सामाजिक कार्यों—जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बुनियादी ढांचा—पर खर्च करना होता है।
विवाद इसलिए उठा क्योंकि:
✔ जनप्रतिनिधियों का कहना है कि उनकी अनुशंसाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है
✔ जिला प्रशासन पर मनमानी का आरोप है
✔ फंड वितरण की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट नीति की मांग की जा रही है
🔎 राजनीतिक महत्व
- यह मुद्दा सीधे प्रशासनिक अधिकार बनाम जनप्रतिनिधियों की भूमिका से जुड़ा है
- विपक्ष सरकार को जवाबदेह ठहराने की कोशिश में है
- सरकार का कहना है कि CSR कंपनियों के अधीन है और नियमों के तहत ही खर्च होता है
बजट सत्र के बीच यह बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है, क्योंकि यह विकास कार्यों और स्थानीय राजनीति से सीधे जुड़ा विषय है।
