मशहूर यूट्यूबर Elvish Yadav को सांप के जहर वाले केस में बड़ी राहत मिल गई है। Supreme Court of India ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी सभी कानूनी कार्यवाहियों को रद्द कर दिया है। यह मामला नोएडा में कथित रेव पार्टी से जुड़ा था, जिसमें सांप के जहर के इस्तेमाल के आरोप लगे थे।

⚖️ कोर्ट ने क्यों किया केस खारिज?
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें Justice M. M. Sundresh और Justice N. Kotiswar Singh शामिल थे, ने साफ कहा:
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत शिकायत अधिकृत व्यक्ति द्वारा दर्ज नहीं की गई थी, इसलिए मामला टिक नहीं सकता
- FIR में लगाए गए IPC के आरोप पहले से दर्ज केस पर आधारित थे, जिसमें क्लोजर रिपोर्ट दाखिल हो चुकी थी
- NDPS एक्ट भी लागू नहीं होता, क्योंकि जब्त पदार्थ (एंटी-वेनम) प्रतिबंधित ड्रग्स की सूची में नहीं आता
👉 इन कारणों से कोर्ट ने FIR, चार्जशीट और निचली अदालत की सभी कार्रवाइयों को रद्द कर दिया।
🐍 कोर्ट की सख्त टिप्पणी
राहत देने के साथ-साथ कोर्ट ने कड़ी चेतावनी भी दी:
- “अगर मशहूर लोग सांप जैसे बेजुबान जीवों का इस्तेमाल करेंगे, तो समाज में गलत संदेश जाएगा।”
- “क्या आप चिड़ियाघर में जाकर जानवरों के साथ खेल सकते हैं?”
👉 कोर्ट ने साफ किया कि पब्लिक फिगर्स को जिम्मेदारी से व्यवहार करना चाहिए।
🧾 एल्विश यादव की तरफ से क्या दलील दी गई?
यादव की ओर से वकील ने कहा:
- वह सिर्फ एक म्यूजिक वीडियो में गेस्ट के तौर पर गए थे
- मौके पर किसी रेव पार्टी या ड्रग्स के इस्तेमाल का कोई सबूत नहीं मिला
- मेडिकल रिपोर्ट में जिन 9 सांपों की जांच हुई, वे जहरीले नहीं थे
- उनके पास से कोई सांप या नशीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ
🏛️ सरकार का पक्ष क्या था?
राज्य की ओर से कहा गया:
- पुलिस ने 5 कोबरा समेत 9 सांप बरामद किए
- रेव पार्टियों में सांप के जहर के इस्तेमाल की आशंका जताई गई
हालांकि, कोर्ट को इन दावों के समर्थन में ठोस कानूनी आधार नहीं मिला।
🔍 क्या है पूरा मामला?
- केस नवंबर 2023 में दर्ज हुआ था
- 17 मार्च 2024 को एल्विश यादव को गिरफ्तार किया गया
- पहले भी अगस्त 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी
🔮 अब आगे क्या?
👉 फिलहाल एल्विश यादव को बड़ी कानूनी राहत मिल चुकी है
👉 लेकिन कोर्ट की चेतावनी यह संकेत देती है कि भविष्य में ऐसे मामलों में ज्यादा सख्ती हो सकती है
इस फैसले ने साफ कर दिया कि बिना मजबूत कानूनी आधार के किसी पर गंभीर आरोप टिक नहीं सकते, चाहे मामला कितना भी हाई-प्रोफाइल क्यों न हो।
