रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज एक बार फिर छातिम वृक्ष का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा, जब भाजपा विधायक सुनील सोनी ने प्रश्नकाल के दौरान इस पेड़ के कथित दुष्प्रभावों और इसके रोपण पर रोक को लेकर सरकार से सीधा सवाल किया। सदन में यह मुद्दा पहले भी चर्चा में रह चुका है, लेकिन आज फिर इसे उठाए जाने से साफ है कि यह विषय अब सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और शहरी प्रबंधन से जुड़ी बहस का हिस्सा बनता जा रहा है।
प्रश्नकाल के दौरान विधायक सुनील सोनी ने पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी से पूछा कि क्या छातिम वृक्ष के दुष्प्रभावों को देखते हुए इसके रोपण पर रोक लगाई गई है? साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि जो छातिम वृक्ष पहले से लगाए जा चुके हैं, क्या उन्हें हटाकर किसी अन्य स्थान पर विस्थापित करने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास है। विधायक का सवाल इस आशंका पर आधारित था कि छातिम वृक्ष को लेकर लोगों में यह धारणा बन रही है कि यह पेड़ स्वास्थ्य और जीवन के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

इस पर जवाब देते हुए मंत्री ओपी चौधरी ने स्थिति साफ की। उन्होंने सदन में कहा कि फिलहाल न तो छातिम वृक्षों का नया रोपण किया जा रहा है, और न ही सरकार ने इसके रोपण पर कोई औपचारिक रोक लगाई है। यानी सरकार की ओर से ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है, जिसमें छातिम वृक्ष लगाने पर प्रतिबंध की बात कही गई हो। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि विभाग के पास अभी तक पहले से रोपे गए छातिम वृक्षों को हटाने या उन्हें किसी अन्य जगह स्थानांतरित करने संबंधी कोई प्रस्ताव या कार्ययोजना नहीं है।
मंत्री के इस जवाब से यह स्पष्ट हो गया कि सरकार फिलहाल इस मुद्दे पर कोई बड़ा प्रशासनिक या नीति-स्तर का कदम उठाने के मूड में नजर नहीं आ रही। हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि मंत्री ने यह कहा कि वर्तमान में इसका रोपण नहीं किया जा रहा है। इस बयान को कई लोग एहतियातन रुख के रूप में देख सकते हैं, भले ही सरकार ने औपचारिक रोक की घोषणा न की हो।
छातिम वृक्ष को लेकर समय-समय पर अलग-अलग तरह की चर्चाएं होती रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि इसकी गंध, परागकण या आसपास का प्रभाव कुछ व्यक्तियों के लिए असुविधाजनक हो सकता है, जबकि दूसरी ओर पर्यावरणीय दृष्टि से पेड़ों को हटाने या रोक लगाने का सवाल हमेशा संवेदनशील माना जाता है। यही वजह है कि सदन में यह विषय केवल एक पेड़ तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शहरी हरियाली, पौधरोपण नीति, पर्यावरण संतुलन और नागरिक स्वास्थ्य जैसे बड़े मुद्दों से जुड़ जाता है।
विधानसभा में यह सवाल उठने का एक राजनीतिक पहलू भी है। जब किसी पेड़, पौधे या पर्यावरणीय फैसले को लेकर जनता में चर्चा होती है, तो जनप्रतिनिधि उसे सदन में उठाकर सरकार से स्पष्ट नीति जानना चाहते हैं। सुनील सोनी के सवाल से भी यही संकेत मिला कि इस मुद्दे पर जनता के बीच शंका या चिंता का माहौल है, जिसे लेकर सरकार का स्पष्ट पक्ष सामने लाना जरूरी समझा गया।
फिलहाल सरकार की ओर से जो जवाब आया है, उसके मुताबिक:
- छातिम वृक्ष पर कोई औपचारिक रोक नहीं है,
- नए रोपण की बात फिलहाल नहीं है,
- पहले से लगे पेड़ों को हटाने या शिफ्ट करने की कोई योजना नहीं है।
यानी अभी स्थिति यथावत बनी हुई है। लेकिन चूंकि यह मुद्दा बार-बार विधानसभा में उठ रहा है, इसलिए आने वाले दिनों में इस पर और बहस या विशेषज्ञ राय की मांग भी तेज हो सकती है।
इस खबर के लिए कुछ हेडिंग्स भी देखिए:
- विधानसभा में फिर गूंजा छातिम वृक्ष का मुद्दा, मंत्री ओपी चौधरी बोले- नहीं लगी है रोक
- छातिम पेड़ पर सदन में सवाल, सरकार ने कहा- न रोक, न हटाने की कोई योजना
- सुनील सोनी के सवाल पर सरकार का जवाब, छातिम वृक्ष हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं
- छत्तीसगढ़ विधानसभा में उठा छातिम वृक्ष विवाद, मंत्री ने स्थिति की साफ
- छातिम वृक्ष पर फिर छिड़ी बहस, ओपी चौधरी बोले- फिलहाल नहीं हो रहा रोपण
- सदन में छातिम वृक्ष को लेकर चिंता, मंत्री ने कहा- विभाग के पास नहीं कोई कार्ययोजना
