रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। आबकारी विभाग में मैनपावर सप्लाई का ठेका एक ही एजेंसी को दिए जाने के कांग्रेस के आरोपों पर डिप्टी सीएम अरुण साव ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में राज्य में अराजकता फैलाई, क्रिमिनल सिंडिकेट खड़ा किया और करप्शन को सिस्टम का हिस्सा बना दिया, इसलिए अब उन्हें हर जगह भ्रष्टाचार ही दिखाई देता है।
साव ने साफ शब्दों में कहा कि विष्णु देव साय सरकार में जो भी टेंडर प्रक्रिया हो रही है, वह पूरी तरह नियमों और प्रक्रिया के तहत हो रही है, इसलिए कांग्रेस को “बेबुनियाद आरोप” लगाना बंद करना चाहिए।
यह बयान सिर्फ आबकारी विभाग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अरुण साव ने महादेव सट्टा ऐप, नक्सलवाद, और रायपुर में फ्लाईओवर निर्माण जैसे कई बड़े मुद्दों पर भी कांग्रेस को घेरा।

क्या है आबकारी विभाग का पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत उस आरोप से हुई, जिसमें कांग्रेस ने कहा कि आबकारी विभाग में मैनपावर से जुड़ा ठेका एक ही एजेंसी को देकर पक्षपात और अनियमितता की गई है। विपक्ष का आरोप है कि इससे पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा पर सवाल उठते हैं।
इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए डिप्टी सीएम अरुण साव ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक करार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास अब मुद्दे नहीं बचे हैं, इसलिए वह हर प्रशासनिक निर्णय को विवादित बनाने की कोशिश कर रही है।
अरुण साव का सीधा हमला:
उन्होंने कहा कि:
- कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में व्यवस्था को बिगाड़ा
- क्रिमिनल सिंडिकेट तैयार किए
- और करप्शन को संस्थागत रूप दिया
साव का इशारा साफ था कि मौजूदा सरकार पर उंगली उठाने से पहले कांग्रेस को अपने शासनकाल का हिसाब देना चाहिए।
“जहां टेंडर हो रहा है, नियम से हो रहा है” – साव
डिप्टी सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के अंतर्गत होने वाली सभी टेंडर प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार संचालित हो रही हैं।
उनका कहना था कि:
- प्रक्रिया पारदर्शी है
- नियमानुसार निविदा जारी होती है
- विभागीय मानकों का पालन किया जा रहा है
- किसी एक एजेंसी को अनुचित लाभ पहुंचाने का सवाल ही नहीं उठता
यानी सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वर्तमान शासन में प्रशासनिक फैसलों को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है, जबकि प्रक्रिया कानूनी और औपचारिक रूप से सही है।
महादेव सट्टा ऐप मामले पर भी कांग्रेस पर हमला
आबकारी विवाद पर जवाब देने के दौरान अरुण साव ने महादेव सट्टा ऐप मामले का भी जिक्र किया और इसे कांग्रेस शासनकाल से जोड़ते हुए बड़ा राजनीतिक हमला बोला।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को बर्बाद करने का काम कांग्रेस के समय में हुआ।
साव के मुताबिक, राज्य में जिस तरह ऑनलाइन सट्टा, अवैध आर्थिक नेटवर्क और भ्रष्टाचार के नए मॉडल पनपे, वह कांग्रेस की सरकार के दौरान हुआ।
साव ने क्या कहा?
उनके मुताबिक:
- महादेव ऐप मामला केवल एक जुआ या सट्टा केस नहीं, बल्कि
- यह आर्थिक अपराध, नेटवर्क आधारित करप्शन, और
- सिस्टम के दुरुपयोग का मामला है
उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार और एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं।
“प्रॉपर्टी सीज होना इन्वेस्टिगेशन का हिस्सा”
महादेव ऐप से जुड़े मामलों में हो रही संपत्ति जब्ती और कार्रवाई पर भी साव ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि:
“संपत्ति सीज होना जांच प्रक्रिया का हिस्सा है”
इसका मतलब यह है कि सरकार और जांच एजेंसियां सिर्फ सतही कार्रवाई नहीं कर रहीं, बल्कि आर्थिक नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
उनका कहना था कि:
- अवैध कमाई के स्रोतों की जांच हो रही है
- संपत्तियों की पहचान की जा रही है
- और जरूरत पड़ने पर उन्हें सीज भी किया जा रहा है
साव ने यह भी आरोप लगाया कि “करप्शन के नए तौर-तरीके” कांग्रेस शासन में विकसित हुए, जिनका अब खुलासा हो रहा है।
साइबर अपराध रोकने के लिए नए साइबर थाने
महादेव ऐप और ऑनलाइन अपराधों के संदर्भ में अरुण साव ने यह भी कहा कि राज्य सरकार नए साइबर थाने बनाने की दिशा में काम कर रही है।
यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि:
- ऑनलाइन सट्टा
- साइबर फ्रॉड
- डिजिटल फाइनेंशियल अपराध
- सोशल मीडिया आधारित धोखाधड़ी
जैसे अपराधों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।
नए साइबर थानों से क्या होगा?
- डिजिटल अपराधों की जांच तेज होगी
- तकनीकी जांच क्षमता बढ़ेगी
- साइबर फ्रॉड के मामलों में त्वरित कार्रवाई हो सकेगी
- ऑनलाइन सट्टा और फर्जी नेटवर्क पर शिकंजा मजबूत होगा
यानी सरकार साइबर अपराधों को अब परंपरागत पुलिसिंग के बजाय विशेष तकनीकी ढांचे से निपटाना चाहती है।
नक्सलवाद पर भी डिप्टी CM का बड़ा बयान
राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों के बीच डिप्टी सीएम अरुण साव ने नक्सलवाद के खात्मे पर भी सरकार का रुख साफ किया।
उन्होंने कहा कि:
“देश को नक्सलमुक्त बनाने का संकल्प है”
साव के मुताबिक, केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस दिशा में संगठित और निर्णायक प्रयास कर रही हैं। उन्होंने खासतौर पर बस्तर का जिक्र करते हुए कहा कि आने वाले समय में वहां खुशहाली, विकास और स्थायी बदलाव दिखाई देगा।
सरकार का फोकस क्या है?
उनके बयान से यह साफ है कि सरकार नक्सलवाद को सिर्फ सुरक्षा मुद्दा नहीं, बल्कि विकास और सामाजिक बदलाव के सवाल के रूप में भी देख रही है।
उन्होंने संकेत दिया कि बस्तर में:
- सड़क
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- रोजगार
- प्रशासनिक पहुंच
को मजबूत कर लोगों के जीवन में बदलाव लाने की कोशिश की जा रही है।
“बस्तर में खुशहाली और तरक्की आएगी”
साव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाना नहीं, बल्कि बस्तर के आम लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाना है।
इसका मतलब है कि सरकार दो मोर्चों पर काम कर रही है:
1) सुरक्षा मोर्चा
- नक्सल ऑपरेशन
- खुफिया नेटवर्क
- कैंप विस्तार
- आत्मसमर्पण नीति
2) विकास मोर्चा
- सड़क और पुल निर्माण
- स्कूल और अस्पताल
- रोजगार और योजनाएं
- गांवों तक शासन की पहुंच
इस तरह सरकार नक्सलवाद के खिलाफ “गन + गवर्नेंस” मॉडल पर काम करती दिख रही है।
रायपुर के फ्लाईओवर प्रोजेक्ट पर भी कांग्रेस को जवाब
डिप्टी सीएम अरुण साव ने रायपुर में प्रस्तावित और निर्माणाधीन फ्लाईओवर प्रोजेक्ट्स को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी।
कांग्रेस की ओर से कहा जा रहा था कि:
- घड़ी चौक
- तेलीबांधा
- गौरव पथ
- पंडरी
जैसे प्रमुख स्थानों पर फ्लाईओवर निर्माण को लेकर स्पष्टता नहीं है या योजनाओं में गड़बड़ी है।
इस पर साव ने कहा कि:
“इस तरह की कोई बात नहीं है, योजना स्वीकृत है”
उन्होंने स्पष्ट किया कि रायपुर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और शहर के विकास के लिए सरकार ठोस और मजबूत योजना पर काम कर रही है।
रायपुर को ट्रैफिक राहत देने की तैयारी
अरुण साव के बयान से यह भी साफ हुआ कि सरकार रायपुर को आधुनिक ट्रैफिक इंफ्रास्ट्रक्चर देने के मूड में है।
इन फ्लाईओवर परियोजनाओं का उद्देश्य:
- शहर में ट्रैफिक जाम कम करना
- प्रमुख चौराहों पर दबाव घटाना
- आवागमन को तेज और सुगम बनाना
- बढ़ते शहरी दबाव को संभालना
रायपुर जैसे तेजी से बढ़ते शहर में फ्लाईओवर और अर्बन मोबिलिटी प्रोजेक्ट्स को सरकार विकास की प्राथमिकता के रूप में पेश कर रही है।
राजनीतिक संदेश क्या है?
अरुण साव के पूरे बयान को देखें तो इसमें सिर्फ जवाबी हमला नहीं, बल्कि एक राजनीतिक नैरेटिव सेट करने की कोशिश भी दिखाई देती है।
सरकार क्या संदेश देना चाहती है?
- वर्तमान सरकार नियम और पारदर्शिता से काम कर रही है
- पिछली सरकार के समय भ्रष्टाचार और नेटवर्क आधारित अपराध बढ़े
- अब उन पर सख्त कार्रवाई हो रही है
- साथ ही विकास और सुरक्षा दोनों मोर्चों पर सरकार सक्रिय है
यानी भाजपा सरकार कांग्रेस को भ्रष्टाचार, सट्टा, अराजकता और अव्यवस्था के प्रतीक के रूप में पेश कर रही है, जबकि खुद को व्यवस्थित, विकासोन्मुख और सख्त प्रशासन वाली सरकार के रूप में दिखा रही है।
निष्कर्ष
आबकारी विभाग के ठेके के मुद्दे से शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस बनाम सरकार की बड़ी राजनीतिक बहस में बदलता दिख रहा है।
डिप्टी सीएम अरुण साव ने सिर्फ ठेका विवाद पर सफाई नहीं दी, बल्कि महादेव ऐप, नक्सलवाद, साइबर अपराध और रायपुर विकास जैसे मुद्दों को जोड़ते हुए कांग्रेस पर चौतरफा हमला बोला है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि:
- कांग्रेस इन आरोपों का क्या जवाब देती है,
- आबकारी विभाग के ठेके पर आगे क्या तथ्य सामने आते हैं,
- और सरकार अपने “पारदर्शी शासन” के दावे को किस तरह जमीन पर साबित करती है।
