वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार सुबह करीब 1% की बढ़ोतरी देखने को मिली, लेकिन यह तेजी सीमित रही। इसके पीछे सप्लाई में बाधा और भू-राजनीतिक तनाव दोनों अहम वजहें हैं।
🛢️ तेल की कीमतों में क्यों आई तेजी?
- Saudi Arabia की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और तेल उत्पादन सुविधाओं पर हमलों का असर
- उत्पादन में करीब 600,000 बैरल/दिन की कमी
- सप्लाई में भी लगभग 700,000 बैरल/दिन की कटौती
👉 इससे ग्लोबल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी, जिससे कीमतों में उछाल आया।

📊 वर्तमान कीमतें
- Brent Crude: लगभग $96.65 प्रति बैरल
- WTI Crude: करीब $98.84 प्रति बैरल
👉 दोनों में करीब 1% की बढ़त दर्ज की गई।
🌍 US-ईरान बातचीत पर टिकी नजर
तेल की कीमतों में तेजी ज्यादा नहीं बढ़ी क्योंकि:
- United States और Iran के बीच सीजफायर (संघर्ष-विराम) बातचीत जारी
- निवेशक इस बातचीत के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं
👉 अगर समझौता होता है तो सप्लाई बेहतर हो सकती है, जिससे कीमतें नीचे आ सकती हैं।
🚢 होर्मुज जलडमरूमध्य बना चिंता का कारण
- Strait of Hormuz दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग
- यहां तनाव बढ़ने से ग्लोबल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है
👉 अनुमान है कि 230 तेल टैंकर इस रूट से गुजरने के इंतजार में हैं।
🔄 ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन क्यों है अहम?
- यह 1200 किमी लंबी पाइपलाइन है
- तेल को लाल सागर के यानबू पोर्ट तक पहुंचाती है
- इससे होर्मुज रूट को बायपास किया जा सकता है
👉 यानी अगर यह बाधित होती है, तो सप्लाई पर बड़ा असर पड़ता है।
🇮🇳 भारत पर क्या असर?
- भारत के लिए तेल आयात का यह रूट बेहद महत्वपूर्ण
- इंडियन क्रूड ऑयल बास्केट की कीमत करीब $115.52 प्रति बैरल
- कीमत बढ़ने से महंगाई और ईंधन कीमतों पर असर पड़ सकता है
🔍 निष्कर्ष
अभी तेल बाजार दो बड़े फैक्टर पर निर्भर है:
- मिडिल ईस्ट में तनाव और सप्लाई बाधा
- US-ईरान बातचीत का नतीजा
👉 आने वाले दिनों में इन दोनों के आधार पर तेल की कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
