भिलाईनगर। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) की नई हाउसिंग नीति से भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) सहित सभी यूनिटों के हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बड़ा झटका लग सकता है। कंपनी प्रबंधन ने सभी यूनिटों के लिए नई हाउसिंग स्कीम का विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार कर इस्पात मंत्रालय को भेज दिया है। इस प्रस्ताव में रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए कंपनी आवास बनाए रखने का कोई प्रावधान नहीं रखा गया है।
यदि यह नीति लागू होती है तो वर्षों से लंबित रिटेंशन स्कीम के दोबारा शुरू होने की संभावना लगभग समाप्त मानी जा रही है।

क्यों बदली गई हाउसिंग नीति?
नई नीति के पीछे केंद्र सरकार की लैंड मॉनेटाइजेशन (भूमि मुद्रीकरण) नीति को मुख्य कारण माना जा रहा है।
सरकार सार्वजनिक उपक्रमों की अतिरिक्त और अनुपयोगी जमीनों का व्यावसायिक उपयोग कर राजस्व बढ़ाना चाहती है। इसी उद्देश्य से 3 जून 2022 को नेशनल लैंड मोनेटाइजेशन कॉरपोरेशन (NLMC) की स्थापना की गई थी।
इस संस्था का काम है—
- सरकारी कंपनियों की अनुपयोगी भूमि की पहचान करना।
- उसका व्यावसायिक उपयोग सुनिश्चित करना।
- भूमि मुद्रीकरण के लिए तकनीकी सलाह देना।
- सरकार के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाना।
भिलाई टाउनशिप की जमीन पर भी नजर
सूत्रों के अनुसार, सेल के पास देशभर की सभी इकाइयों को मिलाकर विशाल भूमि बैंक है।
केवल भिलाई टाउनशिप का क्षेत्रफल लगभग 6 हजार एकड़ बताया जाता है।
सरकार चाहती है कि इन जमीनों का अधिकतम व्यावसायिक उपयोग हो ताकि राजस्व बढ़ाया जा सके। इसी दिशा में नई हाउसिंग नीति तैयार की गई है।
रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए नहीं होगा आवास का प्रावधान
नई डीपीआर के अनुसार—
- सेवानिवृत्त कर्मचारियों को कंपनी आवास देने का कोई प्रावधान नहीं रखा गया है।
- भविष्य में केवल कार्यरत कर्मचारियों के लिए सीमित संख्या में आवास उपलब्ध रहेंगे।
- तृतीय पक्ष (थर्ड पार्टी) को भी सीमित संख्या में आवास दिए जाएंगे।
- कुछ विशेष परिस्थितियों में केंद्र एवं राज्य सरकार के अधिकारियों अथवा अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों को ही कंपनी आवास उपलब्ध कराए जा सकेंगे।
रिटेंशनधारियों को देना होगा 24 रुपये प्रति वर्गफुट किराया
जो सेवानिवृत्त कर्मचारी वर्तमान में कंपनी के आवासों में रह रहे हैं, उनके लिए तत्काल बेदखली की संभावना तो नहीं जताई जा रही है, लेकिन उन्हें वर्तमान दर से किराया देना जारी रखना होगा।
वर्तमान किराया
- 24 रुपये प्रति वर्गफुट प्रति माह
सूत्रों के अनुसार, भविष्य में इस किराए में हर वर्ष लगभग 5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।
पहले कितनी थी सिक्योरिटी राशि?
सितंबर 2025 तक लागू रिटेंशन स्कीम के तहत कर्मचारियों से सिक्योरिटी डिपॉजिट लिया जाता था।
- एनक्यू-1 से एनक्यू-3 आवास: 8 लाख रुपये
- एनक्यू-4 और एनक्यू-5 आवास: 9 लाख रुपये
- एक्जीक्यूटिव आवास: 10 लाख रुपये
यदि कोई रिटेंशनधारी समय पर किराया जमा नहीं करता, तो कंपनी उसकी जमा सिक्योरिटी राशि से किराया काट सकती है।
रिटेंशन स्कीम दोबारा शुरू होने की संभावना कम
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, नई डीपीआर में रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए कोई अलग प्रावधान नहीं होने से रिटेंशन स्कीम के दोबारा लागू होने की संभावना लगभग समाप्त हो गई है।
हालांकि कंपनी फिलहाल जबरन आवास खाली कराने के पक्ष में नहीं दिखाई दे रही, लेकिन कर्मचारियों को निर्धारित किराया लगातार देना होगा।
पुराने क्वार्टर तोड़े जाएंगे
नई नीति के तहत सेल ने सभी यूनिटों की टाउनशिप में स्थित पुराने और जर्जर आवासों को चरणबद्ध तरीके से डिसमेंटल (ध्वस्त) करने का निर्णय भी लिया है।
इनकी जगह—
- भूमि का व्यावसायिक उपयोग किया जाएगा।
- सीमित संख्या में आधुनिक नए आवास बनाए जाएंगे।
- शेष भूमि का उपयोग राजस्व बढ़ाने वाली परियोजनाओं के लिए किया जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया में नेशनल लैंड मोनेटाइजेशन कॉरपोरेशन (NLMC) तकनीकी सलाह देगा।
रिटायर्ड कर्मचारियों को दोहरा आर्थिक नुकसान
नगर सेवाएं विभाग ने 1 दिसंबर 2025 से पुरानी रिटेंशन स्कीम समाप्त कर दी थी।
इसके बाद किराए की नई व्यवस्था लागू हुई—
- रिटायरमेंट के बाद पहले 2 महीने सामान्य किराया।
- अगले 4 महीने 8 रुपये प्रति वर्गफुट।
- उसके बाद 24 रुपये प्रति वर्गफुट।
इसके अलावा, सितंबर 2025 के बाद सेवानिवृत्त हुए और कंपनी आवास नहीं छोड़ने वाले कर्मचारियों की—
- ग्रेच्युटी,
- लीव एनकैशमेंट
की राशि रोके जाने की भी जानकारी सामने आई है। इस पर ब्याज भी नहीं मिल रहा।
ऐसे में कई सेवानिवृत्त कर्मचारियों को एक ओर ऊंचा किराया देना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर उन्हें अपनी सेवानिवृत्ति संबंधी देय राशि समय पर नहीं मिल रही, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ गया है।
प्रमुख बिंदु
- सेल ने नई हाउसिंग स्कीम का डीपीआर इस्पात मंत्रालय को भेजा।
- प्रस्ताव में रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए आवास का कोई प्रावधान नहीं।
- रिटेंशन स्कीम दोबारा लागू होने की संभावना लगभग समाप्त।
- रिटेंशनधारियों को 24 रुपये प्रति वर्गफुट की दर से किराया देना होगा।
- भविष्य में किराए में 5% वार्षिक वृद्धि का प्रस्ताव बताया जा रहा है।
- पुराने कंपनी क्वार्टरों को हटाकर भूमि का व्यावसायिक उपयोग किया जाएगा।
- आवास नहीं छोड़ने वाले कई रिटायर्ड कर्मचारियों की ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट की राशि भी रुकी हुई बताई जा रही है।
