रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्कूल छोड़ चुके बच्चों और अब तक स्कूल में दाखिला नहीं ले पाने वाले बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए राज्य स्तर पर नई पहल की जा रही है। इसके तहत शाला त्यागी, अप्रवेशी और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, पंजीयन तथा निगरानी के लिए तैयार किए गए ‘लईका चिन्हारी’ मोबाइल ऐप का एक दिवसीय राज्य स्तरीय व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण निमोरा स्थित ठाकुर प्यारेलाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान में समग्र शिक्षा की ओर से आयोजित किया गया।

कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों से पहुंचे सहायक कार्यक्रम समन्वयक यानी आउट ऑफ स्कूल चिल्ड्रन (OoSC) के नोडल अधिकारी और तकनीकी रूप से दक्ष जिला संसाधन समूह (DRG) के सदस्यों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य अधिकारियों और मास्टर ट्रेनर्स को ऐप के उपयोग की जानकारी देना था, ताकि वे अपने-अपने जिलों में मैदानी अमले को प्रशिक्षित कर सकें और बच्चों की पहचान से लेकर स्कूल में प्रवेश दिलाने तक की प्रक्रिया को व्यवस्थित बना सकें।
इस पहल के माध्यम से राज्य में ऐसे बच्चों का पता लगाने पर जोर दिया जा रहा है, जो किसी कारण से स्कूल नहीं जा रहे हैं, बीच में पढ़ाई छोड़ चुके हैं या जिन्हें शिक्षा प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त सहायता की जरूरत है। अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल माध्यम से बच्चों का रिकॉर्ड तैयार करने और उसकी निगरानी करने से सर्वेक्षण तथा नामांकन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।
क्या है ‘लईका चिन्हारी’ ऐप और क्यों किया गया तैयार?
‘लईका चिन्हारी’ मोबाइल ऐप का उद्देश्य शाला त्यागी, अप्रवेशी और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान कर उनका पंजीयन करना तथा उनकी स्थिति पर निगरानी रखना है। इसके जरिए सर्वेक्षण के दौरान प्राप्त जानकारी को डिजिटल रूप में दर्ज करने और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की प्रक्रिया को आसान बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
कई बार बच्चे पारिवारिक, सामाजिक, आर्थिक या अन्य परिस्थितियों के कारण स्कूल से दूर हो जाते हैं। वहीं, कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं, जिन्होंने कभी स्कूल में प्रवेश ही नहीं लिया होता। ऐसे बच्चों की पहचान करना और उन्हें दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा में लाना शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कार्य है।
इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए ऐप के उपयोग और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं की जानकारी अधिकारियों तथा मैदानी कर्मचारियों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। डिजिटल पंजीयन से बच्चों से संबंधित विवरण को व्यवस्थित रखने और उनके स्कूल में प्रवेश की प्रक्रिया पर नजर रखने में सहायता मिल सकती है।
OoSC और CWSN बच्चों की पहचान पर रहेगा विशेष ध्यान
इस पहल में मुख्य रूप से तीन श्रेणियों के बच्चों की पहचान और निगरानी पर ध्यान दिया जाएगा।
- शाला त्यागी बच्चे: ऐसे बच्चे, जिन्होंने किसी कारण से स्कूल जाना छोड़ दिया है।
- अप्रवेशी बच्चे (OoSC): ऐसे बच्चे, जो स्कूल में नामांकित नहीं हैं या शिक्षा की नियमित व्यवस्था से बाहर हैं।
- विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (CWSN): ऐसे बच्चे, जिन्हें उनकी विशेष शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुसार सहायता और सुविधाओं की जरूरत होती है।
इन बच्चों की पहचान होने के बाद उनका विवरण दर्ज करना और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए जरूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा। ऐप के माध्यम से इस काम को अधिक व्यवस्थित बनाने की योजना है।
मोबाइल पर लाइव डेमो देकर सिखाया गया ऐप चलाना
निमोरा में आयोजित प्रशिक्षण केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित नहीं रहा। प्रतिभागियों को लाइव डेमो के माध्यम से अपने मोबाइल फोन पर ऐप चलाने का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले अधिकारी और मास्टर ट्रेनर्स अपने जिलों में अन्य कर्मचारियों को भी आसानी से इसकी प्रक्रिया समझा सकें।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को प्ले स्टोर से ‘लईका चिन्हारी’ ऐप डाउनलोड करने और उसके विभिन्न फीचर्स का इस्तेमाल करने की जानकारी दी गई। इसके साथ ही सर्वेक्षण में शामिल कर्मचारियों के पंजीयन से लेकर बच्चों का विवरण दर्ज करने और नामांकन की प्रक्रिया तक के चरणों का अभ्यास कराया गया।
प्रमुख रूप से इन प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई:
- सर्वेक्षकों का पंजीयन: ऐप पर सर्वेक्षण करने वाले कर्मचारियों का पंजीयन करना।
- क्लस्टर आईडी से सत्यापन: संकुल समन्वयकों (CAC) द्वारा क्लस्टर आईडी के माध्यम से सत्यापन और अप्रूवल की प्रक्रिया पूरी करना।
- ड्रॉप बॉक्स में जानकारी खोजना: पहले से दर्ज बच्चों के विवरण को तलाशना और उपलब्ध जानकारी की जांच करना।
- नए बच्चों का विवरण दर्ज करना: सर्वेक्षण में सामने आए नए बच्चों की जानकारी ऐप में दर्ज करना।
- स्कूल में प्रवेश की प्रक्रिया: बच्चों को विद्यालय में दाखिला दिलाकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने से संबंधित प्रक्रिया समझना।
इन सभी चरणों का अभ्यास कराकर प्रतिभागियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने का प्रयास किया गया, ताकि जिलों में सर्वेक्षण के दौरान ऐप के इस्तेमाल में अनावश्यक परेशानी न हो।
राज्य स्तरीय प्रशिक्षण में इन अधिकारियों की रही भूमिका
‘लईका चिन्हारी’ ऐप के प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन समग्र शिक्षा की ओर से किया गया। प्रशिक्षण समग्र शिक्षा की आयुक्त किरण कौशल के मार्गदर्शन, अतिरिक्त प्रबंध संचालक के. कुमार के नेतृत्व और उप संचालक आनंद सारस्वत के निर्देशन में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का प्रभार और प्रशासनिक समन्वय सहायक संचालक भूपेश फाये तथा विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) के प्रोजेक्ट मैनेजर राजकिशोर तिवारी ने संभाला। कार्यशाला का संचालन सहायक कार्यक्रम समन्वयक अतुल कुमार अवस्थी और भूपेंद्र धर दीवान ने किया।
वहीं, तकनीकी सत्रों में ऐप के डेवलपर क्षितिज सेन और दीपक दास महंत ने प्रतिभागियों को तकनीकी जानकारी दी। पंजीयन व्यवस्था की जिम्मेदारी डेटा एंट्री ऑपरेटर राजकुमार बंजारे ने संभाली।
अधिकारियों और तकनीकी टीम के सहयोग से प्रतिभागियों को ऐप के विभिन्न चरणों को समझने और उनका व्यावहारिक अभ्यास करने का अवसर मिला।
अब सभी 33 जिलों में प्रशिक्षित होगा मैदानी अमला
राज्य स्तर पर प्रशिक्षण पूरा होने के बाद अब अगले चरण में मास्टर ट्रेनर्स अपने-अपने जिलों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेंगे। इसके तहत विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (BEO), ब्लॉक रिसोर्स सेंटर समन्वयकों (BRC) और संकुल समन्वयकों (CAC) को ऐप के उपयोग की जानकारी दी जाएगी।
इसके बाद संकुल स्तर पर संस्था प्रमुखों और स्थानीय सर्वेक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इनमें साक्षरता प्रेरक, मानदेय कार्यकर्ता और अतिथि शिक्षक जैसे मैदानी कर्मचारी शामिल होंगे।
इस चरणबद्ध प्रशिक्षण व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि ऐप के संचालन की जानकारी राज्य स्तर से लेकर गांव और स्कूल स्तर तक पहुंचे। इससे सर्वेक्षण करने वाले कर्मचारियों को बच्चों का विवरण दर्ज करने, पहले से उपलब्ध जानकारी खोजने और पंजीयन की प्रक्रिया पूरी करने में सहायता मिल सकेगी।
प्रशिक्षित कर्मचारियों के माध्यम से सर्वेक्षण का काम समय पर पूरा करने और तकनीकी कारणों से होने वाली बाधाओं को कम करने का प्रयास किया जाएगा।
प्रशिक्षण में शामिल प्रतिभागियों ने की सराहना
कार्यशाला में शामिल प्रतिभागियों ने ऐप के व्यावहारिक प्रशिक्षण की सराहना की। उन्होंने अपने-अपने जिलों में भी इसी तरह की कार्यशालाएं आयोजित करने की बात कही, ताकि स्थानीय स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को ऐप के इस्तेमाल में किसी तरह की परेशानी न हो।
जिलों में प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सर्वेक्षण और पंजीयन की प्रक्रिया को मैदानी स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा। इससे बच्चों की पहचान, उनकी जानकारी दर्ज करने और उन्हें विद्यालय में प्रवेश दिलाने से संबंधित गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, यही है उद्देश्य
छत्तीसगढ़ में ‘लईका चिन्हारी’ ऐप के माध्यम से ऐसे बच्चों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है, जो किसी कारण से नियमित शिक्षा व्यवस्था से बाहर हैं। उनकी पहचान करना, सही जानकारी दर्ज करना और उन्हें स्कूल में प्रवेश दिलाने की दिशा में कार्रवाई करना इस पहल के महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं।
राज्य स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षण देने के बाद अब जिलों, विकासखंडों और संकुल स्तर पर कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में शिक्षा विभाग के अधिकारियों, स्कूलों और स्थानीय सर्वेक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
यदि सर्वेक्षण, पंजीयन और निगरानी की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो इससे स्कूल से बाहर रह रहे बच्चों की पहचान करने और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिल सकती है। अधिकारियों ने बताया कि इस ऐप के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
