भोपाल की सिटी बस सेवा अब पूरी तरह नए सिस्टम के तहत संचालित होगी। सरकार ने मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अधीन शहर की बस सेवा को लाने का फैसला किया है। इस बदलाव के बाद अब बसों की कमान महापौर और एमआईसी के बजाय प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ में होगी।

सरकार के इस फैसले के तहत स्मार्ट सिटी सीईओ को सिटी बस सेवा का पूरा प्रभार सौंपा गया है। नए बोर्ड के गठन तक वर्तमान सीईओ अंजू अरुण ही इसकी प्रभारी बनी रहेंगी। माना जा रहा है कि इस कदम का उद्देश्य बस सेवा में राजनीतिक हस्तक्षेप कम करना और संचालन को ज्यादा व्यवस्थित और जवाबदेह बनाना है।
अब तक शहर में बसों के रूट तय करने, नए स्टॉपेज बनाने या अन्य फैसलों में जनप्रतिनिधियों और पार्षदों की सिफारिशों का प्रभाव देखा जाता था, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह अधिकार प्रशासनिक स्तर पर केंद्रित हो जाएगा। अब किराया निर्धारण, परमिट और बस रूट से जुड़े सभी बड़े फैसले क्षेत्रीय कंपनी के जरिए लिए जाएंगे।
सरकार ने साफ किया है कि सिटी बस सेवा को PPP यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर संचालित किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि सरकार खुद नई बसें खरीदने के बजाय निजी ऑपरेटरों के माध्यम से बसों का संचालन कराएगी। इससे नगर निगम पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा और निजी भागीदारी के जरिए सेवा को बेहतर बनाने की कोशिश की जाएगी।
फिलहाल भोपाल में केवल करीब 70 सिटी बसें संचालित हो रही हैं और यात्रियों को लंबे समय से बसों की लेटलतीफी, चालकों की मनमानी और खराब प्रबंधन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं शिकायतों को देखते हुए अब बसों को आधुनिक ITMS यानी इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से लैस किया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत मुख्यालय से सभी बसों की लाइव ट्रैकिंग की जाएगी। कौन सी बस किस रूट पर है, कितनी देर से चल रही है और चालक नियमों का पालन कर रहा है या नहीं — इसकी निगरानी रियल टाइम में होगी। अगर किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है तो तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से सिटी बस सेवा ज्यादा पारदर्शी, समयबद्ध और यात्री सुविधा केंद्रित बनेगी। वहीं विपक्ष और कुछ जनप्रतिनिधि इसे जनप्रतिनिधियों के अधिकार कम करने वाले फैसले के तौर पर भी देख रहे हैं। अब देखना होगा कि यह नया मॉडल भोपाल के सार्वजनिक परिवहन को कितना सुधार पाता है।
