भोपाल/रायपुर से बड़ी और संवेदनशील खबर…
छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के सराफा बाजारों में सुरक्षा को लेकर लिया गया एक फैसला
अब धार्मिक आज़ादी के उल्लंघन के आरोपों के घेरे में आ गया है।

दरअसल, छत्तीसगढ़ और इंदौर के सराफा संघों ने
ज्वेलरी शॉप में बुर्का, नकाब या किसी भी तरह से चेहरा ढककर प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है।
यह फैसला सराफा एसोसिएशन की आपातकालीन बैठक में लिया गया,
जिसके बाद इसे राज्यभर के सराफा बाजारों में लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
सराफा संघ का तर्क है कि—
बीते समय में चोरी और लूट की घटनाओं में
चेहरा ढककर आने वाले लोगों का इस्तेमाल किया गया,
जिससे दुकानदारों और ग्राहकों की सुरक्षा को खतरा रहता है।
इसी वजह से यह फैसला सुरक्षा के मद्देनज़र लिया गया है।
लेकिन इस फैसले को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है।
वक्फ बोर्ड आयोग के पूर्व अध्यक्ष सलाम रिज़वी ने इस निर्णय पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि—
यह आदेश एक विशेष समुदाय को टारगेट करने की कोशिश है
और इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सलाम रिज़वी ने यह भी चेतावनी दी कि
अगर किसी दुकान द्वारा इस फैसले को लागू किया जाता है,
तो उस दुकान को चिन्हित कर पूरे समुदाय द्वारा बहिष्कार किया जाएगा।
उनका कहना है कि
भारत का संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है,
और किसी भी तरह से धार्मिक पहनावे पर रोक
संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।
इधर, सराफा व्यापारियों का कहना है कि
यह फैसला किसी समुदाय के खिलाफ नहीं,
बल्कि अपराध पर रोक और बाजार की सुरक्षा के लिए लिया गया है।
उनका दावा है कि चेहरा ढकने से
CCTV पहचान में दिक्कत होती है और
अपराधियों को पकड़ना मुश्किल हो जाता है।
👉 अब यह मामला सिर्फ बाजार की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा,
बल्कि धार्मिक अधिकार, सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
देखना होगा कि प्रशासन और सरकार इस विवाद पर
क्या रुख अपनाती है और कोई संतुलित समाधान निकलता है या नहीं।
