पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने दिल्ली पहुंचते ही केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर तीखा और आक्रामक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल और बंगाल से आने वाले लोगों के साथ भेदभावपूर्ण और अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा है।

🟥 ‘रेड कार्पेट बनाम ब्लैक कार्पेट’ वाला बयान
ममता बनर्जी ने कहा कि
“जब केंद्रीय गृह मंत्री या अन्य केंद्रीय नेता पश्चिम बंगाल आते हैं, तो राज्य सरकार उन्हें पूरे सम्मान के साथ रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत करती है। लेकिन जब बंगाल के लोग या जनप्रतिनिधि दिल्ली आते हैं, तो उनके साथ ब्लैक कार्पेट जैसा व्यवहार किया जाता है।”
उन्होंने इसे पक्षपातपूर्ण, अपमानजनक और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप
मुख्यमंत्री ने दिल्ली पुलिस पर बंगाल से आए लोगों के साथ ज्यादती और उत्पीड़न करने के आरोप लगाए।
उनका कहना था कि:
- बंगाल के लोगों को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है
- कई मामलों में निर्दोष लोगों को निशाना बनाया जा रहा है
- पुलिस को संयम बरतना चाहिए, न कि राजनीतिक दबाव में काम करना चाहिए
ममता ने स्पष्ट कहा कि यह रवैया असंवैधानिक और अन्यायपूर्ण है।
केंद्रीय एजेंसियों पर बीजेपी के इशारे पर काम करने का आरोप
ममता बनर्जी ने केवल दिल्ली पुलिस ही नहीं, बल्कि देश की जांच एजेंसियों (CBI, ED आदि) पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा कि:
- ये एजेंसियां निष्पक्ष नहीं रहीं
- बीजेपी इन्हें राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है
- विपक्षी नेताओं और राज्यों को डराने और बदनाम करने की कोशिश की जा रही है
उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक स्थिति करार दिया।
बंग भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस का ऐलान
मुख्यमंत्री ने बताया कि वह चाणक्यपुरी स्थित बंग भवन जा रही हैं, जहां:
- बंगाल से आए लोगों से मुलाकात करेंगी
- दिल्ली पुलिस द्वारा कथित अत्याचारों की जानकारी लेंगी
- पूरे मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देश को सच्चाई बताएंगी
उनका कहना था कि “दिल्ली के लोग यह नहीं जानते कि बंगाल और बंगाल के लोगों के साथ क्या हो रहा है।”
दो टूक चेतावनी: अन्याय के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी
ममता बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा:
- अगर देश में कोई अन्याय के खिलाफ आवाज़ नहीं उठाता, तो वह खुद लड़ेंगी
- तृणमूल कांग्रेस पूरी ताकत से मुकाबला करेगी
- बंगाल के लोगों के सम्मान और अधिकारों से कोई समझौता नहीं होगा
उन्होंने इसे केवल बंगाल का नहीं, बल्कि संघीय ढांचे और लोकतंत्र की लड़ाई बताया।
🔎 निष्कर्ष
ममता बनर्जी का यह बयान:
- केंद्र बनाम राज्यों के टकराव को और तेज करता है
- दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका पर सवाल खड़े करता है
- 2026–27 के राजनीतिक माहौल में विपक्ष की आक्रामक रणनीति का संकेत देता है
