छत्तीसगढ़ में अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार अब हाईटेक तकनीक का सहारा लेने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर खनिज विभाग ने निगरानी और नियंत्रण के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
🚁 ड्रोन से होगी खदानों की निगरानी
अब खदानों की निगरानी जमीन से नहीं, बल्कि आसमान से की जाएगी।
- शुरुआती चरण में 5 ड्रोन कैमरे तैनात किए जाएंगे
- इन ड्रोन से एरियल सर्वे और 3D मैपिंग की जाएगी
- यह देखा जाएगा कि खनन लीज क्षेत्र के अंदर हो रहा है या बाहर
- समय-समय पर डेटा तुलना कर ओवर माइनिंग (ज्यादा खुदाई) का पता लगाया जाएगा
- ड्रोन से ली गई हाई-रिजोल्यूशन तस्वीरें सीधे विभाग तक पहुंचेंगी

📍 जिन जिलों में पहले चरण में निगरानी होगी:
- रायपुर
- धमतरी
- बलौदाबाजार
- बिलासपुर
👉 खास फायदा: जंगल और पहाड़ी जैसे दुर्गम इलाकों में भी आसानी से निगरानी संभव होगी।
🚛 ई-चेक गेट से ट्रांसपोर्ट पर कंट्रोल
खनिज परिवहन को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार 10 प्रमुख रूट्स पर ई-चेक गेट लगाएगी।
- हर वाहन की डिजिटल एंट्री-एग्जिट होगी
- रिकॉर्ड में दर्ज होगा:
- वाहन नंबर
- खनिज का प्रकार
- मात्रा
- गंतव्य
- रियल टाइम ट्रैकिंग से पता चलेगा कि गाड़ी कहां से निकली और कहां जा रही है
👉 फायदा:
- ओवरलोडिंग पर रोक
- बिना रॉयल्टी खनिज परिवहन बंद
- टैक्स चोरी पर लगाम
⚠️ अवैध खनन के प्रमुख तरीके
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन कई रूपों में होता है:
- बिना अनुमति खनन
- लीज एरिया के बाहर खुदाई
- तय सीमा से ज्यादा खनन (ओवर माइनिंग)
- बिना टैक्स/रॉयल्टी के परिवहन
- फर्जी दस्तावेजों का उपयोग
📜 सख्त नियम और कार्रवाई
खनिज विभाग ने नियमों को और कड़ा किया है:
- अवैध उत्खनन पर कम से कम 25,000 रुपये जुर्माना
- सैटेलाइट और माइनिंग सर्विलांस सिस्टम से रियल टाइम मॉनिटरिंग
- ऑनलाइन ट्रांजिट पास अनिवार्य
- पिछले 5 साल में 84.47 करोड़ रुपये की वसूली
🗣️ अधिकारी क्या कहते हैं?
खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद के अनुसार:
- अवैध खनन रोकने के लिए यह एक बड़ा तकनीकी बदलाव है
- ड्रोन और ई-गेट सिस्टम से निगरानी ज्यादा प्रभावी होगी
- किसी भी गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी
🔍 निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ सरकार अब डिजिटल और टेक्नोलॉजी आधारित निगरानी सिस्टम के जरिए अवैध खनन पर सख्ती से नकेल कसने की तैयारी में है।
ड्रोन, 3D मैपिंग और ई-चेक गेट जैसे कदम न केवल पारदर्शिता बढ़ाएंगे, बल्कि राजस्व नुकसान और पर्यावरणीय क्षति को भी कम करने में मदद करेंगे।
