छत्तीसगढ़ सरकार का यह आदेश सरकारी कर्मचारियों की निष्पक्षता और राजनीतिक तटस्थता बनाए रखने के लिए काफी अहम माना जा रहा है। इसे आसान भाषा में विस्तार से समझते हैं 👇
🔴 क्या है पूरा मामला?
राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि कोई भी सरकारी कर्मचारी:
- राजनीति से दूरी बनाए रखे
- बिना अनुमति किसी संगठन/कार्यक्रम में शामिल न हो
- ऐसी गतिविधियों से बचे जिससे उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठे
यह आदेश सभी विभागों, संभाग आयुक्तों और कलेक्टरों को सख्ती से लागू कराने के लिए भेजा गया है।

🚫 किन गतिविधियों पर रोक लगाई गई है?
1. राजनीतिक जुड़ाव पूरी तरह बैन
- कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक दल का सदस्य नहीं बन सकता
- किसी पार्टी के लिए काम करना, प्रचार करना या समर्थन देना मना है

2. चुनावी गतिविधियों में भागीदारी नहीं
- प्रत्यक्ष (जैसे प्रचार करना) या अप्रत्यक्ष (जैसे सोशल मीडिया समर्थन) दोनों पर रोक
- चुनावी रैलियों, बैठकों में शामिल होना भी नियमों के खिलाफ होगा
3. बिना अनुमति किसी संस्था में पद नहीं
- कर्मचारी किसी भी:
- समिति
- सोसायटी
- NGO
- या अन्य संगठन
में पद (अध्यक्ष, सचिव आदि) नहीं ले सकते
- इसके लिए पहले विभाग से अनुमति जरूरी होगी
4. निष्पक्षता पर असर डालने वाले काम मना
- ऐसा कोई भी काम नहीं कर सकते जिससे लगे कि कर्मचारी पक्षपाती है
- सरकारी काम में निष्पक्षता सबसे जरूरी मानी गई है
⚠️ उल्लंघन करने पर क्या होगा?
अगर कोई कर्मचारी नियम तोड़ता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी:
- छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत
- संभावित सजा:
- चेतावनी
- वेतन कटौती
- निलंबन
- या नौकरी से बर्खास्तगी तक
🟡 RSS और अन्य संगठनों पर क्या असर?
सूत्रों के अनुसार:
- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसी सामाजिक/सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़े कर्मचारियों को भी अब:
- शाखा या कार्यक्रम में जाने से पहले अनुमति लेनी पड़ सकती है
👉 यानी सरकार इस आदेश को सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि “प्रभाव डालने वाले सभी संगठनों” तक लागू कर सकती है।
🏢 कॉलोनी/सोसायटी पदों पर भी असर
- कई कर्मचारी अपने मोहल्लों में:
- अध्यक्ष
- सचिव
- समिति सदस्य
होते हैं
अब उन्हें:
- या तो पद छोड़ना होगा
- या विभाग से अनुमति लेनी होगी
🔍 सरकार ने यह सख्ती क्यों की?
इसके पीछे मुख्य कारण हैं:
- सरकारी कर्मचारियों की निष्पक्ष छवि बनाए रखना
- प्रशासन को राजनीतिक प्रभाव से दूर रखना
- निर्णयों में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ाना
📊 इसका असर क्या होगा?
- मंत्रालय से लेकर जिलों तक हलचल
- कर्मचारियों को अपने अतिरिक्त सामाजिक/राजनीतिक जुड़ाव पर पुनर्विचार करना होगा
- कई लोग औपचारिक अनुमति लेने या पद छोड़ने की स्थिति में आ सकते हैं
