कोलकाता। 2026 West Bengal Legislative Assembly election के नतीजों ने देश की राजनीति को चौंका दिया। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत को कई राजनीतिक विश्लेषक “राजनीतिक भूकंप” और “युग परिवर्तन” के तौर पर देख रहे हैं।
यह बदलाव केवल सरकार बदलने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बंगाल की राजनीतिक और सामाजिक सोच में बड़े परिवर्तन का संकेत बताया जा रहा है। लंबे समय तक राज्य की राजनीति पर प्रभाव रखने वाली Mamata Banerjee और उनकी पार्टी All India Trinamool Congress को इस चुनाव में बड़ा झटका लगा।

रिकॉर्ड मतदान ने बदली तस्वीर
इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत रिकॉर्ड मतदान रही। राज्य में 92 प्रतिशत से अधिक वोटिंग दर्ज की गई, जो अपने आप में असाधारण मानी जा रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं का मतदान केंद्रों तक पहुंचना इस बात का संकेत था कि जनता बदलाव के मूड में थी।
आंकड़ों पर नजर डालें तो 2021 के मुकाबले लगभग 15 प्रतिशत वोटरों ने अपना राजनीतिक पक्ष बदला। यही बड़ा वोट स्विंग चुनाव परिणामों में निर्णायक साबित हुआ।
कैसे बदला वोट प्रतिशत?
2021 के विधानसभा चुनाव में All India Trinamool Congress को लगभग 48 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि Bharatiya Janata Party 38 प्रतिशत वोट पर थी।
लेकिन 2026 में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। बीजेपी ने 45.84 प्रतिशत वोट हासिल किए, जबकि तृणमूल कांग्रेस 41.08 प्रतिशत पर सिमट गई।
यानी करीब 8 प्रतिशत से अधिक का बड़ा वोट स्विंग देखने को मिला, जो बंगाल की राजनीति में दुर्लभ माना जा रहा है।
सिर्फ SIR नहीं, कई वजहें रहीं अहम
कुछ राजनीतिक विश्लेषक बदलाव के पीछे SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को जिम्मेदार मान रहे हैं, लेकिन जानकारों का कहना है कि इतनी बड़ी राजनीतिक बदलाव की वजह केवल यही नहीं हो सकती।
विश्लेषकों के अनुसार इस बदलाव के पीछे कई बड़े कारण रहे –
- राज्य सरकार के खिलाफ बढ़ती एंटी-इंकंबेंसी
- भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था को लेकर नाराजगी
- ग्रामीण और शहरी वोटरों में असंतोष
- बीजेपी और आरएसएस का बूथ स्तर तक मजबूत संगठन
- आक्रामक प्रचार अभियान
- हिंदुत्व आधारित वोटों का ध्रुवीकरण
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर SIR का प्रभाव 3-4 प्रतिशत भी मान लिया जाए, तब भी 15 प्रतिशत का वोट शिफ्ट ऐतिहासिक माना जाएगा।
बंगाल की राजनीति हमेशा रही भावनात्मक
पश्चिम बंगाल की राजनीति हमेशा सिर्फ चुनावी आंकड़ों तक सीमित नहीं रही। यहां राजनीति सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा मानी जाती है।
राज्य में चुनाव चाय की दुकानों से लेकर कॉलेज कैंपस और घरों तक चर्चा का विषय रहते हैं। यही कारण है कि यहां राजनीतिक बदलाव का असर समाज की सोच और व्यवहार में भी दिखाई देता है।
TMC अपने इतिहास से क्या सीख सकती है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि All India Trinamool Congress को अपने शुरुआती दौर के इतिहास से सीख लेने की जरूरत है।
कभी ममता बनर्जी ने वाम मोर्चे के लंबे शासन के खिलाफ “परिवर्तन” के नारे के साथ जनता के बीच जगह बनाई थी। उस समय जनता बदलाव चाहती थी और TMC उस भावना की सबसे बड़ी प्रतिनिधि बनकर उभरी।
लेकिन अब वही एंटी-इंकंबेंसी भावना तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ दिखाई दी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पार्टी संगठन में बदलाव, नेतृत्व की नई रणनीति और जनता से सीधे संवाद पर काम नहीं करती, तो उसके लिए आगे की राह और कठिन हो सकती है।
बीजेपी की रणनीति ने किया बड़ा असर
Bharatiya Janata Party ने इस चुनाव में बूथ मैनेजमेंट, सोशल मीडिया कैंपेन, धार्मिक-सांस्कृतिक मुद्दों और स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करने पर विशेष फोकस किया।
ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन विस्तार और पहली बार वोट करने वाले युवाओं तक पहुंच बनाने की रणनीति भी पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हुई।
विश्लेषकों के मुताबिक बीजेपी ने बंगाल में केवल चुनाव नहीं जीता, बल्कि राज्य की राजनीति में स्थायी जगह बनाने का संकेत भी दे दिया है।
