दंतेवाड़ा, 12 जनवरी 2026
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बस्तर की समृद्ध जनजातीय लोक-संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से आयोजित ‘बस्तर पंडुम 2026’ की तैयारियाँ पूरे प्रदेश में जोर-शोर से चल रही हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशन में संस्कृति विभाग इस महोत्सव को जनपद, जिला और संभागकृतीन स्तरों पर भव्य रूप से आयोजित कर रहा है। यह आयोजन 10 जनवरी से आरंभ होकर 06 फरवरी 2026 तक चलेगा और इस दौरान बस्तर की कला, शिल्प, नृत्य, संगीत, व्यंजन, बोली-भाषा, वेशभूषा, आभूषण, वाद्य-यंत्र और जनजातीय जीवन शैली का अद्भुत प्रदर्शन पूरे प्रदेश में देखने को मिलेगा।

राज्य शासन ने बस्तर संभाग के सातों जिलों बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, कांकेर, कोंडागांव और नारायणपुरकृको इस महोत्सव में अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं। बस्तर संभाग की 1885 ग्राम पंचायतों और 32 जनपद मुख्यालयों में 12 विधाओं पर आधारित प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएंगी। ग्राम स्तर पर चयनित कलाकारों और कला दलों को जनपद स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाएगा, जहाँ प्रत्येक विधा से एक विजेता दल को 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके लिए प्रत्येक जनपद पंचायत को 5 लाख रुपये का बजट स्वीकृत है।
इसी क्रम में दंतेवाड़ा जिले में जनपद स्तरीय ‘बस्तर पंडुम’ के आयोजन की तिथि निर्धारित कर दी गई है। यह महोत्सव 16 और 17 जनवरी को जिले के विभिन्न जनपद स्तरीय मैदानों में आयोजित होगा। प्रशासन द्वारा तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं और संबंधित विभागों को उनके दायित्व सौंप दिए गए हैं, ताकि दो दिवसीय कार्यक्रम में कलाकारों और दर्शकों को सर्वोत्तम व्यवस्था मिल सके। दंतेवाड़ा के ग्रामीण अंचलों से आने वाले लोक कलाकार अपनी पारंपरिक धुनों, नृत्यों, वाद्य-यंत्रों और वेशभूषा के माध्यम से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करेंगे। जनपद स्तरीय प्रतियोगिताओं के बाद दूसरा चरण जिला स्तर पर 24 से 29 जनवरी तक आयोजित होगा, जहाँ विजेता दलों को 20 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलेगी। अंतिम और सबसे भव्य चरण संभाग स्तर पर 2 से 6 फरवरी 2026 तक जगदलपुर में होगा, जहाँ सातों जिलों से चयनित 84 दल अपनी श्रेष्ठ कला प्रस्तुत करेंगे। संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार क्रमशः 50 हजार, 30 हजार और 20 हजार रुपये के होंगे, जबकि अन्य प्रतिभागी दलों को 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
इस पूरे महोत्सव की विशेषता यह है कि इसमें केवल बस्तर संभाग के वास्तविक मूल निवासी कलाकार ही भाग ले सकेंगे, ताकि बस्तर अंचल की मौलिक कला और संस्कृति अपनी असल पहचान के साथ उभरकर सामने आए। वरिष्ठ कलाकारों के साथ-साथ नए कलाकारों को भी बड़े मंच पर प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा। सभी स्तरों पर विजेताओं को पुरस्कार राशि, प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। समाज प्रमुखों, वरिष्ठ नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और संस्कृति प्रेमियों को आयोजन में शामिल किया जाएगा, ताकि यह महोत्सव एक जनउत्सव का रूप ले सके। महोत्सव के प्रचार-प्रसार के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक अभियान चलाया जाएगा, जिससे बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर जन-जन तक पहुँच सके। दंतेवाड़ा जिले में जनपद पंचायत स्तर पर 16,17 जनवरी का बस्तर पंडुम की शुरुआत होगी। जहाँ परंपरा, कला और उमंग का अनूठा संगम पूरे क्षेत्र को उत्सवमय कर देगा।
