छत्तीसगढ़ में लगातार सामने आ रहे अफीम की अवैध खेती के मामलों ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। रायगढ़ जिले के लैलूंगा ब्लॉक में अफीम की खेती मिलने के बाद यह मुद्दा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी का कारण बन गया है। राज्य में पिछले 17 दिनों के भीतर यह पांचवां मामला सामने आया है, इसलिए स्वाभाविक तौर पर इस पर सियासत भी तेज हो गई है।
ताजा मामला रायगढ़ जिले के लैलूंगा ब्लॉक के नवीन घटगांव का है, जहाँ तीन अलग-अलग खेतों में अफीम की अवैध खेती मिलने की बात सामने आई। इस खुलासे के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भाजपा सरकार पर तंज कसा। उन्होंने खेतों की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि “सुशासन के अफीम स्टार्टअप की नई ब्रांच अब लैलूंगा में पाई गई है।” इसके साथ ही उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कटाक्ष किया कि अब लगता है भाजपा को अपना चुनाव चिन्ह “कमल के फूल” की जगह “अफीम का फूल” कर लेना चाहिए। बघेल की इस टिप्पणी ने पूरे मामले को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया।

भूपेश बघेल के इस हमले पर भाजपा की ओर से भी जवाब आया। वरिष्ठ भाजपा नेता और विधायक अजय चंद्राकर ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के लिए एक गंभीर और चिंताजनक मुद्दा है। उनके मुताबिक, अफीम की अवैध खेती के पीछे ऐसे गिरोह सक्रिय हैं, जिनका मकसद सिर्फ आपराधिक लाभ कमाना है। इसलिए इस मामले में सख्त कार्रवाई जरूरी है।
अजय चंद्राकर ने खास तौर पर इस बात पर जोर दिया कि केवल खेतों से फसल बरामद करना ही काफी नहीं है, बल्कि यह भी जांच होनी चाहिए कि कहीं इस अवैध धंधे को प्रशासनिक या राजनीतिक संरक्षण तो नहीं मिला हुआ था। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर प्रतिक्रिया देते हुए अजय चंद्राकर ने यह भी कहा कि बघेल की राजनीति हमेशा चर्चा में बने रहने वाली राजनीति रही है। उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल किसी भी मुद्दे पर ऐसा बयान दे सकते हैं, जिससे वे सुर्खियों में बने रहें। चंद्राकर के अनुसार, बघेल के राजनीतिक बयान पर अधिक ध्यान देने के बजाय तथ्यों की जांच और दोषियों की पहचान पर फोकस होना चाहिए।
दरअसल, छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ दिनों के भीतर एक के बाद एक अफीम की खेती के मामले सामने आने से प्रशासन भी दबाव में है। इससे पहले दुर्ग, बलरामपुर और रायगढ़ के अलग-अलग इलाकों में भी अफीम की अवैध खेती पकड़ी जा चुकी है। लगातार हो रहे खुलासों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर प्रदेश में यह नेटवर्क कितना बड़ा है और इसके पीछे कौन लोग सक्रिय हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब तक सामने आए सभी मामलों की गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन अवैध खेतों के पीछे कौन लोग हैं, कौन इन्हें संचालित कर रहा था, और कहीं किसी प्रभावशाली व्यक्ति या तंत्र का संरक्षण तो इसमें शामिल नहीं है। अधिकारियों ने साफ किया है कि सभी तथ्यों की जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक सवाल बन गया है। एक ओर विपक्ष सरकार पर तंज कस रहा है, तो दूसरी ओर सत्ता पक्ष इसे गंभीर आपराधिक मामला बताकर निष्पक्ष जांच की बात कर रहा है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और राजनीतिक प्रतिक्रिया, दोनों इस मुद्दे को और ज्यादा गर्मा सकते हैं।
