Bank Strike 2026: देशभर के बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की नाराजगी एक बार फिर आंदोलन का रूप लेने जा रही है। बैंक यूनियनों के संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने सितंबर से अक्टूबर 2026 के बीच चरणबद्ध आंदोलन और हड़ताल का कार्यक्रम घोषित किया है। इसके तहत सितंबर में कुल चार दिन देशव्यापी बैंक हड़ताल प्रस्तावित है। यदि इस दौरान कर्मचारियों की मांगों पर समाधान नहीं निकला, तो 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की तैयारी की गई है।

बैंक कर्मचारियों के इस आंदोलन का असर देशभर में बैंकिंग सेवाओं पर पड़ सकता है। हड़ताल के दिनों में बैंक शाखाओं में नकद जमा और निकासी, चेक से जुड़े काम, शाखा स्तर की ग्राहक सेवाएं और अन्य ऑफलाइन बैंकिंग कार्य प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि डिजिटल बैंकिंग, UPI और एटीएम जैसी सेवाएं पूरी तरह बंद होंगी या नहीं, यह संबंधित बैंकों की व्यवस्था और हड़ताल की स्थिति पर निर्भर करेगा।
11 सितंबर को पहली देशव्यापी बैंक हड़ताल
UFBU के घोषित आंदोलन कार्यक्रम के अनुसार बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की पहली देशव्यापी हड़ताल 11 सितंबर 2026 को होगी। इसके बाद सितंबर के आखिरी सप्ताह में लगातार तीन दिनों तक हड़ताल का कार्यक्रम रखा गया है।
सितंबर 2026 की प्रस्तावित हड़ताल की तारीखें:
- 11 सितंबर 2026 – एक दिन की देशव्यापी हड़ताल
- 28 सितंबर 2026 – हड़ताल
- 29 सितंबर 2026 – हड़ताल
- 30 सितंबर 2026 – हड़ताल
इस तरह सितंबर में कुल चार दिन बैंक कर्मचारियों की हड़ताल प्रस्तावित है। यदि बैंक यूनियनों और संबंधित पक्षों के बीच बातचीत के जरिए मांगों का समाधान नहीं निकलता है, तो आंदोलन को आगे बढ़ाने की चेतावनी दी गई है।
26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की तैयारी
बैंक यूनियनों ने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का फैसला किया है। सितंबर की हड़तालों के बाद भी यदि उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं होता है, तो 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की तैयारी है।
इसका मतलब है कि अगर आंदोलन की स्थिति बनी रहती है, तो बैंकिंग सेवाओं पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है। हालांकि अनिश्चितकालीन हड़ताल वास्तव में शुरू होगी या उससे पहले बातचीत के जरिए कोई समाधान निकलेगा, यह आने वाले समय में होने वाली वार्ता पर निर्भर करेगा।
5-Day Banking है कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग
बैंक यूनियनों की प्रमुख मांगों में सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था (5-Day Banking) लागू करना शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि इस व्यवस्था को लेकर पहले ही द्विपक्षीय समझौते में सहमति बन चुकी है, लेकिन इसे लागू करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है।
यूनियनों के मुताबिक 12वें द्विपक्षीय समझौते (12th Bipartite Settlement) और 9वें जॉइंट नोट में पांच दिन बैंकिंग से संबंधित सहमति दर्ज की गई थी। यह समझौता 8 मार्च 2024 को हुआ था।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सोमवार से शुक्रवार तक बैंकिंग कार्य किया जाना है। इसके लिए सप्ताह के कार्यदिवसों में प्रतिदिन लगभग 40 मिनट काम का समय बढ़ाने का प्रस्ताव बताया गया है, ताकि शनिवार को छुट्टी की व्यवस्था की जा सके।
बैंक कर्मचारियों का तर्क है कि देश के कई अन्य क्षेत्रों में पांच दिन कामकाज की व्यवस्था लागू हो चुकी है। ऐसे में बैंकिंग सेक्टर में भी इसे लागू करने से कर्मचारियों को बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस मिल सकता है।
PLI के नए नियमों को लेकर भी विरोध
बैंक यूनियनों की नाराजगी सिर्फ पांच दिन बैंकिंग तक सीमित नहीं है। Performance Linked Incentive यानी PLI के संशोधित नियम भी आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं।
UFBU की ओर से उठाई गई आपत्तियों के अनुसार PLI में अलग-अलग श्रेणी के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच अंतर बढ़ गया है। यूनियनों का कहना है कि बैंक का प्रदर्शन सामूहिक प्रयास का परिणाम होता है, इसलिए प्रोत्साहन भी व्यापक रूप से बैंक के सामूहिक प्रदर्शन से जुड़ा होना चाहिए।
यूनियनों के मुताबिक स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर अपेक्षाकृत अधिक PLI का प्रावधान है। वहीं कर्मचारियों और स्केल I से III तक के अधिकारियों के लिए अधिकतम PLI को 15 दिन के बेसिक वेतन और DA तक सीमित किए जाने पर आपत्ति जताई गई है।
बैंक यूनियनों का कहना है कि कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच PLI को लेकर बहुत अधिक असमानता नहीं होनी चाहिए और प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन की व्यवस्था अधिक न्यायसंगत होनी चाहिए।
पेंशन सुधार और OPS भी प्रमुख मुद्दा
बैंक कर्मचारियों और पेंशनधारकों से जुड़े मुद्दे भी इस आंदोलन में महत्वपूर्ण हैं। यूनियनों ने पेंशन में सुधार की मांग उठाई है। इसके साथ ही सभी पेंशनधारकों के लिए एक समान महंगाई भत्ता (DA) फॉर्मूला लागू करने की मांग भी की जा रही है।
इसके अलावा NPS यानी नेशनल पेंशन सिस्टम के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) में जाने का विकल्प देने की मांग भी आंदोलन के एजेंडे में शामिल है।
यूनियनों का कहना है कि पेंशन से जुड़े पुराने और नए कर्मचारियों के बीच मौजूद अंतर को दूर किया जाना चाहिए तथा सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बेहतर सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।
ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?
अगर घोषित कार्यक्रम के अनुसार हड़ताल होती है, तो सितंबर में चार दिनों तक बैंक शाखाओं में सामान्य कामकाज प्रभावित हो सकता है। ग्राहकों को विशेष रूप से उन सेवाओं में परेशानी हो सकती है जिनके लिए बैंक शाखा जाना जरूरी होता है।
इनमें कैश जमा या निकासी, चेक से जुड़े काम, बैंक खाते से संबंधित कुछ सेवाएं, दस्तावेज जमा करना और अन्य शाखा-आधारित कार्य शामिल हो सकते हैं।
हालांकि आज के समय में इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, UPI और ATM जैसी डिजिटल सुविधाएं बैंक शाखा के बाहर भी उपलब्ध रहती हैं। इसलिए हर बैंकिंग सेवा पूरी तरह बंद हो जाएगी, ऐसा जरूरी नहीं है। ग्राहकों को हड़ताल की तारीख नजदीक आने पर अपने बैंक की ओर से जारी जानकारी जरूर देखनी चाहिए।
अभी से निपटा लें जरूरी बैंकिंग काम
यदि सितंबर में प्रस्तावित हड़ताल अपने तय कार्यक्रम के अनुसार होती है, तो ग्राहकों के लिए बेहतर होगा कि वे जरूरी शाखा संबंधी काम पहले ही पूरा कर लें। खासतौर पर जिन लोगों को चेक जमा करने, नकद लेन-देन या दस्तावेजी काम के लिए बैंक शाखा जाना है, वे हड़ताल की तारीखों को ध्यान में रखकर अपनी योजना बना सकते हैं।
बड़ी रकम के जरूरी लेन-देन या समय-सीमा वाले बैंकिंग कार्यों को हड़ताल के दिनों के आसपास टालने से भी बचना बेहतर रहेगा।
अब बातचीत पर टिकी नजर
बैंक यूनियनों ने सितंबर से अक्टूबर तक आंदोलन का कार्यक्रम घोषित कर दिया है, लेकिन इसका अंतिम असर सरकार, बैंक प्रबंधन और यूनियनों के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगा। यदि मांगों पर सहमति बनती है तो आगे की हड़ताल टल सकती है या कार्यक्रम में बदलाव हो सकता है।
फिलहाल 11 सितंबर, 28 सितंबर, 29 सितंबर और 30 सितंबर की हड़ताल की तारीखों पर बैंक कर्मचारियों और ग्राहकों की नजर रहेगी। वहीं मांगों का समाधान नहीं निकलने की स्थिति में 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की तैयारी बैंकिंग सेक्टर के लिए बड़ा मुद्दा बन सकती है।
