रायपुर। छत्तीसगढ़ में 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर वयस्कों को पढ़ने-लिखने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के उद्देश्य से राज्यभर में विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत संचालित ‘उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ के अंतर्गत स्कूल शिक्षा विभाग ने 1 से 15 सितंबर तक 15 दिवसीय राज्यव्यापी ‘साक्षरता पखवाड़ा’ आयोजित करने का निर्णय लिया है।
यह अभियान 8 सितंबर को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर को ध्यान में रखते हुए आयोजित किया जा रहा है। अभियान के दौरान प्रदेश के सभी जिलों में अलग-अलग गतिविधियों के माध्यम से लोगों को साक्षरता के महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा और अधिक से अधिक असाक्षर वयस्कों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों और जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण के अध्यक्षों को विस्तृत कार्ययोजना भेजी है। अधिकारियों को अभियान में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों तक कार्यक्रम की पहुंच बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
1 सितंबर को उल्लास शपथ के साथ होगी शुरुआत
‘साक्षरता पखवाड़ा’ की शुरुआत 1 सितंबर से होगी। प्रदेश के सभी शासकीय कार्यालयों, स्कूलों और कॉलेजों में ‘उल्लास शपथ’ दिलाई जाएगी। इसके माध्यम से अधिकारी, कर्मचारी, शिक्षक और विद्यार्थी समाज में साक्षरता को बढ़ावा देने तथा असाक्षर लोगों को शिक्षा से जोड़ने का संकल्प लेंगे।
इसके साथ ही जिलों में अभियान से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों की शुरुआत होगी। प्रशासन, शिक्षा विभाग, स्थानीय संस्थाओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों की भागीदारी से इसे व्यापक जन-अभियान बनाने की तैयारी है।
घर-घर सर्वे कर असाक्षरों का होगा डिजिटल पंजीयन
अभियान के दौरान घर-घर सघन सर्वेक्षण किया जाएगा। सर्वे के माध्यम से 15 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे लोगों की पहचान की जाएगी, जो पढ़ना-लिखना नहीं जानते या अभी तक साक्षरता कार्यक्रम से नहीं जुड़ पाए हैं।
चिह्नित असाक्षरों के साथ-साथ स्वयंसेवी शिक्षकों का भी ‘उल्लास मोबाइल ऐप’ के माध्यम से शत-प्रतिशत डिजिटल पंजीयन किया जाएगा। इससे अभियान में शामिल शिक्षार्थियों और स्वयंसेवकों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और उनकी प्रगति की निगरानी में भी मदद मिलेगी।
9वीं से 12वीं के छात्रों को मिलेंगे 10 बोनस अंक
साक्षरता अभियान में स्कूली विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक विशेष प्रावधान किया गया है। इसके तहत कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थी यदि 10 असाक्षर लोगों को साक्षर बनाने में सफल होते हैं, तो उन्हें 10 बोनस अंक दिए जाएंगे।
ये बोनस अंक स्थानीय स्तर की परीक्षा और बोर्ड परीक्षा से जुड़े प्रावधानों के तहत दिए जाने हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ना और उन्हें साक्षरता अभियान का सक्रिय भागीदार बनाना है।
शिक्षा विभाग द्वारा इस प्रावधान का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थी अभियान से जुड़ें और अपने आसपास के असाक्षर लोगों को पढ़ाने में सहयोग करें।
‘अंगूठे से कलम की ओर’ अभियान
पखवाड़े के शुरुआती दिनों में ‘अंगूठे से कलम की ओर’ अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत नव-साक्षरों को सबसे पहले अपने नाम का हस्ताक्षर करना सिखाया जाएगा।
इस अभियान का उद्देश्य उन लोगों में आत्मविश्वास बढ़ाना है, जो अब तक दस्तावेजों या अन्य जरूरी कामों में अंगूठे का निशान लगाते रहे हैं। हस्ताक्षर सीखने के बाद वे बैंक, सरकारी कार्यालय और अन्य जरूरी कार्यों में अधिक आत्मनिर्भर हो सकेंगे।
शिक्षक दिवस पर उत्कृष्ट कार्य करने वालों का सम्मान
साक्षरता पखवाड़े के दौरान शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षा और साक्षरता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों एवं समाजसेवियों को सम्मानित किया जाएगा।
इसके जरिए उन लोगों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जो अपने समय और संसाधनों का उपयोग कर समाज के वंचित एवं असाक्षर वर्ग को शिक्षा से जोड़ने का काम कर रहे हैं।
हाट-बाजारों में होंगे नुक्कड़ नाटक और साक्षरता चौपाल
साक्षरता का संदेश सिर्फ स्कूल और सरकारी कार्यालयों तक सीमित न रहे, इसके लिए ग्रामीण और सार्वजनिक स्थानों पर भी जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
अभियान के तहत हाट-बाजारों में नुक्कड़ नाटक, साक्षरता चौपाल, प्रभात फेरी और मशाल रैलियां आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय भाषा और सरल संवाद के जरिए लोगों को शिक्षा के महत्व के बारे में बताया जाएगा।
7 सितंबर को ‘चिट्ठी कलेक्टर के नाम’ प्रतियोगिता
7 सितंबर को विशेष रूप से ‘चिट्ठी कलेक्टर के नाम’ प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसमें नव-साक्षर बुजुर्गों और महिलाओं को स्वयं अपने हाथ से चिट्ठी लिखने का अवसर दिया जाएगा।
इस गतिविधि के जरिए नव-साक्षरों को अपनी लिखने की क्षमता प्रदर्शित करने के साथ-साथ साक्षरता का संदेश देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। यह प्रतियोगिता उन लोगों के लिए खास होगी, जिन्होंने हाल ही में पढ़ना-लिखना सीखा है।
8 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर होंगे बड़े आयोजन
8 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर प्रदेशभर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जिला, जनपद और ग्राम पंचायत स्तर पर मुख्य समारोह होंगे। इन कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, स्वयंसेवकों और आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
इसी दिन सुबह 8 बजे विद्यार्थियों और नागरिकों द्वारा साक्षरता नारों के साथ विशाल मानव श्रृंखला बनाई जाएगी। इसका उद्देश्य समाज में साक्षरता को लेकर जागरूकता का संदेश देना और अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ना होगा।
शाम 7 बजे जलेगा ‘उल्लास साक्षरता दीप’
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस की शाम 7 बजे पूरे छत्तीसगढ़ में ‘उल्लास साक्षरता दीप’ जलाया जाएगा। इसके माध्यम से साक्षरता के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता और संकल्प का प्रदर्शन किया जाएगा।
प्रदेशभर में एक साथ दीप जलाकर यह संदेश देने का प्रयास किया जाएगा कि कोई भी व्यक्ति शिक्षा और साक्षरता से वंचित न रहे।
9 सितंबर को नवाचारी शिक्षकों का विशेष प्रदर्शन
साक्षरता दिवस के अगले दिन 9 सितंबर को नवाचारी शिक्षकों द्वारा विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसमें ‘उल्लास’ कार्यक्रम के शिक्षार्थियों को सीखने-सिखाने के लिए तैयार किए गए मनोरंजन आधारित टीएलएम (Teaching Learning Material) का प्रदर्शन किया जाएगा।
इसका उद्देश्य वयस्क शिक्षार्थियों के लिए पढ़ाई को आसान, रोचक और व्यवहारिक बनाना है। मनोरंजन और गतिविधियों के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जाएगा।
15 दिन तक चलेगा जागरूकता और साक्षरता का अभियान
‘साक्षरता पखवाड़ा’ 1 सितंबर से 15 सितंबर तक चलेगा। इन 15 दिनों में सर्वेक्षण, डिजिटल पंजीयन, हस्ताक्षर अभियान, जनजागरूकता कार्यक्रम, प्रतियोगिताएं, मानव श्रृंखला, साक्षरता दीप और नवाचारी शिक्षण गतिविधियों के माध्यम से अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप देने की कोशिश की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य केवल असाक्षर वयस्कों को पढ़ना-लिखना सिखाना ही नहीं, बल्कि उन्हें दैनिक जीवन में पढ़ने, लिखने, गणना करने और जरूरी जानकारी समझने में सक्षम बनाना भी है। विद्यार्थियों, शिक्षकों, समाजसेवियों और आम नागरिकों की भागीदारी से यह अभियान प्रदेश में साक्षरता का दायरा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
