राजनांदगांव/डोंगरगढ़। डोंगरगढ़ भाजपा में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान अब संगठनात्मक स्तर पर भी सामने आने लगी है। डोंगरगढ़ भाजपा मंडल को भंग किए जाने के फैसले से नाराज मंडल पदाधिकारियों और सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने विधानसभा अध्यक्ष एवं वरिष्ठ भाजपा नेता रमन सिंह से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा। कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि जब मंडल की ओर से कोई गलती नहीं हुई थी, तो फिर पूरे मंडल को भंग करने का फैसला क्यों लिया गया?
बताया गया कि रविवार शाम करीब 5 बजे डोंगरगढ़ मंडल अध्यक्ष जसमीत बन्नोआना, नगर पालिका अध्यक्ष रमन डोंगरे, उपाध्यक्ष, बड़ी संख्या में पार्षद, मंडल पदाधिकारी और विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारी स्पीकर हाउस पहुंचे। यहां उन्होंने डॉ. रमन सिंह के सामने मंडल को भंग किए जाने से जुड़ी अपनी नाराजगी और मांग रखी।

‘पांच लोगों की गलती की सजा पूरे मंडल को क्यों?’
बैठक के दौरान डोंगरगढ़ से पहुंचे भाजपा पदाधिकारियों ने कहा कि पार्टी के भीतर चल रहे विवाद के बाद पांच लोगों को संगठन से निष्कासित किया गया, लेकिन मंडल की ओर से कोई गलती नहीं की गई थी। इसके बावजूद मंडल के पदाधिकारियों को विश्वास में लिए बिना डोंगरगढ़ मंडल को भंग कर दिया गया।
कार्यकर्ताओं का कहना था कि यदि कुछ व्यक्तियों के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई हुई थी तो उसका असर पूरे मंडल पर क्यों डाला गया? उन्होंने मांग की कि डोंगरगढ़ भाजपा मंडल को दोबारा बहाल किया जाए और मौजूदा पदाधिकारियों को काम करने का अवसर दिया जाए।
सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर रखा पक्ष
इस मुलाकात की खास बात यह रही कि यह सिर्फ कुछ पदाधिकारियों की बैठक नहीं थी, बल्कि बड़ी संख्या में स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता और संगठन से जुड़े लोग एक साथ पहुंचे। मंडल अध्यक्ष से लेकर नगर पालिका के जनप्रतिनिधि और विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारियों ने इस मुद्दे पर अपनी एकजुटता दिखाई।
कार्यकर्ताओं ने संगठन के फैसले पर सवाल उठाते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि मंडल को भंग करने के निर्णय से स्थानीय स्तर पर असंतोष है और इसे वापस लिया जाना चाहिए।
रमन सिंह ने सुना पक्ष, दिया चर्चा का भरोसा
मुलाकात के दौरान डॉ. रमन सिंह ने डोंगरगढ़ से पहुंचे पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की बातें सुनीं। बताया जा रहा है कि उन्होंने उन्हें भरोसा दिलाया कि उनके साथ अन्याय नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों अजय जमवाल और पवन साय से समय लेकर इस मामले पर चर्चा की जाएगी। इसके लिए डोंगरगढ़ से करीब 10 से 15 लोगों को साथ बैठकर अपना पक्ष रखने का अवसर देने की बात कही गई है।
इसके बाद संगठन के वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा कर मामले में उचित निर्णय लिए जाने का आश्वासन दिया गया।
मंडल बहाली की मांग पर अड़े पदाधिकारी
मुलाकात के बाद डोंगरगढ़ से पहुंचे पदाधिकारियों ने कहा कि उन्हें विधानसभा अध्यक्ष की ओर से भरोसा मिला है कि उनके साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। कार्यकर्ताओं की मुख्य मांग यही है कि डोंगरगढ़ मंडल को फिर से बहाल किया जाए।
पदाधिकारियों का तर्क है कि यदि विवाद में शामिल कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, तो उस कार्रवाई को पूरे मंडल से जोड़ना उचित नहीं है। उनका कहना है कि मंडल के बाकी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को बिना किसी दोष के संगठनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।
लंबे समय से चल रही है अंदरूनी खींचतान
दरअसल, डोंगरगढ़ भाजपा में लंबे समय से अंदरूनी खींचतान की स्थिति बनी हुई है। विवाद के दौरान सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी चला। पार्टी के अंदर चल रहे इस विवाद के बाद संगठन ने पांच नेताओं को भाजपा से निष्कासित कर दिया था।
इसके बाद डोंगरगढ़ भाजपा मंडल को भी भंग कर दिया गया। मंडल भंग किए जाने के फैसले के बाद स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ी और अब उन्होंने सीधे विधानसभा अध्यक्ष के सामने अपनी बात रखी है।
आगे संगठन की बैठक में तय होगा फैसला
अब पूरे मामले में अगला कदम संगठन के वरिष्ठ नेताओं के साथ होने वाली चर्चा को माना जा रहा है। डोंगरगढ़ के प्रतिनिधियों को साथ बैठाकर उनका पक्ष सुनने और उसके बाद संगठन स्तर पर निर्णय लेने की बात सामने आई है।
ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि क्या भाजपा संगठन डोंगरगढ़ मंडल को दोबारा बहाल करता है या मंडल के पुनर्गठन का कोई नया फार्मूला सामने आता है। फिलहाल कार्यकर्ता मंडल की बहाली की मांग पर कायम हैं और उन्हें उम्मीद है कि संगठन उनकी बात पर सकारात्मक निर्णय लेगा।
