दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग में आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ सभा में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा ने कांग्रेस तथा विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस पर चुनावी हार के बाद चुनाव आयोग पर सवाल उठाने, लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करने और देश में अराजकता का माहौल बनाने का आरोप लगाया। नड्डा ने कहा कि जब कांग्रेस चुनाव जीतती है, तब उसे सब कुछ ठीक लगता है, लेकिन हारने पर वही पार्टी चुनाव आयोग को खराब बताने लगती है। उन्होंने कहा कि देश को ऐसी राजनीति और अराजकता से बचाने की जरूरत है।

दिल्ली में 1 नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के विरोध में आयोजित इस सभा में भाजपा नेताओं ने विपक्ष की चुनावी रणनीति और लोकतंत्र को लेकर उसके रुख पर सवाल उठाए। दुर्ग के महेश कॉलोनी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, स्वास्थ्य मंत्री विनय जायसवाल, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, सांसद विजय बघेल, विधायक ललित चंद्राकर, रिकेश सेन, डोमनलाल कोर्सेवाड़ा और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडेय सहित कई भाजपा नेता मौजूद रहे।
चुनाव आयोग पर सवाल उठाने को लेकर कांग्रेस पर बरसे जेपी नड्डा
सभा को संबोधित करते हुए जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर चुनाव परिणामों को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव में जीत मिलने पर कांग्रेस अपनी रणनीति और व्यवस्था को सही बताती है, लेकिन हारने पर चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करने लगती है।
नड्डा ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है। चुनाव में जीत और हार राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, लेकिन हार स्वीकार करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने विपक्ष पर चुनावी परिणामों के बहाने देश में अविश्वास का माहौल बनाने का आरोप लगाया।
भाजपा नेता ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी है कि सभी राजनीतिक दल चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करें। उनके मुताबिक, चुनाव परिणाम अपने पक्ष में आने पर व्यवस्था की तारीफ करना और हारने पर उसी व्यवस्था को गलत बताना राजनीतिक दोहरेपन को दर्शाता है।
एसआईआर को लेकर भी कांग्रेस पर साधा निशाना
अपने संबोधन में जेपी नड्डा ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि देश में यह प्रक्रिया पहली बार नहीं हो रही है, बल्कि पहले भी कई बार मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण कराया जा चुका है।
नड्डा ने अपने भाषण में दावा किया कि एसआईआर के माध्यम से बड़ी संख्या में ऐसे नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जो अनुपस्थित थे या पात्र मतदाता नहीं थे। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि मतदाता सूची को दुरुस्त करना चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता के लिए जरूरी है।
केंद्रीय मंत्री ने एसआईआर का बचाव करते हुए कहा कि मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम शामिल होना और अपात्र नामों को हटाना निष्पक्ष चुनाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विपक्ष पर इस प्रक्रिया को राजनीतिक विवाद बनाने का आरोप लगाया।
हालांकि, मतदाता सूची से हटाए गए नामों की संख्या और उनके कारणों से संबंधित आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों में प्रत्येक श्रेणी और संबंधित आधिकारिक आंकड़ों को अलग-अलग देखना जरूरी होता है।
‘घुसपैठियों के सहारे चुनाव जीतना चाहती है कांग्रेस’
जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्षी दल जनता के समर्थन के बजाय कथित घुसपैठियों के सहारे चुनाव जीतने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा का मानना है कि देश में चुनाव जनता के विश्वास और समर्थन के आधार पर जीते जाने चाहिए।
नड्डा ने अपने भाषण में सीमावर्ती जिलों में मतदान प्रतिशत बढ़ने का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि सीमा से लगे नौ जिलों में वोट प्रतिशत में वृद्धि हुई है। हालांकि, उन्होंने इस दौरान संबंधित जिलों और मतदान के आधिकारिक आंकड़ों का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया।
उन्होंने विपक्षी दलों पर चुनावी प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है। भाजपा नेता ने कहा कि राजनीतिक दलों को जनता के बीच जाकर अपना समर्थन बढ़ाना चाहिए, न कि चुनावी व्यवस्था पर लगातार सवाल उठाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करनी चाहिए।
ईवीएम और बैलेट से आगे जनता के विश्वास को बताया अहम
अपने संबोधन में नड्डा ने चुनाव जीतने के लिए जनता के विश्वास को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव ईवीएम या बैलेट पेपर के माध्यम से कराए जाएं, अंततः लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का समर्थन ही निर्णायक होता है।
उन्होंने हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक का जिक्र करते हुए वहां भविष्य में भाजपा की जीत की उम्मीद जताई। उनके इस बयान को आगामी चुनावों के मद्देनजर भाजपा के राजनीतिक आत्मविश्वास के तौर पर देखा जा सकता है।
नड्डा ने उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों का जिक्र करते हुए विपक्षी गठबंधन के नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक चुनावी सफलता हासिल नहीं कर पाने वाले विपक्षी नेता भी चुनावी प्रक्रिया में चोरी और गड़बड़ी के आरोप लगाते हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले- लोकतंत्र की दुहाई देने वालों ने ही लगाया था आपातकाल
सभा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज भाजपा के कार्यकर्ता और नेता उन ताकतों के खिलाफ एकजुट हुए हैं, जो उनके अनुसार देश को अस्थिर करने का प्रयास कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के शासनकाल में लगाए गए आपातकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र की बात करने वाली कांग्रेस ने ही देश में आपातकाल लागू किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौरान विपक्षी नेताओं को जेल में डाला गया और मीडिया पर सेंसरशिप लगाई गई।
साय ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान और निष्पक्ष चुनाव बेहद जरूरी हैं। उनके मुताबिक, कांग्रेस का मौजूदा रवैया उसके पुराने राजनीतिक इतिहास से मेल नहीं खाता।
मुख्यमंत्री ने संविधान के अनुच्छेद 356 का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में इसका दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा कि अब वही पार्टी लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा की बात कर रही है।
‘चुनाव जीतने पर विरोध नहीं, हारने पर गड़बड़ी का आरोप’
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी चुनावी नतीजों के बाद कांग्रेस की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस चुनाव जीतती है, तब उसे चुनावी प्रक्रिया में कोई समस्या नजर नहीं आती, लेकिन हारने के बाद गड़बड़ी के आरोप लगाए जाने लगते हैं।
साय ने कहा कि जनता राजनीतिक दलों के व्यवहार और उनके दोहरे चरित्र को समझती है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की ओर से चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर अराजकता फैलाने की कोशिश सफल नहीं होगी।
मुख्यमंत्री ने भाजपा कार्यकर्ताओं से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास हासिल करना ही राजनीति का मूल उद्देश्य होना चाहिए और राजनीतिक दलों को जनादेश का सम्मान करना चाहिए।
दिल्ली में कांग्रेस के प्रस्तावित प्रदर्शन के विरोध में सभा
दुर्ग में आयोजित यह कार्यक्रम कांग्रेस के 1 नवंबर को दिल्ली में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के विरोध में आयोजित किया गया था। सभा के माध्यम से भाजपा ने कांग्रेस की चुनावी राजनीति, एसआईआर पर उसके रुख और चुनाव आयोग को लेकर उठाए जा रहे सवालों का विरोध किया।
कार्यक्रम में प्रदेश और स्थानीय स्तर के भाजपा नेताओं की मौजूदगी ने इसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के संबोधनों में चुनावी पारदर्शिता, मतदाता सूची के पुनरीक्षण, आपातकाल और संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आए।
कुल मिलाकर, दुर्ग की इस सभा में भाजपा ने कांग्रेस पर लोकतंत्र के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए विपक्ष की राजनीति को निशाने पर लिया। वहीं, नड्डा और साय के बयानों से साफ हुआ कि चुनाव आयोग, एसआईआर और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव आगे भी जारी रहने की संभावना है।
