मुंबई। भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल ‘लगान’ ने अपनी रिलीज़ के 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस खास मौके पर फिल्म में ब्रिटिश अधिकारी की बहन एलिज़ाबेथ रसेल यानी ‘गोरी मेम’ का किरदार निभाने वाली ब्रिटिश अभिनेत्री रेचल शेली ने भारतीय दर्शकों के लिए एक भावुक संदेश साझा किया है। उन्होंने कहा कि इतने वर्षों बाद भी ‘लगान’ उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बनी हुई है और इस फिल्म को अमर बनाने का श्रेय दर्शकों के प्यार और समर्थन को जाता है।
इंस्टाग्राम पर साझा किया भावुक वीडियो
रेचल शेली ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा करते हुए ‘लगान’ से जुड़ी अपनी यादों को ताजा किया। उन्होंने कहा कि इस फिल्म के साथ बिताया गया समय आज भी उनके दिल के बेहद करीब है।
उन्होंने कहा कि समय बीतने के साथ उनकी भावनाएं बदलती रहती हैं।

“कभी-कभी मुझे लगता है कि यह कल की ही बात है और कभी-कभी ऐसा महसूस होता है जैसे यह किसी दूसरी जिंदगी की बात हो।”
उन्होंने बताया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान मिले अनुभव और भारत में बिताए गए पल आज भी उनकी यादों में ताजा हैं।
दर्शकों को दिया फिल्म की सफलता का श्रेय
रेचल शेली ने कहा कि किसी फिल्म को केवल कलाकार और तकनीकी टीम नहीं बनाते, बल्कि दर्शक उसे हमेशा के लिए जीवित रखते हैं।
उन्होंने भारतीय दर्शकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले 25 वर्षों में जिस तरह लोगों ने ‘लगान’ को प्यार दिया, उसी ने इसे एक कालजयी फिल्म बना दिया।
उन्होंने कहा—
“हम कलाकार और क्रू फिल्म बनाते हैं, लेकिन दर्शक उसे देखकर, उसे याद रखकर और वर्षों तक प्यार देकर उसे पूरा करते हैं।”
उनके अनुसार, किसी भी फिल्म की असली सफलता दर्शकों के दिलों में उसकी जगह से तय होती है।
आज भी करियर पर है ‘लगान’ का असर
रेचल शेली ने बताया कि ‘लगान’ उनके अभिनय करियर का सबसे महत्वपूर्ण पड़ावों में से एक रही है।
उन्होंने कहा कि इस फिल्म का प्रभाव आज भी उनके काम और सोच में दिखाई देता है।
“यह फिल्म हर दिन मेरे साथ रहती है। इसके बाद मैंने जो भी काम किया, उस पर कहीं न कहीं ‘लगान’ का असर रहा है।”
उन्होंने कहा कि ‘लगान’ उनके लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव है जिसने उनके जीवन और करियर को नई दिशा दी।
‘लगान’ ने रचा था इतिहास
साल 2001 में रिलीज़ हुई ‘लगान’ का निर्देशन आशुतोष गोवारिकर ने किया था, जबकि फिल्म का निर्माण आमिर खान ने किया था।
फिल्म की कहानी वर्ष 1893 के ब्रिटिश शासनकाल की पृष्ठभूमि पर आधारित थी। इसमें एक छोटे से गांव के किसान भीषण सूखे और भारी लगान (कर) से परेशान होकर अंग्रेज अधिकारियों को क्रिकेट मैच की चुनौती देते हैं। यदि गांव वाले मैच जीत जाते हैं तो उनका लगान माफ कर दिया जाएगा।
ग्रामीणों के संघर्ष, एकता, आत्मविश्वास और देशभक्ति पर आधारित इस फिल्म ने भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।
ऑस्कर तक पहुंची थी ‘लगान’
‘लगान’ भारतीय सिनेमा के इतिहास की उन चुनिंदा फिल्मों में शामिल है जिन्हें एकेडमी अवॉर्ड (ऑस्कर) में बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म श्रेणी के लिए नामांकन मिला था।
इसके अलावा फिल्म ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम किए और भारतीय सिनेमा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आज भी दर्शकों की पसंदीदा फिल्मों में शामिल
रिलीज़ के 25 साल बाद भी ‘लगान’ को भारतीय सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में गिना जाता है। फिल्म के गीत, कहानी, अभिनय और क्रिकेट के रोमांचक मुकाबले को आज भी दर्शक उसी उत्साह के साथ देखते हैं।
रेचल शेली का यह भावुक संदेश एक बार फिर यह साबित करता है कि ‘लगान’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की ऐसी विरासत है, जिसने कलाकारों और दर्शकों के बीच एक अटूट भावनात्मक रिश्ता कायम किया।
