Captain Smit Machhar News: भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार इन दिनों चर्चा में हैं। फ्लाईदुबई के विमान में सवार 174 यात्रियों की जान बचाने में उनकी भूमिका की तारीफ हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कैप्टन स्मित से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत की। इस बीच उनके पिता भूपेंद्र मच्छार ने एक इंटरव्यू में अपने बेटे की उपलब्धि पर खुशी जाहिर की और युवाओं को परिवार, ईमानदारी और सकारात्मक सोच से जुड़ा खास संदेश दिया।
भूपेंद्र मच्छार ने अपने बेटे से जुड़ी कुछ पारिवारिक परंपराओं के बारे में भी बात की। इसी दौरान उन्होंने उस घटना का भी जिक्र किया, जब कैप्टन स्मित ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत में बताया था कि मुश्किल परिस्थिति के दौरान वह हनुमान चालीसा पढ़ रहे थे।

बेटे की उपलब्धि पर पिता ने जताया गर्व
भूपेंद्र मच्छार ने कहा कि उनके लिए यह बेहद गर्व का पल है। वह अपने बेटे से मिलना चाहते हैं और इस पूरे घटनाक्रम के बाद परिवार में खुशी का माहौल है।
उन्होंने बताया कि स्मित जिस तरह अपने परिवार और माता-पिता का सम्मान करता है, वह उनके लिए महत्वपूर्ण बात है। उनके मुताबिक सफलता केवल किसी उपलब्धि तक पहुंचने का नाम नहीं है, बल्कि परिवार और संस्कारों से जुड़े रहना भी उतना ही जरूरी है।
Gen-Z को भूपेंद्र मच्छार की खास सलाह
कैप्टन स्मित के पिता ने आज की युवा पीढ़ी यानी Gen-Z को भी संदेश दिया। उन्होंने युवाओं से परिवार को महत्व देने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की बात कही।
उन्होंने कहा कि उनका बेटा जिस तरह माता-पिता का सम्मान करता है और परिवार के साथ रहता है, उसी तरह युवाओं को भी अपने परिवार के साथ जुड़े रहना चाहिए।
भूपेंद्र मच्छार ने युवाओं से सच्चाई और ईमानदारी को जीवन में बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि इंसान को हमेशा अच्छा सोचना चाहिए और ईमानदारी के रास्ते पर चलना चाहिए। उनके मुताबिक यही सोच आगे चलकर सफलता का आधार बनती है।
‘जितना अच्छा सोचेंगे, ऊपर वाला उतनी मदद करेगा’
भूपेंद्र मच्छार ने सकारात्मक सोच पर जोर देते हुए कहा कि इंसान की सोच का उसके जीवन पर असर पड़ता है। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि वे नकारात्मकता से दूर रहें और अच्छे विचारों के साथ आगे बढ़ें।
उनका कहना था कि अगर आप अच्छा सोचेंगे और सही रास्ते पर चलेंगे तो ऊपर वाला भी आपकी मदद करेगा। उन्होंने इसे युवाओं की सफलता और समाज में बेहतर माहौल के लिए जरूरी बताया।
हनुमान चालीसा से परिवार का पुराना जुड़ाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित मच्छार ने बताया था कि मुश्किल हालात में जब को-पायलट ने हमला किया, तब वह हनुमान चालीसा पढ़ते रहे। उनके मुताबिक इससे उन्हें हिम्मत मिली।
जब उनके पिता से हनुमान चालीसा और परिवार की इस परंपरा के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि यह उनके परिवार का हिस्सा रहा है।
भूपेंद्र मच्छार ने बताया कि उनके घर में हनुमान चालीसा पढ़ने की एक नियमित परंपरा है। उन्होंने कहा कि परिवार में रात को सोने से पहले हनुमान चालीसा पढ़ी जाती है और सुबह उठने के बाद भी बच्चों को गोद में बैठाकर हनुमान चालीसा सुनाई जाती है।
मुश्किल वक्त में संस्कार और विश्वास बने सहारा
कैप्टन स्मित की बातचीत में हनुमान चालीसा का जिक्र सामने आने के बाद उनके पिता की कही बातें परिवार के संस्कारों की ओर भी इशारा करती हैं। भूपेंद्र मच्छार के मुताबिक बचपन से ही परिवार में धार्मिक पाठ और पारिवारिक मूल्यों को महत्व दिया जाता रहा है।
उनके अनुसार, यही संस्कार बच्चों के व्यक्तित्व का हिस्सा बनते हैं और मुश्किल समय में उन्हें मानसिक मजबूती देने में मदद कर सकते हैं।
युवाओं के लिए पिता का संदेश
भूपेंद्र मच्छार का संदेश मुख्य रूप से तीन बातों पर केंद्रित रहा—परिवार का सम्मान, सकारात्मक सोच और ईमानदारी। उन्होंने युवाओं से कहा कि आधुनिक जीवनशैली और व्यस्तता के बावजूद परिवार के साथ अपने रिश्तों को मजबूत बनाए रखना जरूरी है।
कैप्टन स्मित मच्छार की चर्चा के बीच उनके पिता की ये बातें भी सामने आई हैं कि किसी व्यक्ति की सफलता के पीछे केवल उसकी पेशेवर क्षमता नहीं, बल्कि उसके संस्कार और परिवार से मिले मूल्य भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
