गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही जनपद में सामने आया यह मामला शिक्षा योजना के फंड में कथित गड़बड़ी को लेकर काफी गंभीर माना जा रहा है। पूरी खबर को आसान और क्रमबद्ध तरीके से समझते हैं—
🔴 क्या है पूरा मामला?
- मरवाही जनपद पंचायत में सर्व शिक्षा अभियान (समग्र शिक्षा) के फंड में गड़बड़ी का आरोप
- RTI और बैंक स्टेटमेंट के जरिए लाखों रुपये के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा
- आरोप है कि नियमों के खिलाफ खाते से पैसा निकाला और खर्च किया गया

💸 कितनी राशि का मामला?
- 1 जनवरी 2022 से 31 दिसंबर 2024 तक
👉 करीब ₹99.27 लाख निकाले गए - 27 मई 2024 से 12 जून 2025 के बीच
👉 करीब ₹12.64 लाख का और ट्रांजैक्शन
👉 यानी कुल मिलाकर एक करोड़ रुपये से ज्यादा का संदिग्ध लेन-देन सामने आया है

⚠️ नियम क्या कहते हैं?
- समग्र शिक्षा अभियान के तहत
- खाते का संचालन संयुक्त हस्ताक्षर (CEO + BRCC) से होना चाहिए
- राशि निर्धारित कार्यों (भवन, कक्ष, जल संरचना) पर ही खर्च हो सकती है
- बची राशि को सरकार को वापस (सरेंडर) करना होता है
❗ आरोप क्या हैं?
- सरकार के आदेश के बावजूद राशि वापस नहीं की गई
- बिना BRCC की सहमति/हस्ताक्षर के ट्रांजैक्शन किए गए
- पैसा कथित तौर पर
- पेट्रोल पंप
- टूर एंड ट्रेवल्स
- निजी खातों
में ट्रांसफर किया गया
👉 इससे मिलीभगत और अनियमितता के गंभीर सवाल उठ रहे हैं
🏛️ जिम्मेदार कौन?
- तत्कालीन और वर्तमान जनपद CEO की भूमिका जांच के दायरे में
- रजनीश तिवारी (जिला शिक्षा अधिकारी) ने कहा—
👉 “खाता कभी सिंगल ऑपरेट नहीं हो सकता, संयुक्त हस्ताक्षर जरूरी हैं”
🔎 प्रशासन का रुख
- मुकेश रावटे ने कहा—
- मामले की जानकारी मीडिया से मिली
- DEO से रिपोर्ट मांगी गई है
- अगर गड़बड़ी साबित हुई तो कार्रवाई तय है
🚨 मामला क्यों गंभीर है?
- यह पैसा शिक्षा और बच्चों के विकास के लिए था
- नियमों की अनदेखी कर खर्च होने से
👉 योजनाओं का लाभ प्रभावित हो सकता है - सरकारी सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल
🔚 निष्कर्ष
यह सिर्फ वित्तीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा संवेदनशील मामला है।
अब सबकी नजर इस पर है कि—
👉 जांच में क्या सामने आता है
👉 और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है
